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Chhindwara News: राष्ट्रीय सेविका समिति के 90 वर्ष पूरे, ‘प्रभाव से परिवर्तन’ अभियान के तहत महिलाओं में जगाई जा रही राष्ट्रसेवा की अलख

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छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में राष्ट्रीय सेविका समिति के स्थापना के सफल 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘प्रभाव से परिवर्तन’ की दिशा में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अनूठे अभियान के तहत घर-परिवार की चारदीवारी और रसोई तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब आगे आकर दूसरी महिलाओं को भी समाज सेवा के साथ-साथ राष्ट्रसेवा के लिए जागरूक करने का बीड़ा उठा चुकी हैं। इस ऐतिहासिक महिला संगठन की शुरुआत आज से ठीक 90 साल पहले महाराष्ट्र के वर्धा शहर से हुई थी, जो आज अपनी कार्यशैली के दम पर देश की सीमाओं को लांघकर विदेशों में भी भारतीय संस्कृति और राष्ट्र के हित में निरंतर कार्य कर रहा है।

सालभर में आयोजित होते हैं पांच प्रमुख विशेष इवेंट, विजयादशमी का है विशेष महत्व

राष्ट्र सेविका समिति की छिंदवाड़ा जिला इकाई की अध्यक्ष निर्मला ताई ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्र सेविका समिति की ओर से पूरे वर्षभर के दौरान पांच मुख्य और विशेष आयोजनों की रूपरेखा तय होती है, जिनमें विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व सबसे अधिक खास माना जाता है क्योंकि इसी पवित्र दिन वर्ष 1936 में इस संगठन की स्थापना की गई थी। इसी कड़ी में छिंदवाड़ा में भी भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। पूरे देश में विजयदशमी के पावन पर्व के बाद कुछ दिनों तक विशेष अभियानों और कार्यक्रमों का सिलसिला चलता है। इसलिए यह दशहरा उत्सव केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह संगठन की स्थापना, उसके मूल उद्देश्यों और कार्यकर्ताओं के अटूट संकल्प को बार-बार दोहराने का एक बड़ा अवसर भी साबित होता है।

देशभर के 852 जिलों में फैली शाखाएं, 70 हजार से अधिक महिलाएं दे रही हैं योगदान

पूरे देश में राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में भारतीय प्राचीन संस्कृति, राष्ट्रभक्ति, नारी शक्ति की सुदृढ़ता और सामाजिक दायित्वों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष जोर दिया जाता है। इस तरह के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को संगठित रखना, उनके अंदर नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व का विकास करना तथा समाजहित के कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। संगठन के भौगोलिक विस्तार को लेकर जुलाई 2026 में संपन्न हुई अखिल भारतीय कार्यकारिणी एवं प्रतिनिधि मंडल की बैठक के बाद जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में समिति का कार्य देश के कुल 852 जिलों में पूरी सक्रियता से संचालित हो रहा है। इसके अंतर्गत पूरे देश में 4,886 शाखाएं, 1,173 मिलन केंद्र और 1,332 सेवा प्रकल्प सुचारू रूप से चल रहे हैं।

वर्ष 1936 में विजयादशमी के दिन लक्ष्मीबाई केलकर ने की थी राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना

इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना वर्ष 1936 में विजयादशमी के शुभ दिन वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर द्वारा की गई थी, जिन्हें संगठन के भीतर प्रेम और आदर के साथ ‘मौसीजी’ के रूप में पुकारा जाता है। इस प्रमुख महिला संगठन का केंद्रीय कार्यालय महाराष्ट्र के नागपुर शहर में स्थित है। इस संगठन की स्थापना के पीछे मूल विचार यह था कि देश की महिलाओं की शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक क्षमताओं का चहुंमुखी विकास किया जाए ताकि उन्हें राष्ट्र निर्माण के महान कार्य में सक्रिय रूप से तैयार किया जा सके। उस दौर में जब देश पर अंग्रेजों का क्रूर कब्जा था, तब भी महिलाएं उनके दमन से डरी नहीं, बल्कि धीरे-धीरे महिलाओं को जागरूक करने का यह कारवां आगे बढ़ता गया और आज यह संगठन पूरे देश में एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है।

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