Jabalpur High Court News: बिस्तर पर लेटे-लेटे और सिर्फ अंडरवियर में वीडियो कॉलिंग पर पेश हुआ अफसर, हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में एक सुनवाई के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है। अदालत में सुनवाई के सिलसिले में टाउन एवं कंट्री प्लानिंग विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को वर्चुअली (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए) हाजिर होना था, लेकिन उन्होंने अपनी हदें पार करते हुए जो आचरण दिखाया, उसने सभी को हैरान कर दिया। जैसे ही अदालत में मामले की कार्यवाही शुरू हुई, यह अफसर बिस्तर पर लेटे-लेटे ही वीडियो कॉल से जुड़ गए। उस वक्त उनके शरीर पर केवल अंडरवियर था और वे आनन-फानन में शर्ट पहनने की जद्दोजहद कर रहे थे। इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना और अमर्यादित बर्ताव को देखकर अदालत ने बेहद कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
संयुक्त संचालक अमित कुमार गजभिए के खिलाफ नोटिस जारी, आपराधिक अवमानना का चल सकता है मुकदमा
राजधानी भोपाल में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के संयुक्त संचालक के पद पर पदस्थ अधिकारी अमित कुमार गजभिए के इस निकृष्ट और गरिमा के खिलाफ आचरण पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें सख्त नोटिस जारी किया है। अदालत ने उनसे जवाब तलब किया है कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) का मुकदमा दर्ज किया जाए। इसके साथ ही, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को भी कड़े निर्देश देते हुए इस लापरवाह अधिकारी के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और आगामी 4 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा है। यह पूरी घटना बीते 27 अक्टूबर 2026 की है।
न्यायमूर्ति दीपक खोट की अदालत में चल रही थी सुनवाई, आचरण को माना गया गंभीर कदाचार
यह पूरा मामला हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक खोट की अदालत में विचाराधीन था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, संयुक्त संचालक अमित कुमार गजभिए को सुबह के सत्र में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होना था। इस गंभीर न्यायिक कार्यवाही के दौरान उनका बिस्तर पर लेटे होना और केवल अंडरवियर पहने रहना साफ तौर पर पद की गरिमा और न्यायिक मर्यादाओं के विरुद्ध था। अदालत ने उनके इस आचरण को बेहद आपत्तिजनक मानते हुए इसे गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखा है।
क्या है पूरा जमीन संशोधन और अवमानना का यह पूरा मामला?
यह पूरा कानूनी विवाद मेसर्स GSB कंस्ट्रक्शन से जुड़ा हुआ है, जो जमीन के उपयोग (लैंड यूज) में संशोधन और अदालत द्वारा पहले दिए गए निर्देशों का पालन न किए जाने से संबंधित अवमानना याचिका का है। हाईकोर्ट ने बीते 9 अक्टूबर 2026 को इस अधिकारी को विधिवत अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। आदेश का समय पर पालन सुनिश्चित न होने की स्थिति में अधिकारी को अदालत के समक्ष उपस्थित रहने को कहा गया था, जिसके चलते उन्हें इस वर्चुअल माध्यम का सहारा लेना पड़ा था। कोर्ट के सख्त और कड़े तेवरों को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से पेश हुए उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार इस अधिकारी के खिलाफ सख्त कदम उठाएगी।
याचिकाकर्ता के आरोप और आगामी सुनवाई की तिथि
अदालत में याचिकाकर्ता कंपनी के पक्ष से यह दलील दी गई कि मास्टर प्लान के तहत संबंधित भूमि को पूरी तरह से आवासीय (रेसिडेंशियल) उपयोग के लिए आरक्षित किया गया था, परंतु रिकॉर्ड में हेरफेर करके उसे गलत तरीके से औद्योगिक भूमि दर्ज कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत के पटल पर 3 अक्टूबर 2025 का वह पत्र भी रखा गया, जिसमें जबलपुर के संयुक्त संचालक ने स्वयं रिकॉर्ड में सुधार किए जाने की सिफारिश करते हुए भोपाल स्थित मुख्य विभागीय कार्यालय को पत्र भेजा था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अब आगामी सुनवाई के लिए 30 नवंबर 2026 की तारीख मुकर्रर की है।
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