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मकर संक्रांति पर रांची में सजा पतंग का बाजार, धोनी से लेकर सीएम हेमंत सोरेन की पहली पसंद है ये खास दुकान

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रांची: मकर संक्रांति का पर्व आते ही आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सज उठता है. इस पर्व पर पतंगबाजी का खास महत्व है और रांची भी इससे अछूता नहीं है. राजधानी रांची के कर्बला चौक स्थित तालिब पतंग हाउस इस समय पतंग प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां आम लोगों से लेकर खास हस्तियों तक की पसंद की पतंगें उपलब्ध हैं.

इस बार मकर संक्रांति को और खास बना दिया है इस तथ्य ने कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भी अपनी पतंग यहीं से मंगवाई है. सिर्फ धोनी ही नहीं, बल्कि रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, मुख्यमंत्री आवास, डीजीपी आवास और सीनियर एसएसपी आवास तक के लिए भी यहीं से पतंगें भेजी गई हैं. दुकानदार मोहम्मद तालिब बताते हैं कि धोनी के लिए हर साल खास पतंग और स्पेशल मांजा तैयार किया जाता है. इस बार भी धोनी मकर संक्रांति से एक दिन पहले ही अपनी पसंद की पतंग लेकर जा चुके हैं. उन्होंने बताया कि धोनी हर वर्ष इसी दुकान से पतंग मंगवाते हैं, जो उनके लिए गर्व की बात है.

56 साल से पतंगों की पहचान

तालिब पतंग हाउस की पहचान नई नहीं है. मोहम्मद तालिब बताते हैं कि पिछले 56 वर्षों से यहां पतंगों की दुकान लग रही है. देश के किसी भी कोने चाहे जयपुर हो, अहमदाबाद, दिल्ली या फिर बड़े एग्जिबिशन और पतंग प्रतियोगिताएं हर जगह यहां की पतंगें पहुंचती हैं. मकर संक्रांति को लेकर यहां महीनों पहले से तैयारी शुरू हो जाती है. तालिब बताते हैं कि वे करीब 3 महीने पहले से पतंग बनाना शुरू कर देते हैं.

लाखों पतंगों का उत्पादन

हर साल यहां करीब 5 से 6 लाख पतंगों का निर्माण किया जाता है. बच्चों के लिए डोरेमोन, कार्टून कैरेक्टर वाली रंग-बिरंगी पतंगें उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत मात्र 2 से 5 से शुरू हो जाती है. वहीं बड़ों के लिए कागज की पतंग, प्लास्टिक की बड़ी पतंग और खास डिजाइन वाली पतंगें मौजूद हैं, जिनकी कीमत 500 रुपए तक है. इसके अलावा विदेश से मंगाई गई खास पतंगें भी हैं, जिनकी कीमत और अधिक होती है.

कोरिया की कपड़े वाली पतंग बनी आकर्षण

इस बार तालिब पतंग हाउस में कोरिया की कपड़े वाली पतंग लोगों को खासा आकर्षित कर रही है. इसकी कीमत करीब 150 रुपए है. जानकार बताते हैं कि कोरिया में पतंग उड़ाने की परंपरा बेहद खास है. वहां ‘येन्नालिगी’ नाम के खेल में सूर्यास्त के समय पतंग की डोरी काटकर दुर्भाग्य को दूर करने और सौभाग्य की कामना की जाती है. इसी सांस्कृतिक महत्व के कारण कोरियाई पतंगों की मांग दिल्ली समेत देश के बड़े शहरों में बढ़ी है और दिल्ली के इंपोर्टर यहां से भी इन पतंगों की डिमांड करते हैं.

झारखंड से बाहर भी जबरदस्त मांग

तालिब पतंग हाउस की पतंगें सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं हैं. रांची से झारखंड के तमाम जिलों में तो सप्लाई होती ही है, साथ ही बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक यहां की पतंगों की मांग रहती है. तालिब बताते हैं कि मकर संक्रांति के समय ऑर्डर इतने बढ़ जाते हैं कि वे अकेले सभी मांगें पूरी नहीं कर पाते.

हर वर्ग के लिए खास इंतजाम

दुकान की खास बात यह है कि यहां हर वर्ग का ख्याल रखा जाता है. स्कूली बच्चों के लिए सस्ती पतंगों से लेकर वीआईपी ग्राहकों के लिए स्पेशल डिजाइन और थीम आधारित पतंगें तैयार की जाती हैं. इस बार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी थीम वाली पतंगें भी तैयार की गई हैं, जिन्हें खास तौर पर लोगों ने पसंद किया है.मकर संक्रांति के मौके पर तालिब पतंग हाउस न सिर्फ एक दुकान, बल्कि रांची की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है. यहां से उड़ने वाली पतंगें सिर्फ आसमान में नहीं, बल्कि रांची की पहचान को भी ऊंचाइयों तक ले जा रही हैं.

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