Indore Water Crisis 2026: इंदौर में गहराया जल संकट, जिला प्रशासन ने शहर और गांवों में नई बोरिंग पर लगाई रोक; नियम तोड़ने पर होगी जेल
इंदौर: मध्य प्रदेश के व्यावसायिक केंद्र कहे जाने वाले इंदौर जिले में पानी का एक भीषण और विकराल संकट पैदा होने की आशंका मंडराने लगी है। यहां लगातार नीचे जा रहे भूगर्भ जलस्तर को देखते हुए स्थानीय जिला प्रशासन ने बेहद कड़ा और एहतियाती कदम उठाया है। वर्तमान हालातों की गंभीरता को भांपते हुए प्रशासन ने इंदौर जिले के शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक हर तरह की नई बोरिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस नए प्रतिबंध के दायरे में केवल निजी ही नहीं, बल्कि किसी भी प्रकार के शासकीय (सरकारी) नलकूपों की खुदाई पर भी पूरी पाबंदी रहेगी। यदि कोई भी व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उस पर दो हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना और दो साल तक की सजा का कड़ा प्रावधान किया गया है। इस आदेश का सख्ती से पालन कराने के लिए जिला कलेक्टर ने पुलिस विभाग, नगर निगम और राजस्व अमले को व्यापक और पुख्ता अधिकार सौंप दिए हैं।
आने वाले समय में गहरा सकता है पेयजल संकट, डराने वाली स्थिति को देख प्रशासन ने उठाया कड़ा कदम
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि जिले में भूगर्भ जल की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक और डराने वाली है। यदि समय रहते पानी के इस अंधाधुंध दोहन को नहीं रोका गया, तो निकट भविष्य में शहरवासियों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसी आसन्न स्थिति से निपटने और नागरिकों को पानी की किल्लत से बचाने के लिए प्रशासन ने पूरे जिले में बिना किसी अपवाद के नई बोरिंग कराने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस सख्त व्यवस्था के तहत अब शहरी क्षेत्र हो या कोई ग्रामीण इलाका, किसी भी नागरिक या एजेंसी को नई बोरिंग कराने की अनुमति नहीं होगी।
इंदौर को घोषित किया गया जलाभाव ग्रस्त जिला, आदेश का उल्लंघन करने पर होगी जब्ती और जेल की कार्रवाई
बिगड़ते हालात को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए इंदौर को आधिकारिक तौर पर ‘जलाभाव ग्रस्त जिला’ घोषित कर दिया गया है। जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी शिवम वर्मा द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, आगामी अगले आदेश तक पूरे जिले की सीमा के भीतर कहीं भी नई बोरिंग का कार्य नहीं किया जा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति नियमों को ताक पर रखकर चोरी-छिपे बोरिंग कराने की कोशिश करता है, तो प्रशासन द्वारा बोरिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनों को तुरंत जब्त कर लिया जाएगा, साथ ही संबंधित दोषी पर 2 हजार रुपये का जुर्माना और दो साल के कारावास की सजा तय की गई है। इस नियम के क्रियान्वयन पर पैनी नजर रखने के लिए राजस्व, पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों को पूरी छूट दी गई है।
सरकारी योजनाओं को छूट, जरूरत पड़ने पर अधिग्रहित किए जा सकेंगे निजी जलस्रोत और नलकूप
जिला दंडाधिकारी द्वारा स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिबंध विशेष रूप से उन निजी बोरिंगों पर लागू होता है, लेकिन यह रोक सरकार द्वारा चलाई जाने वाली उन शासकीय योजनाओं पर लागू नहीं होगी जो जनहित में अत्यंत आवश्यक हैं। इसके अलावा, आपातकालीन परिस्थितियों में सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के वास्ते प्रशासन जरूरत पड़ने पर निजी जलकूपों और अन्य निजी जलस्रोतों का अपने अधिकार में अधिग्रहण (एक्वायर) भी कर सकेगा। प्रशासन का मानना है कि जिले में इस बार औसत से कम बारिश होने और भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण पानी का स्तर काफी तेजी से नीचे खिसका है, जिसे संरक्षित करने के लिए यह कड़ा निर्णय लेना अनिवार्य हो गया था।
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