रायपुर (छत्तीसगढ़): स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण की दिशा में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि अपने नाम की है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026’ में रायपुर नगर पालिक निगम ने देश के 10 लाख से अधिक आबादी वाले महानगरों की श्रेणी में कुल 189 अंक हासिल कर देश भर में छठा (6th) स्थान प्राप्त किया है। रायपुर की इस सफलता का सबसे सशक्त पहलू यह रहा कि शहर ने न केवल राष्ट्रीय स्तर की ओवरऑल रैंकिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, बल्कि वार्ड स्तर के पर्यावरण प्रबंधन में भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में शहर में पार्टिकुलेट मैटर यानी पीएम-10 (PM-10) का स्तर 78 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था, जो वर्ष 2025-26 में घटकर मात्र 64 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। इस तरह तीन वर्षों के भीतर पीएम-10 में 14 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर यानी लगभग 18 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
🏙️ 10 लाख से अधिक आबादी वर्ग में 189 अंक: चुनौतियों के बीच मिली बड़ी सफलता
महानगरीय चुनौतियों पर नियंत्रण की कहानी:
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कड़े मानकों पर मूल्यांकन: स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में आबादी और प्रदूषण भार के आधार पर शहरों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाता है।
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शहरीकरण और धूल की चुनौती: तेजी से बढ़ते शहरीकरण, सघन निर्माण गतिविधियों, वाहनों के बढ़ते दबाव और सड़कों से उड़ने वाली धूल के बावजूद रायपुर ने प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण पाया।
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राष्ट्रीय पटल पर पहचान: देश के तमाम बड़े औद्योगिक और मेट्रो शहरों को पीछे छोड़ते हुए रायपुर का टॉप-6 में शामिल होना यह प्रमाणित करता है कि यहां लागू की गई प्रदूषण नियंत्रण नीतियां जमीनी स्तर पर बेहद कारगर साबित हुई हैं।
📊 पीएम-10 के स्तर में 18% की भारी गिरावट: वर्षों के आंकड़ों में दिखा स्पष्ट सुधार
वायु गुणवत्ता सूचकांक में ऐतिहासिक सुधार का क्रम:
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2022 से 2026 का तुलनात्मक अंतर: वर्ष 2022-23 में पीएम-10 का स्तर 78 µg/m³ था, जो वर्ष 2023-24 में घटकर 76 µg/m³, वर्ष 2024-25 में 75 µg/m³ और 2025-26 में तेजी से सुधरकर 64 µg/m³ पर आ गया।
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विगत वर्षों का रिकॉर्ड: वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा 70, वर्ष 2018-19 में 68, वर्ष 2019-20 में 63, वर्ष 2020-21 में 55 और वर्ष 2021-22 में 61 µg/m³ दर्ज हुआ था।
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स्थिर सुधार: पिछले कुछ वर्षों के उतार-चढ़ाव के बाद 2025-26 के आंकड़े यह साबित करते हैं कि शहर की हवा में धूल कणों और श्वसन संबंधी प्रदूषकों की मात्रा में ठोस और स्थायी कमी आई है।
🏅 शहर के साथ वार्ड स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन: वार्ड क्रमांक 46 और 30 ने बनाई जगह
राज्य स्तरीय वार्ड रैंकिंग में रायपुर का दबदबा:
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कैटेगरी-1 में वार्ड 46 अव्वल: 30 हजार से अधिक आबादी वाली राज्य स्तरीय ‘कैटेगरी-1’ में रायपुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 46 (आरएमसी) ने शीर्ष स्थान हासिल किया।
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कैटेगरी-2 में वार्ड 30 का चयन: 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली ‘कैटेगरी-2’ में वार्ड क्रमांक 30 (आरएमसी) ने अपनी जगह पक्की की।
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माइक्रो-लेवल मैनेजमेंट: वार्ड स्तर पर मिली यह दोहरी मान्यता स्पष्ट करती है कि वायु गुणवत्ता सुधार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मोहल्लों और वार्डों में जमीनी स्तर पर काम किया गया।
🚜 150 KM सड़कों पर रोजाना मैकेनिकल स्वीपिंग: 100 KM में पैच रिपेयर से रुकी धूल
धूल नियंत्रण और सड़क सुधार के प्रमुख कार्य:
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सड़कों का सुदृढ़ीकरण: सड़कों से उड़ने वाले बारीक धूल कणों को रोकने के लिए नगर निगम ने शहर के करीब 100 किलोमीटर मुख्य मार्गों पर युद्धस्तर पर पैच रिपेयर और डामरीकरण का काम पूरा किया।
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मैकेनिकल स्वीपिंग का उपयोग: शहर की चौड़ी सड़कों और डिवाइडरों की नियमित सफाई के लिए 7 अत्याधुनिक मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें तैनात की गई हैं।
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प्रतिदिन 150 KM की सफाई: इन मशीनों के जरिए रोजाना रात और अलसुबह लगभग 150 किलोमीटर सड़कों से वैक्यूम तकनीक द्वारा धूल की सफाई की जा रही है।
⚡ ई-मोबिलिटी और ग्रीन ट्रांसपोर्ट: शहर में 30 चार्जिंग स्टेशन और 26 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन
पारंपरिक ईंधन के उत्सर्जन पर नियंत्रण:
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26 हजार से ज्यादा ई-वाहनों का बेड़ा: रायपुर में वर्तमान में 26,254 से अधिक रजिस्टर्ड इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
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30 चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क: ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के लिए शहर के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर करीब 30 सार्वजनिक ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
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शून्य टेलपाइप उत्सर्जन: पेट्रोल और डीजल वाहनों के विकल्प के रूप में ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने से वायुमंडल में हानिकारक कार्बन और सल्फर उत्सर्जन को रोकने में बड़ी मदद मिली है।
♻️ कचरा प्रबंधन के लिए 10 ट्रांसफर स्टेशन: खुले में कचरा जलाने पर लगी रोक
ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक निस्तारण:
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10 मॉडर्न ट्रांसफर स्टेशन: खुले में कचरा फेंकने और डंपिंग की समस्या समाप्त करने के लिए शहर में 10 आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन संचालित किए जा रहे हैं।
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धुएं से मुक्ति: डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और व्यवस्थित निस्तारण प्रणाली से खुले में कूड़ा जलाने (Garbage Burning) की घटनाओं पर पूर्ण रूप से अंकुश लगा, जिससे शहर के एक्यूआई (AQI) में अप्रत्याशित सुधार हुआ।
🌳 42 हजार पौधों का रोपण: 3 एकड़ में मियावाकी जंगल और 91.30% सर्वाइवल रेट
हरित क्षेत्र विस्तार का जापानी मॉडल:
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बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण: वर्ष 2025-26 के दौरान निगम द्वारा शहर के विभिन्न हिस्सों में कुल 42 हजार पौधे रोपे गए।
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मियावाकी तकनीक से सघन वन: घनी आबादी के बीच हरित फेफड़े विकसित करने के लिए 3 एकड़ क्षेत्र में जापानी पद्धति से 23 हजार पौधों का मियावाकी सघन पौधारोपण किया गया।
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शानदार जीवंतता प्रतिशत: निगम की नियमित देखभाल के चलते इस मियावाकी प्लांटेशन में पौधों का सर्वाइवल रेट (जीवंतता) 91.30 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद दुर्लभ और सराहनीय है।
🤝 सामूहिक प्रयास से मिली ऐतिहासिक उपलब्धि: अब देश में टॉ

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