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Bilaspur High Court News: सूरजपुर के लेखाकार को हाईकोर्ट से बड़ी राहत; रिश्वत केस में 2017 की सजा निरस्त, हुए बरी

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक व्यवस्था दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कानूनन रिश्वत की मांग का पुख्ता प्रमाण ही किसी अपराध का मूल आधार होता है। केवल कथित रूप से रिश्वत की राशि बरामद हो जाने मात्र से किसी लोक सेवक (Public Servant) को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि अभियोजन पक्ष रिश्वत की मांग (Demand) और उसकी स्वीकृति (Acceptance) को विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित न कर दे।

न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने ‘मुरली प्रसाद चौधरी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य’ के मामले में यह अहम निर्णय सुनाते हुए विशेष न्यायालय, सूरजपुर द्वारा वर्ष 2017 में सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने अपीलकर्ता को भ्रष्टाचार के सभी आरोपों से सम्मानपूर्वक बरी कर दिया।

🏫 स्कूल की मान्यता के नाम पर रिश्वत मांगने का था आरोप: एसीबी ने बिछाया था जाल

मामले के अभियोजन के अनुसार, अपीलकर्ता मुरली प्रसाद चौधरी सूरजपुर स्थित जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में लेखाकार के पद पर पदस्थ थे।

एक निजी विद्यालय की मान्यता से संबंधित काम के सिलसिले में शिकायतकर्ता ने उनके खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि पहले ₹15,000 की मांग की गई, जिसे बाद में घटाकर ₹8,000 कर दिया गया। शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 30 जून 2014 को ट्रैप कार्रवाई की। अभियोजन का दावा था कि इस दौरान रासायनिक पदार्थ से चिन्हित ₹8,000 की राशि आरोपी की पैंट की जेब से बरामद की गई थी।

👤 अदालत में बदला शिकायतकर्ता का रुख: कहा— ‘आरोपी ने नहीं मांगी थी कोई रिश्वत’

अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने अभियोजन की कहानी का बिल्कुल समर्थन नहीं किया और अपने बयानों से पलट गया।

उसने अदालत में स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपी ने उससे कभी रिश्वत की मांग नहीं की थी और न ही उसने आरोपी को अपनी इच्छा से रिश्वत दी थी। वहीं, ट्रैप के दौरान साथ गए स्वतंत्र गवाह ने भी घटनाक्रम का समर्थन नहीं किया। गवाह ने बयान दिया कि शिकायतकर्ता ने जबरन रुपये आरोपी की जेब में रख दिए थे, जिसे आरोपी तुरंत वापस लेने के लिए कह रहा था। उच्च न्यायालय ने इन गवाहों के बयानों को मामले का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु माना।

🎙️ कॉल रिकॉर्डिंग पर उठे गंभीर सवाल: धारा 65-बी के सर्टिफिकेट के बिना खारिज हुआ सबूत

अभियोजन पक्ष ने रिश्वत की मांग को साबित करने के लिए बातचीत की इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग और उसके ट्रांसक्रिप्ट पर भरोसा जताया था।

हालांकि, जांच अधिकारी की जिरह के दौरान यह सामने आया कि इस इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 65-बी (Section 65-B) का अनिवार्य प्रमाण-पत्र प्रस्तुत ही नहीं किया गया था।

इसके अलावा, आरोपी की आवाज का कोई फॉरेंसिक सैंपल (Voice Sample) नहीं लिया गया था और रिकॉर्डिंग की कोई वैज्ञानिक जांच नहीं कराई गई थी। गवाहों ने भी दफ्तर के भीतर हुई बातचीत को खुद नहीं सुना था। इस कारण अदालत ने माना कि कथित रिकॉर्डिंग के आधार पर रिश्वत की मांग कानूनन सिद्ध नहीं होती है।

🏛️ सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का हवाला: ‘मांग का प्रमाण ही सबसे पहला आधार’

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा ‘नीरज दत्ता बनाम राज्य (एनसीटी दिल्ली), 2023’ मामले में तय किए गए विधिक सिद्धांतों का प्रमुखता से उल्लेख किया।

अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन को सबसे पहले रिश्वत की मांग और उसके स्वीकार किए जाने के मूल तथ्यों को प्रमाणित करना अनिवार्य है। इन प्राथमिक तथ्यों के स्थापित होने के बाद ही कानून में अपराध के अनुमान का प्रश्न उत्पन्न होता है।

🔓 निचली अदालत की सजा निरस्त: आरोपी सभी आरोपों से हुए बरी

उच्च न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी द्वारा रिश्वत की मांग को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।

अदालत ने कहा कि जब मांग का विश्वसनीय प्रमाण ही उपलब्ध न हो, तो केवल कथित नोटों की बरामदगी सजा सुनाने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। इसके साथ ही कोर्ट ने विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), सूरजपुर द्वारा 30 मार्च 2017 को पारित दोषसिद्धि और सजा के आदेश को रद्द कर दिया।

अपीलकर्ता को अधिनियम की धारा 7 तथा 13(1)(घ) सहपठित 13(2) के आरोपों से बरी कर दिया गया। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 481 के तहत उनके जमानत बांड अगले छह महीनों तक प्रभावी रहेंगे और यदि कोई जुर्माना राशि पूर्व में जमा की गई थी, तो उसे अपीलकर्ता को वापस करने के निर्देश दिए गए हैं।

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