Haryana News: पूर्वांचल समाज की आस्था का सम्मान, अंबाला कैंट में छठ घाट के लिए मंत्री अनिल विज ने खोला खजाना
चंडीगढ़/अंबाला: धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी गहरी निष्ठा के लिए पहचाने जाने वाले हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने अंबाला कैंट में निवासरत प्रवासी समाज की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए एक सराहनीय कदम उठाया है। उन्होंने छठ महापर्व के लिए स्थायी घाट के निर्माण हेतु 50 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराने की घोषणा की है। इसके साथ ही मंत्री अनिल विज ने भरोसा दिलाया है कि यदि निर्माण कार्य के दौरान अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होगी, तो उसके लिए भी पर्याप्त वित्तीय प्रबंध किए जाएंगे।
अंबाला कैंट क्षेत्र में बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) से जुड़े परिवारों की एक बड़ी आबादी निवास करती है। अब तक यहां स्थायी छठ घाट की सुविधा न होने के कारण श्रद्धालुओं को प्रत्येक वर्ष नहर या जलस्रोतों के किनारे टेंट लगाकर अस्थायी घाट तैयार करने पड़ते थे। अब पक्के और स्थायी घाट का निर्माण होने से श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए एक सुव्यवस्थित, स्वच्छ और सुरक्षित स्थल उपलब्ध हो सकेगा।
🏛️ धर्म और आस्था को सुविधाओं से जोड़ने की पहल: आवश्यकता पड़ने पर मिलेगा अतिरिक्त बजट
अनिल विज की इस दूरदर्शी पहल को समाज की धार्मिक भावनाओं के सम्मान और लोक-कल्याण से जोड़कर देखा जा रहा है। छठ पूजा केवल एक अनुष्ठान मात्र नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, कठोर तपस्या और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। ऐसे में पक्के घाट का निर्माण प्रवासी नागरिकों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने और पर्व के सुगम आयोजन में मील का पत्थर साबित होगा।
50 लाख रुपये की प्रारंभिक राशि के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर और अधिक बजट देने का आश्वासन यह दर्शाता है कि सरकार धार्मिक उत्सवों के लिए आधारभूत ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को सुदृढ़ करने के प्रति पूरी तरह गंभीर है।
🌅 छठ पूजा में घाट का धार्मिक महत्व: स्वच्छ और सुरक्षित जलस्रोत की अहमियत
छठ महापर्व की पूजा-पद्धति में जलस्रोत और घाट का अत्यधिक महत्व है:
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सूर्योपासना का विधान: छठ व्रती कमर तक पानी में खड़े होकर अस्ताचलगामी (डूबते) और उदीयमान (उगते) भगवान सूर्य को अर्घ्य समर्पित करते हैं।
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स्वच्छता और व्यवस्था: जलस्रोत के किनारे समतल, स्वच्छ और मजबूत घाट का होना सुरक्षा और धार्मिक विधि-विधान दोनों दृष्टियों से अनिवार्य माना जाता है।
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बुजुर्गों और महिलाओं को राहत: पक्का घाट बन जाने से प्रकाश, साफ-सफाई, चेंजिंग रूम और आवागमन की बेहतर सुविधाएं विकसित होंगी, जिससे महिलाओं, बच्चों और वृद्ध श्रद्धालुओं को फिसलन व अव्यवस्था से पूरी सुरक्षा मिलेगी।
🌾 बिहार, झारखंड और पूर्वांचल की समृद्ध परंपरा: देश-विदेश में बिखरी छठ की छटा
छठ पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का मुख्य आधार है। रोजगार, व्यापार और अन्य कारणों से देश के विभिन्न राज्यों में बसे इन क्षेत्रों के लोग जहां भी रहते हैं, वहां पूरी निष्ठा के साथ इस लोकपर्व को मनाते हैं।
भोजपुरी, मैथिली और मगही भाषी समाज के विस्तार के साथ ही अब हरियाणा और पंजाब के शहरों में भी छठ पूजा का आयोजन भव्य रूप से होने लगा है। अंबाला कैंट में इस समुदाय की सक्रिय सहभागिता हर वर्ष देखने को मिलती है।
⛺ हर साल की अस्थायी व्यवस्था से मुक्ति: टेंट और कच्चे घाटों के झंझट होंगे खत्म
अंबाला कैंट में अब तक श्रद्धालुओं को हर साल मौसम और जलस्तर के अनुसार अस्थायी प्रबंध करने पड़ते थे, जिसमें काफी श्रम और समय व्यर्थ होता था:
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स्थायी समाधान: 50 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह पक्का घाट श्रद्धालुओं को हर साल नए सिरे से तैयारी करने के झंझट से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाएगा।
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व्यवस्थाओं का विस्तार: स्थायी परिसर होने से स्थानीय प्रशासन और पूजा कमेटियों के लिए सुरक्षा बैरिकेडिंग, पार्किंग और प्राथमिक चिकित्सा शिविर लगाना पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा।
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परियोजना का विस्तार संभव: मंत्री अनिल विज द्वारा अतिरिक्त धनराशि का आश्वासन मिलने से भविष्य में इस परिसर को एक सुंदर पार्क और सामुदायिक केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा सकेगा।
🤝 प्रवासी समाज में खुशी की लहर: वर्षों पुरानी मांग पूरी होने पर जताया आभार
अंबाला कैंट के प्रवासी पूर्वांचल समाज ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे आस्था का वास्तविक सम्मान बताया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्थायी घाट की मांग लंबे समय से की जा रही थी। अनिल विज की इस पहल से समाज में सकारात्मक संदेश गया है और अब श्रद्धालु आने वाले छठ महापर्व पर सुरक्षित व भक्तिमय वातावरण में भगवान भास्कर की उपासना कर सकेंगे।
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