देहरादून: उत्तराखंड में लगातार खराब होते मौसम और मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से जारी भारी बारिश के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए चारधाम यात्रा को दो दिनों के लिए अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। राज्य के कई जनपदों में मूसलाधार बारिश का ‘रेड’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी होने के बाद स्थानीय प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह कड़ा निर्णय लिया है।
प्रशासनिक आदेश के अनुसार, चारधाम यात्रा शनिवार दोपहर से लेकर रविवार तक पूरी तरह स्थगित रहेगी। मौसम सामान्य होने और मार्गों की स्थिति की समीक्षा किए जाने के बाद ही यात्रा को दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप ने संबंधित जिलों के सभी जिलाधिकारियों और आपदा प्रबंधन तंत्र को हाई अलर्ट पर रहने और अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
🔴 शनिवार 26 सितंबर: पांच जिलों में रेड और पांच में ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी के मुख्य बिंदु:
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रेड अलर्ट वाले जिले: मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के पांच संवेदनशील जनपदों—बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट घोषित किया है।
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ऑरेंज अलर्ट वाले जिले: देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली और अल्मोड़ा जनपदों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
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येलो अलर्ट क्षेत्र: हरिद्वार, उत्तरकाशी और टिहरी जिलों में मध्यम से भारी बारिश की आशंका को देखते हुए येलो अलर्ट प्रभावी रखा गया है।
🌧️ रविवार 27 सितंबर को भी बिगड़ा रहेगा मौसम: देहरादून-हरिद्वार समेत 4 जिलों में रेड अलर्ट
सप्ताहांत पर मौसम का पूर्वानुमान:
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27 सितंबर को रेड अलर्ट: रविवार को भी मौसम के तेवर तल्ख रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने राजधानी देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और हरिद्वार जनपदों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है।
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ऑरेंज अलर्ट वाले क्षेत्र: उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल और रुद्रप्रयाग में स्थिति को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट लागू रहेगा।
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येलो अलर्ट के तहत जिले: बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ जिलों के लिए येलो अलर्ट का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है।
🏔️ मौसम सामान्य होने पर ही बहाल होगी यात्रा: भूस्खलन के खतरे को देखते हुए एहतियात
प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा उपाय:
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भूस्खलन और मार्ग अवरुद्ध होने का खतरा: पर्वतीय मार्गों पर लगातार भारी बारिश के कारण भूस्खलन (Landslide), बोल्डर गिरने और नदियों का जलस्तर बढ़ने से सड़कें अवरुद्ध होने का गंभीर जोखिम रहता है। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए यात्रियों की आवाजाही को संवेदनशील स्थानों पर रोक दिया गया है।
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नियंत्रित आवाजाही और समीक्षा: जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सुरक्षित ठहराव स्थलों पर रुके श्रद्धालुओं के रहने, भोजन और प्राथमिक स्वास्थ्य की व्यवस्था सुनिश्चित करें। मौसम के पूरी तरह सामान्य होने के उपरांत प्रशासनिक टीम द्वारा सड़कों की फिटनेस और सुरक्षा जांच की जाएगी, जिसके बाद ही यात्रा को विधिवत बहाल किया जाएगा।
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