Shravasti Flood: श्रावस्ती में खतरे के निशान से 70 सेमी ऊपर राप्ती नदी, कई गांव जलमग्न; छतों पर रहने को मजबूर लोग
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में राप्ती नदी के उफान ने ग्रामीण जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण नदी खतरे के निशान से करीब 70 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जमुनहा तहसील क्षेत्र के बीरपुर, ऐंठा सहित कई तराई गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से प्रवेश कर चुका है।
हालात इस कदर गंभीर हो चुके हैं कि ग्रामीणों के रिहायशी मकानों के साथ-साथ सरकारी प्राथमिक विद्यालय भी पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। कई प्रभावित परिवार अपनी जान और बचा हुआ सामान सुरक्षित करने के लिए घरों की छतों और ऊंचे बांधों या सड़कों के किनारे तिरपाल तानकर खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं।
बाढ़ प्रभावित बस्तियों में स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। दर्जनों घरों के भीतर कमर तक पानी भर चुका है, जिससे घरों में रखा सूखा राशन, अनाज, बिस्तर, कपड़े और रोजमर्रा का घरेलू सामान पानी में डूबकर नष्ट हो गया है। पानी भर जाने के कारण घरों के चूल्हे तक ठंडे पड़ गए हैं, जिससे प्रभावित परिवारों के सामने दो वक्त के भोजन और स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या पैदा हो गई है।
🏠 घरों की छतों पर रात बिताने को मजबूर ग्रामीण: राहत सामग्री और नावों की दरकार
जमीनी हालात और ग्रामीणों की समस्याएं:
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अचानक बढ़ा जलस्तर: ग्रामीणों का कहना है कि राप्ती नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला और आनन-फानन में छतों अथवा सुरक्षित टीलों पर शरण लेनी पड़ी।
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चूल्हे डूबे, भुखमरी की नौबत: एक पीड़ित ग्रामीण ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि पूरा घर जलमग्न है, चूल्हा डूब चुका है और छोटे बच्चों के लिए खाना पकाने की कोई व्यवस्था नहीं बची है।
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राहत और नावों की मांग: स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव वाले गांवों में तत्काल सरकारी नावें लगाई जाएं, ताकि बीमारों व बुजुर्गों को सुरक्षित निकाला जा सके और सूखे राशन के पैकेट पहुंचाए जा सकें।
🚨 प्रशासन हुआ अलर्ट: प्रभावित इलाकों पर पैनी नजर, राहत कार्य जारी
प्रशासनिक अमले की सक्रियता और प्रतिक्रिया:
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अधिकारियों का निरीक्षण: एसडीएम रवि प्रताप सिंह के अनुसार, प्रशासनिक टीमें लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गश्त कर रही हैं और जमीनी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
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सहायता का आश्वासन: प्रशासन का दावा है कि प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक रसद, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए राहत एवं बचाव दल पूरी सक्रियता से जुटे हैं।
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जलस्तर पर निगरानी: अधिकारियों का कहना है कि कुछ ऊपरी क्षेत्रों में पानी का स्तर धीरे-धीरे घटना शुरू हुआ है, फिर भी स्थिति से निपटने के लिए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
🍞 भोजन और पीने के पानी का संकट: रास्ते और स्कूल बंद, दिनचर्या पूरी तरह ठप
बाढ़ से उपजे गंभीर प्रभाव:
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आवागमन पूरी तरह ठप: मुख्य संपर्क मार्ग और संपर्क गलियां कई फीट पानी में डूबने के कारण गांवों का तहसील मुख्यालय से सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया है।
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बच्चों की पढ़ाई बाधित: प्राथमिक विद्यालयों के परिसर और कमरों में बाढ़ का पानी घुस जाने से शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह बंद हो गई हैं।
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बुनियादी जरूरतों की मांग: विस्थापित परिवारों की मुख्य मांग है कि प्रशासन द्वारा तत्काल पीने का शुद्ध पानी, क्लोरीन की गोलियां, ओआरएस, जरूरी दवाइयां और तैयार भोजन के पैकेट नियमित रूप से उपलब्ध कराए जाएं।
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