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MP High Court Indore Bench Update: कचरा गाड़ियों के गानों की आवाज कम करने के आदेश, साइलेंस जोन की सूची अखबारों में छापने के निर्देश

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इंदौर: मध्य प्रदेश के प्रमुख शहर इंदौर में लगातार बेकाबू हो रहे ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) की गंभीर समस्या को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बेहद सख्त रवैया अपनाया है। माननीय न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने 26 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई करते हुए पुलिस प्रशासन, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी और कड़ी लगाम लगाने के लिए कई अहम एवं स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

शहर में शांति और सुकून बहाल करने के लिए विभागों को मिलकर करने होंगे ठोस प्रयास

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि शहर के भीतर आम नागरिकों के लिए शांति, चैन और सुकून का माहौल कायम रखने के वास्ते सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ मिलकर काम करना होगा। हाईकोर्ट ने पूरी तरह स्पष्ट किया है कि केवल कुछ समाचार पत्रों में छोटी-मोटी खबरों के अंश दिखाकर साइलेंट जोन घोषित करने की खानापूर्ति या औपचारिकता पूरी नहीं की जा सकती। राज्य सरकार को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि शहर के सभी साइलेंस जोन की आधिकारिक सूची व्यापक प्रसार वाले प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में विधिवत रूप से प्रकाशित कराई जाए।

ध्वनि मापने वाले उपकरणों की उपलब्धता और नागरिकों से मांगे जाएं सुझाव

इसके साथ ही, शहर के अन्य महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों को भी साइलेंट जोन के दायरे में शामिल करने के लिए आम नागरिकों से बहुमूल्य सुझाव आमंत्रित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत को यह बताया गया कि शहर में ध्वनि प्रदूषण मापने के लिए उपकरण पहले से उपलब्ध हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर उनका खुलकर इस्तेमाल करके नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के खिलाफ अपेक्षित और कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

हर पुलिस थाने को मिलें ध्वनि मापने वाले यंत्र, त्योहारों के शोर पर जताई चिंता

इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि इंदौर जिले के प्रत्येक पुलिस थाने के पुलिसकर्मियों को ध्वनि मापने वाले उपकरण अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं। इसके अलावा, संबंधित थानों के संपर्क नंबर प्रमुख समाचार पत्रों और इंदौर पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रसारित किए जाएं ताकि नागरिक किसी भी असुविधा की स्थिति में तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। अदालत ने हाल ही में संपन्न हुए नवरात्रि और दशहरा पर्व के दौरान शहर में हुए अत्यधिक शोर-शराबे और लाउडस्पीकर के बेहिसाब इस्तेमाल पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है।

थानों से मांगा गया कार्रवाई का रिकॉर्ड, हर वार्ड में नियुक्त होंगे दो स्वयंसेवक

अदालत ने पुलिस विभाग को यह निर्देश दिया है कि विभिन्न थानों के भीतर ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी जितनी भी शिकायतें प्राप्त हुई हैं तथा पुलिस द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर जो कार्रवाई की गई है, उसका पूरा रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश किया जाए। इसके साथ ही, कोर्ट ने एक अनोखा और प्रभावी निर्देश देते हुए कहा है कि प्रत्येक थाने के थाना प्रभारी (SHO) द्वारा शहर के हर वार्ड से दो-दो जिम्मेदार स्वयंसेवकों की नियुक्ति की जाएगी। ये स्वयंसेवक अपने क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले असामाजिक तत्वों या वाहनों की जानकारी तुरंत पुलिस को देंगे और आवश्यकता पड़ने पर मोबाइल से उसका वीडियो भी बनाएंगे।

कचरा गाड़ियों के गानों की आवाज कम करने के आदेश, तीन हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश के तहत अदालत ने इंदौर नगर निगम (IMC) की कचरा संग्रहण गाड़ियों पर बजने वाले स्वच्छता से जुड़े गानों की तेज आवाज को काफी कम करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि इन वाहनों से आने वाली ध्वनि को तय डेसीबल सीमा के दायरे में लाया जाए अथवा कम से कम मौजूदा आवाज के स्तर को 25 प्रतिशत तक जरूर घटाया जाए। सभी संबंधित विभागों को इन सभी निर्देशों का पालन करते हुए आगामी तीन सप्ताह के भीतर अपनी अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी। इस पूरे प्रकरण की अगली आगामी सुनवाई 23 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह के दौरान निर्धारित की गई है।

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