सागर के बरकोटी में स्थित है कर्क रेखा पर प्रकट अनोखा मतंगेश्वर शिवलिंग, बुंदेलखंड में है विशेष मान्यता
सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले के अंतर्गत आने वाले देवरी क्षेत्र के बरकोटी गांव में भगवान शिव का एक बेहद प्राचीन और चमत्कारी मंदिर स्थित है, जिसकी महिमा पूरे बुंदेलखंड अंचल में अत्यंत प्रसिद्ध है। इस पावन स्थल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ से भारत की कर्क रेखा (Tropic of Cancer) गुजरती है, और इसी कर्क रेखा के मध्य काले पत्थर के रूप में भगवान शिव स्वयंभू प्रकट हुए थे। इस भव्य और ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में कराया गया था, जो अपनी विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं के कारण दूर-दूर तक विख्यात है।
संत मतंग के नाम पर हुई मतंगेश्वर और दस विद्याओं वाली मां पार्वती की स्थापना, मंदिर परिसर में विराजमान हैं शिव परिवार के अन्य सदस्य
इस ऐतिहासिक मंदिर के निर्माण की प्रेरणा देने वाले महान परमहंस संत का नाम ‘मतंग’ था, इसीलिए इस मंदिर के मुख्य शिवलिंग को ‘मतंगेश्वर’ और उनके ठीक बगल में विराजित दस विद्याओं की प्रतीक मां पार्वती को ‘मतंगी माता’ के रूप में पूजा जाता है। इस पवित्र मंदिर परिसर में भगवान गणेश अपने हेरंब रूप में, कार्तिकेय जी तथा नंदी महाराज के साथ-साथ दक्षिणमुखी हनुमान जी भी पूरी श्रद्धा के साथ स्थापित हैं।
पुजारी वृंदावन तिवारी ने बताई मंदिर की स्थापना की कथा, 18वीं शताब्दी में संत मतंग और मिश्रा परिवार के सहयोग से हुआ था निर्माण
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित वृंदावन तिवारी बताते हैं कि यह एक स्वयंभू प्रकट शिवलिंग का स्थान है, जिसका निर्माण 18वीं शताब्दी में परमहंस संत मतंग के मार्गदर्शन में हुआ था। इस मंदिर के निर्माण कार्य में एक निस्संतान दंपत्ति ‘मिश्रा परिवार’ ने अपना विशेष योगदान दिया था। संत मतंग के नाम पर ही इन स्वयंभू महादेव को मतंगेश्वर के रूप में पूजा जाने लगा। यह मंदिर मुख्य रूप से मकर संक्रांति के पर्व का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ इस पावन अवसर पर एक सप्ताह तक विशाल मेले का आयोजन होता है, जबकि बसंत पंचमी और महाशिवरात्रि पर भी यहाँ एक-एक दिन का मेला भरता है। यह मंदिर मनोकामना सिद्ध पीठ माना जाता है, जहाँ विशेष तौर पर संतान प्राप्ति की मन्नत मांगने के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं।
कर्क रेखा के 23.5° अक्षांश पर स्थित है यह पवित्र मंदिर, मन, वचन और कर्म से पूजा करने पर पूरी होती है हर मनोकामना
पंडित वृंदावन तिवारी जानकारी देते हैं कि यह मंदिर भौगोलिक रूप से कर्क रेखा पर 23.5° की स्थिति पर स्थित है, जो इसे अत्यंत खास बनाता है। मंदिर के गर्भगृह में मतंगेश्वर महादेव और मतंगी माता के स्वरूप में संपूर्ण शिव परिवार वास करता है। कर्क रेखा के पावन बिंदु पर स्वयंभू शिव के प्रकट होने के कारण यह मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन, वचन और कर्म से यहाँ भगवान की आराधना करता है, उसे महादेव का असीम आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
तिल-तिल बढ़ रहे शिवलिंग की वृद्धि रोकने के लिए ठोकी गई थी कील, आज भी मौजूद है उसका निशान
मतंगेश्वर महादेव के इस स्वयंभू शिवलिंग के बारे में एक बेहद रोचक और रहस्यमयी बात यह कही जाती है कि यह शिवलिंग काले पत्थर का है और विज्ञान का नियम है कि यदि काले पत्थर में कील ठोक दी जाए तो उसकी वृद्धि या विस्तार रुक जाता है। प्राचीन काल में ऐसा माना जाता था कि यह शिवलिंग आकार में लगातार बढ़ रहा था, जिसकी वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए इसमें कील ठोकी गई थी। आज भी उस कील का निशान शिवलिंग के ऊपरी हिस्से पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, और अब इसकी प्राकृतिक वृद्धि स्थिर हो चुकी है।
उज्जैन के महाकाल मंदिर जैसा ही मिलता है फल, सागर के महंत केशव गिरी ने दी विशेष अनुष्ठान की जानकारी
सागर स्थित दद्दा जी मंदिर के महंत पंडित केशव गिरी वर्तमान में बरकोटी के इस मंदिर में एक बड़े अनुष्ठान की तैयारियों में जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि जिस प्रकार मध्य प्रदेश के उज्जैन से कर्क रेखा गुजरती है और वहाँ विश्वप्रसिद्ध बाबा महाकाल विराजमान हैं, ठीक उसी प्रकार बरकोटी से भी कर्क रेखा गुजरती है और यहाँ स्वयंभू मतंगेश्वर महादेव की पूजा होती है। इस पवित्र स्थल पर दर्शन और पूजन करने से ठीक वैसा ही पुण्य फल प्राप्त होता है जैसा उज्जैन महाकाल के दर्शन से मिलता है। आने वाले समय में यहाँ भक्तों के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाने की योजना है।
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