Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Parliament Question Hour Analysis: संसद के लाखों सवालों में आम जनता के मुद्दे कहां? जानिए गरीबी और ज... Maharashtra Voter List SIR 2026: वोटर लिस्ट से नाम हटाने से पहले BLA को देनी होगी सूची, चुनाव आयोग क... RSS Chief Mohan Bhagwat: अतिवाद से परेशान है दुनिया, भारत के पास है ज्ञान का खजाना; अखिल भारतीय विहा... Tamil Nadu Language Dispute: सथानकुलम में दिशा-निर्देश बोर्ड से मिटाए गए हिंदी शब्द, भारी विरोध के ब... Ozone Urbana Scam: बेंगलुरु में होम बायर्स से 927 करोड़ की ठगी, ओजोन ग्रुप के CMD एस. वासुदेवन गिरफ्... Manori Beach News: स्पीडबोट से विदेशी जहाज में चोरी करने घुसे थे बदमाश, गैस रिसाव से 4 की मौत; हेलीक... यूपी की 11 MLC सीटों पर भाजपा का चुनावी चक्रव्यूह: 23 अक्टूबर को मतदान, सामाजिक समीकरणों पर जोर Ramnagar Road Accident: नैनीताल घूमने निकले नेशनल बास्केटबॉल प्लेयर यतीश यादव की सड़क हादसे में मौत,... दिल्ली के 736 पार्कों का सुरक्षा ऑडिट पूरा: उपराज्यपाल के निर्देश पर DDA ने 3 श्रेणियों में बांटे पा... वृंदावन आश्रम पर गहराया विवाद: शिष्य की संदिग्ध मौत के बीच हाथरस का युवक 3 महीने से लापता

सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन में गिरावट का दावा: जानिए सोशल मीडिया की खबरों की असली सच्चाई

3

सितंबर महीने के यूपीआई (Unified Payments Interface) डेटा को लेकर बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया से लेकर कई प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक भ्रामक खबर तेजी से प्रसारित की जा रही है।

दावा किया जा रहा है कि अगस्त की तुलना में सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कुछ रिपोर्ट्स के हवाले से कहा गया कि अगस्त के रिकॉर्ड स्तर के बाद सितंबर में कुल लेनदेन गिरकर 24.07 बिलियन रह गए हैं। प्रथम दृष्टया कुल आंकड़े देखकर ऐसा ही प्रतीत होता है, लेकिन जब नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आधिकारिक डेटा का गहराई से विश्लेषण किया जाता है, तो असल हकीकत बिल्कुल उलट नजर आती है।

वास्तव में यूपीआई के इस्तेमाल में कोई गिरावट नहीं आई है। कुल डेटा में जो मामूली कमी दिख रही है, वह महज दोनों महीनों के दिनों की संख्या में अंतर का नतीजा है। अगस्त में 31 दिन होते हैं जबकि सितंबर में केवल 30 दिन होते हैं, और इसी एक दिन के अंतर ने कुल आंकड़ों के समीकरण को बदल दिया है।

🔢 महीने के दिनों का गणित: दैनिक औसत में दर्ज हुआ 802 मिलियन का नया रिकॉर्ड

एनपीसीआई के विस्तृत आंकड़ों और दैनिक औसत का विश्लेषण:

  • अगस्त का दैनिक आंकड़ा: अगस्त में कुल 24.51 बिलियन ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे। 31 दिनों के हिसाब से हर दिन औसतन 791 मिलियन लेनदेन हुए।

  • सितंबर में दैनिक उछाल: सितंबर में कुल 24.07 बिलियन लेनदेन 30 दिनों के भीतर हुए। इस हिसाब से दैनिक औसत 802 मिलियन निकलकर आता है, जो अगस्त से कहीं ज्यादा है।

  • लेनदेन मूल्य में वृद्धि: अगस्त में रोजाना औसतन 96,205 करोड़ रुपये के लेनदेन हुए थे, जो सितंबर में बढ़कर 97,913 करोड़ रुपये प्रतिदिन हो गए।

  • सालाना शानदार ग्रोथ: कुल वैल्यू (29.82 लाख करोड़ से 29.37 लाख करोड़) में दिख रही 1.5% की कमी केवल एक दिन कम होने के कारण है। सालाना आधार पर सितंबर में यूपीआई वॉल्यूम में 23 प्रतिशत और वैल्यू में 18 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज हुई है।

💳 मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर चर्चा: 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए नियम और व्यापारियों का रुख

प्रस्तावित एमडीआर नियमों और बाजार की प्रतिक्रिया का विवरण:

  • नए एमडीआर का ढांचा: 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नियमों के तहत 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर प्रस्तावित है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।

  • व्यक्तिगत लेनदेन पूरी तरह फ्री: आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) को किए जाने वाले सभी लेनदेन पूरी तरह से निशुल्क रहेंगे।

  • व्यापारियों की चिंताएं: आगामी त्योहारी सीजन में बड़े लेनदेनों पर पड़ने वाले असर को लेकर रिटेलर्स और व्यापारिक संगठनों में चिंता देखी गई थी।

  • ‘नो यूपीआई डे’ का फैसला वापस: ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) और एआईसीपीडीएफ (AICPDF) द्वारा 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का आह्वान किया गया था, परंतु वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ सार्थक बैठक के बाद विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया गया।

🌐 डिजिटल पेमेंट्स में भारत का वैश्विक परचम: 11 देशों में पहुंचा यूपीआई नेटवर्क

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूपीआई का विस्तार और बढ़ता प्रभाव:

  • रिकॉर्ड तोड़ स्वीकार्यता: जुलाई में यूपीआई ट्रांजैक्शन वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी और कुल 23.66 बिलियन लेनदेन दर्ज किए गए थे।

  • 11 देशों में परिचालन: भारत की सीमा से बाहर निकलकर यूपीआई अब यूएई, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित करीब 11 देशों में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

  • ग्लोबल फिनटेक लीडर: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और एनपीसीआई की इस तकनीकी क्रांति ने न केवल सीमा पार रेमिटेंस को आसान बनाया है, बल्कि भारत को दुनिया के सबसे अग्रणी फिनटेक देशों की कतार में मजबूती से खड़ा कर दिया है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.