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6 साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या में सोमेश यादव को मृत्युदंड: दुर्ग विशेष पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला

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दुर्ग (छत्तीसगढ़): छह वर्ष और तीन माह की मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म और उसकी नृशंस हत्या के अत्यंत संवेदनशील मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय दिया है।

अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफटीएससी (विशेष न्यायालय पॉक्सो) दुर्ग ने अभियुक्त सोमेश यादव को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड (फांसी) की कठोर सजा सुनाई है। यह जघन्य वारदात मोहन नगर थाना क्षेत्र में घटित हुई थी। 6 अप्रैल 2025 को बालिका के अचानक लापता होने की रिपोर्ट परिजनों द्वारा थाने में दर्ज कराई गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत नाकेबंदी कर तलाश शुरू की। सघन तलाशी के दौरान पुलिस टीम ने बालिका को एक संदिग्ध वाहन से बरामद कर तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया।

🔬 डीएनए और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने दिलाई सजा: पुलिस ने जुटाए थे पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक सबूत

जांच प्रक्रिया और फॉरेंसिक साक्ष्य:

  • घटनास्थल की सुरक्षा: दुर्ग पुलिस ने वारदात की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल को सील कर डीएनए, जैविक, चिकित्सकीय, सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित किया।

  • मेमोरेंडम के आधार पर बरामदगी: मुख्य आरोपी सोमेश यादव की गिरफ्तारी के उपरांत उसके बयान (मेमोरेंडम) के आधार पर अपराध से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री और वस्तुएं जब्त की गईं।

  • वैज्ञानिक प्रमाण: राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) और डीएनए मिलान रिपोर्ट को अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष सशक्त रूप से प्रस्तुत किया, जिसने अदालत में अभियोजन की दलीलों को अभेद्य मजबूती दी।

📜 मृत्युदंड के साथ जुर्माना और 7 लाख का मुआवजा: हाईकोर्ट बिलासपुर में होगी पुष्टि

न्यायालयीन आदेश और धाराओं का विवरण:

  • फांसी और अर्थदंड: विशेष न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत दोषी को मृत्युदंड और प्रत्येक धारा में 5-5 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।

  • साक्ष्य छिपाने पर कारावास: साक्ष्य मिटाने के अपराध में धारा 238(क) के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 हजार रुपये के जुर्माने की अतिरिक्त सजा दी गई।

  • हाईकोर्ट से पुष्टि की प्रक्रिया: कानून के तहत मृत्युदंड की सजा की विधिक पुष्टि (Confirmation) के लिए अब यह प्रकरण छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर भेजा जाएगा।

  • 7 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति: न्यायालय ने पीड़ित परिवार को मानसिक और सामाजिक संबल प्रदान करने हेतु ‘आहत प्रतिकर योजना’ के अंतर्गत 7 लाख रुपये की आर्थिक क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने का भी आदेश दिया।

👮 ‘नाबालिगों के मामलों में त्वरित व संवेदनशील कार्रवाई’: एएसपी मणिशंकर चंद्रा का बयान

पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया:

  • संवेदनशीलता से जांच: दुर्ग के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) मणिशंकर चंद्रा ने कहा कि पुलिस ने आरोपी को पकड़कर त्वरित और वैज्ञानिक पद्धति से जांच पूरी की, जिसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने यह कठोर सजा सुनाई है।

  • बाल अपराधों पर जीरो टॉलरेंस: उन्होंने दोहराया कि नाबालिग बच्चों से जुड़े गंभीर अपराधों में दुर्ग पुलिस पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कठोर कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

💡 क्या है आहत प्रतिकर योजना? जानिए कैसे मिलती है पीड़ितों को सहायता

योजना का उद्देश्य और कार्यप्रणाली:

  • आर्थिक संबल का प्रावधान: आहत प्रतिकर योजना (Victim Compensation Scheme) राज्य सरकार द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना है।

  • पुनर्वास में मदद: इसके अंतर्गत किसी संगीन अपराध या गंभीर दुर्घटना के शिकार हुए पीड़ितों अथवा उनके आश्रित परिजनों को चिकित्सा, कानूनी सहायता और सामाजिक पुनर्वास के लिए निश्चित आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

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