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श्री ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के बाद वृक्षों की छाया में बैठकर आराम करने की परंपरा

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भोपाल। शहर के कोटरा सुल्तानाबाद स्थित श्री श्री ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर आसपास के रहवासियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। मंदिर में लगे वृक्षों से सारे दिन छाया रहती है। जो भी यहां पर महादेव के दर्शन करने आते हैं। वृक्षों की छाया में बैठकर आराम जरूर करते हैं। इन दिनों वर्षा के मौसम में सावन माह में मंदिर प्रांगण में पेड़ लगे होने से हरियाली देखते ही बनती है। इन दिनों सुबह छह बजे से श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मंदिर खुल जाता है, जो सावन सोमवार को देर रात तक खुला रहता है।

यह है मंदिर का इतिहास

श्री श्री राधारमण श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ समिति की ओर से मंदिर की स्थापना की गई। 21 अगस्त 2001 को इनकी माता स्वर्गीय सुधा शर्मा की पुण्य स्मृति में पांच वृक्ष जिसमें पीपल, आंवला, विल्भ पत्र, हरसिंगार, पारिजात वृक्ष एवं श्री ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना हुई। स्थापना वार्ड 27 से पूर्व पार्षद मुकेश राय के द्वारा कराई गई। सावन के पवित्र मास में आसपास के सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर में आकर भगवान शंकर का अभिषेक पूजन एवं आरती करते हैं। साथ ही मंदिर में समय-समय पर कन्या भोज का आयोजन भी करवाया जाता है।

यह है मंदिर की विशेषता

मंदिर में अब तक चार बार प्रदेश एवं भारत देश के कल्याण की कामना से सुंदरकांड का आयोजन हो चुके हैं। मंदिर में शेड निर्माण होते ही श्रद्धालुओं के लिए बैठने की व्यवस्था हो गई। मंदिर की विशेषता यहां की हरियाली है। श्रद्धालु भी आकर हर वर्षा में मंदिर प्रांगण में पौधे लगाते हैं। सावन महीने में शिवजी की विशेष पूजा के साथ-साथ पौधे भी रोपे जा रहे हैं। हर दिन भगवान शंकर के दरबार में समाज एवं प्रदेश की कल्याण के लिए श्री ऋण मुक्तेश्वर महादेव से प्रार्थना करने श्रद्धालु आते हैं।

लोगों का मिलता है सहयोग

मंदिर में कोई भी धार्मिक आयोजन होते हैं, उनमें रहवासियों का पूरा सहयोग मिलता है। सुंदरकांड, शिव महापुराण, श्रीमद् भागवत कथाओं का आयोजन सभी के सहयोग से किया जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों में बच्चों की सहभागिता भी होती है। अमितानंद, पुजारी,

सोमवार को लगती है भीड़

मंदिर प्रांगण में सावन सोमवार पर श्रद्धालुओं की संख्या दोगुनी हो जाती है। मंदिर में प्रांगण में श्रद्धालु शिवजी का अभिषेक करने आते हैं। 31 जुलाई को सावन माह का चौथा सोमवार है। शिवजी की अभिषेक की तैयारियां हो चुकी हैं।

प्रदीप शास्त्री, सेवक

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