Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Tamil Nadu Government Jobs: टीवीनके सरकार का बड़ा फैसला, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ऊपरी आयु सीमा मे... Rajasthan Education News: मदन दिलावर के फरमान से सरकारी टीचर्स की बढ़ी मुश्किलें, बिना बजट दीपावली प... UP PCS Transfer News: पीलीभीत में वोटर लिस्ट गड़बड़ी मामले के बाद दो SDM समेत 11 पीसीएस अधिकारियों क... Mumbai Model Honey Trap Case: मशहूर मॉडल पर कारोबारी को हनी ट्रैप में फंसाकर 1.39 करोड़ रुपये वसूलने... Lucknow Murder Case: RSS कार्यकर्ता समेत परिवार के 3 सदस्यों की हत्या पर गरमाई सियासत, DGP और ACS हो... Lucknow Terror Plot Busted: यूपी एटीएस ने पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर रची जा रही टारगेट किलिंग की ... Chamoli Helicopter Crash: बदरीनाथ से लौट रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर क्रैश, पायलट समेत 6 लो... Hisar Murder News: HAU लेबर कॉलोनी में 20 वर्षीय युवक की बेरहमी से हत्या, सिर पर ईंट-रॉड से वार कर उ... Haryana Crime News: कुरुक्षेत्र फायरिंग कांड में पुलिस के हाथ लगे अहम सुराग, मुख्य आरोपी रिमांड पर औ... Ballabgarh News: बल्लभगढ़ की गली में दो सांडों की खौफनाक लड़ाई का वीडियो वायरल, जान बचाने के लिए घरो...

Bemetara News: बेमेतरा के प्रसिद्ध स्नेक कैचर मनीष पाटिल की सर्पदंश से मौत, नवागढ़ में रेस्क्यू के दौरान हुआ हादसा

20

बेमेतरा (छत्तीसगढ़): जिले में सांपों से आम जनता की जान बचाने और विषैले सर्पों को सुरक्षित पकड़कर उनके प्राकृतिक आवास तक पहुंचाने वाले जाने-माने स्नेक कैचर मनीष पाटिल की सर्पदंश से असमय मृत्यु हो गई।

यह दर्दनाक हादसा नवागढ़ क्षेत्र में देर रात एक जहरीले सांप के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान घटित हुआ। वर्षों से बेखौफ अंदाज में वन्यजीवों और नागरिकों की सुरक्षा में समर्पित मनीष पाटिल के निधन की खबर सामने आते ही समूचे बेमेतरा जिले और नवागढ़ अंचल में शोक की लहर दौड़ गई है।

🚑 112 की टीम के साथ रेस्क्यू पर गए थे मनीष: नवागढ़ और बिलासपुर में डॉक्टरों की कोशिशें रहीं नाकाम

हादसे का घटनाक्रम और उपचार के प्रयास:

  • आपातकालीन कॉल: प्राप्त जानकारी के अनुसार, देर रात डायल 112 की पुलिस टीम को नवागढ़ क्षेत्र के एक रिहायशी इलाके में विषैले सांप के निकलने की सूचना मिली थी, जिसके बाद वे मनीष पाटिल को साथ लेकर मौके पर पहुंचे।

  • अचानक डसा: रेस्क्यू प्रक्रिया के दौरान अचानक सांप ने मनीष पर हमला करते हुए उन्हें डस लिया, जिससे विष का प्रभाव तेजी से उनके शरीर में फैलने लगा और उनकी हालत बिगड़ने लगी।

  • अस्पताल में तोड़ा दम: गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल स्थानीय नवागढ़ स्वास्थ्य केंद्र और बाद में बिलासपुर के उच्च अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि, चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद उनके जीवन को बचाया नहीं जा सका।

🌿 सांपों और लोगों की रक्षा बना था जीवन का जुनून: सैकड़ों रेस्क्यू कर बचाई थी जानें

मनीष पाटिल का सेवाभाव और समर्पण:

  • तुरंत पहुंचते थे मदद के लिए: मनीष पाटिल विगत कई वर्षों से निस्वार्थ भाव से सर्प रेस्क्यू का कार्य कर रहे थे। किसी के घर, खेत, खलिहान, दुकान अथवा घनी आबादी में जहरीला सांप निकलने की सूचना मिलते ही वे बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच जाते थे।

  • प्राकृतिक पर्यावास में छोड़ना: वे जहरीले से जहरीले करैत, कोबरा और अन्य प्रजातियों के सांपों को अत्यंत सतर्कता से रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगलों में छोड़ आते थे।

  • अटूट हौसला: कई बार अपनी जान जोखिम में डालकर उन्होंने नागरिकों को खतरे से उबारा, किंतु जिस कार्य को उन्होंने जीवन का उद्देश्य बनाया, उसी कार्य के दौरान हुए हादसे ने उनकी सांसें छीन लीं।

🏅 15 अगस्त 2025 को जिला प्रशासन ने किया था सम्मानित: आर्थिक तंगी में भी नहीं छोड़ा सेवा का मार्ग

प्रशासनिक सम्मान और सामाजिक पहचान:

  • साहस का सम्मान: मनीष पाटिल एक बेहद सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते थे, किंतु समाजसेवा और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी निष्ठा अद्वितीय थी।

  • प्रशासनिक प्रशस्ति: उनके अदम्य साहस, निस्वार्थ सेवा और सैकड़ों सफल स्नेक रेस्क्यू अभियानों को मान्यता देते हुए जिला प्रशासन द्वारा 15 अगस्त 2025 को उन्हें मंच पर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया था।

  • हर दिल अजीज व्यक्तित्व: स्थानीय निवासियों का कहना है कि मनीष सिर्फ एक स्नेक कैचर नहीं थे, बल्कि किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में बेझिझक आगे आने वाले एक सच्चे जनसेवक थे।

💔 परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

शोक संतप्त परिवार और श्रद्धांजलि:

  • परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल: मनीष की असमय मृत्यु से उनके आश्रित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और उनके सामने भविष्य का गहरा संकट खड़ा हो गया है।

  • पर्यावरण प्रेमियों में शोक: वन्यजीव प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर उनके साहस और त्याग को याद करते हुए उन्हें नम आंखों से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.