बेंगलुरु: कांग्रेस शासित कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बाइक टैक्सी संचालन से जुड़े अहम कानूनी मामले में अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने के लिए भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को विशेष रूप से नियुक्त किया है। यह पूरा मामला कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस पुराने फैसले के खिलाफ की गई अपील से संबंधित है, जिसमें राज्य के भीतर बाइक टैक्सियों के संचालन पर लगाई गई पाबंदी को हटा दिया गया था। इस हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई में राज्य सरकार अब देश के शीर्ष विधि अधिकारी के जरिए अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी में है।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के हटने के बाद लिया गया नया निर्णय
इससे पहले इस कानूनी मामले में राज्य सरकार की तरफ से पैरवी करने के लिए देश के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश होने वाले थे। हालांकि, लोकप्रिय बाइक टैक्सी ऑपरेटर ‘रैपिडो’ द्वारा यह बात सामने लाए जाने के बाद कि उन्होंने पूर्व में इसी समान मामले में उन्हें कानूनी सलाह दी थी, कपिल सिब्बल ने नैतिकता के आधार पर इस हाई-प्रोफाइल केस से खुद को अलग कर लिया था, जिसके बाद सरकार को नए वकील की नियुक्ति करनी पड़ी।
अदालत की टिप्पणी और केंद्र सरकार के रुख पर रहेगी नजर
मामले की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत की बेंच ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता इस मामले में केवल राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की तरफ से भी पेश होकर अपना रुख स्पष्ट कर सकते हैं। अदालत का यह सुझाव इस लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार के पूर्ववर्ती सर्कुलर और विभिन्न दिशा-निर्देश काफी हद तक बाइक टैक्सी ऑपरेटरों के पक्ष में झुकते नजर आए हैं, जिससे मामले में कानूनी पेंच और अधिक दिलचस्प हो गया है।
नवंबर महीने में होगी मामले की अगली विस्तृत सुनवाई
बीते सोमवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ के समक्ष वर्चुअल माध्यम से पेश होकर इस मामले में कुछ अतिरिक्त और महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत में दाखिल करने के लिए समय की मांग की। अदालत ने उनके इस अनुरोध को सहर्ष स्वीकार कर लिया है। साथ ही, बेंच ने निर्देश दिया है कि इस याचिका पर अगली सुनवाई आगामी 16 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह के दौरान की जाएगी।
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