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निलंबित आइपीएस जीपी सिंह बर्खास्त राज्य की सिफारिश पर गृह मंत्रालय ने लगाई मुहर

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रायपुर। राजद्रोह और आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में आरोपी आइपीएस जीपी सिंह को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आठ वर्ष पहले ही नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। राज्य सरकार की सिफारिश के लगभग 10 महीने बाद गृह मंत्रालय ने बर्खास्तगी पर मुहर लगा दी है। राज्य सरकार के खिलाफ षड्यंत्र और आपराधिक मामलों को आधार मानते हुए कांग्रेस सरकार ने केंद्र सरकार को यह प्रस्ताव भेजा था कि दागी अफसर को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाए। वर्ष 2022 में जीपी सिंह को गिरफ्तार किया गया था। उन पर लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का भी गठन किया गया था। आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में जीपी सिंह के खिलाफ 10 करोड़ से अधिक के सम्पत्ति का ब्यौरा मिला था। इसके साथ ही सरकार गिराने की साजिश पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था। 5 जुलाई 2021 को राज्य सरकार ने जीपी सिंह को निलंबित किया था। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में यह पहले आइपीएस अधिकारी रहे, जिनकी गिरफ्तारी हुई और सरकार ने बर्खास्त करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को चिठ्ठी लिखी।

राजद्रोह से लेकर गिरफ्तारी तक का सफर

आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के एडीजी पद से हटाए जाने के बाद ईओडब्ल्यू ने ही जीपी सिंह पर शिकंजा कसा था। एक जुलाई 2021 को पहली बार छापा पड़ा। जांच के दौरान उनके खिलाफ बड़ी मात्रा में सबूत मिले। 8 जुलाई 2021 को दोबारा जांच के दौरान घर से मिले सबूतों के आधार पर जीपी सिंह पर राजद्रोह का प्रकरण दर्ज किया गया। 9 जुलाई 2021 को जीपी सिंह ने राज्य सरकार की कार्रवाई के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका दायर की और सीबीआइ से जांच की मांग रखी। इसके बाद जीपी सिंह फरार हो गए। 11 जनवरी 2022 को उन्हें गुड़गांव से गिरफ्तार किया गया और मई 2022 में उन्हें जमानत मिल गई थी।

डायरी में कई राजनेताओं और अफसरों के नाम

जीपी सिंह के आवास पर मिले एक डायरी में लिखे गए सनसनीखेज वाक्यों से हड़कंप मचा था। इसके आधार पर ही राजद्रोह का प्रकरण दर्ज किया गया था। इस डायरी में कई बड़े राजनेताओं और आला अधिकारियों का भी जिक्र किया गया था। अंग्रेजी में लिखी गई इस डायरी में सरकार के खिलाफ कई प्रकार की बातें लिखी गई थी।

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