Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
डीपीएस इंदिरापुरम में हर्षोल्लास से मना शिक्षक दिवस: शिक्षकों के समर्पण और योगदान का हुआ सम्मान जालंधर नगर निगम कमिश्नर बदले, IAS संदीप ऋषि की जगह PCS सुरिंदर सिंह संभालेंगे कमान अमृतसर में ड्रोन गतिविधि के बाद आदमपुर एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट: SSP हरविंदर विर्क ने दिए सुरक्षा बढ़ान... पंजाब और चंडीगढ़ में सरकारी कर्मचारियों का पूर्ण काम बंद: आज एक दिवसीय भूख हड़ताल, आम जनता परेशान Punjab Election 2027: पंजाब चुनाव को लेकर BJP का मास्टरप्लान, अक्टूबर में PM मोदी का 3 दिवसीय दौरा; ... लुधियाना में बेखौफ झपटमारों पर जनता का फूटा गुस्सा: बुजुर्ग महिला की बाली छीन रहे बदमाश को रंगे हाथ ... इस्लाम गंज में सवारी बिठाने को लेकर खूनी संघर्ष: ऑटो चालक पर तेजधार हथियारों से जानलेवा हमला Punjab Politics: 'बयानबाजी से पहले आंकड़े पढ़ें बाली', जालंधर भाजपा अध्यक्ष ने करतारपुर कॉरिडोर व AI... केएमपी एक्सप्रेस-वे पर भीषण सड़क हादसा: श्रद्धालुओं से भरी पिकअप में कैंटर ने मारी टक्कर, 2 की मौत रोहतक में नशे के खिलाफ संयुक्त छापेमारी: देर रात तक मेडिकल स्टोरों पर खंगाले गए स्टॉक और दस्तावेज

उम्र को दी मात, 62 साल में 10वीं पास: महासमुंद की कौशल्या देवी बंसल ने पेश की प्रेरणादायी मिसाल

1

महासमुंद (छत्तीसगढ़): जीवन के उस पड़ाव पर जब अधिकांश लोग पढ़ाई-लिखाई और परीक्षाओं से दूरी बना लेते हैं, तब महासमुंद शहर की कौशल्या देवी बंसल ने हाथ में कलम और किताबें थामकर समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की है।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (International Literacy Day) के पावन अवसर पर उनकी यह सफलता हर किसी को प्रेरित कर रही है। उन्होंने 60 वर्ष की आयु में कक्षा 8वीं और 62 वर्ष की उम्र में कक्षा 10वीं (मैट्रिक) की बोर्ड परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर यह सिद्ध कर दिया कि ज्ञान अर्जित करने और सीखने की कोई तय उम्र नहीं होती।

⏳ पारिवारिक जिम्मेदारियों में छूट गई थी पढ़ाई: सालों बाद पूरा किया अपना अधूरा सपना

जीवन का संघर्ष और संकल्प की सिद्धि:

  • पूर्व में रहीं पालिका उपाध्यक्ष: कौशल्या देवी बंसल पूर्व में नगर पालिका की उपाध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं।

  • कम उम्र में छूटा स्कूल: अल्पायु में ही विवाह हो जाने और पारिवारिक जिम्मेदारियों के अचानक बढ़ जाने के कारण उनकी नियमित स्कूली शिक्षा बीच में ही छूट गई थी।

  • मन में जीवित रही पढ़ने की ललक: बच्चों के लालन-पालन, घर-गृहस्थी के दायित्वों और सामाजिक व्यस्तताओं के बीच वर्षों बीत गए, परंतु अपने भीतर अधूरी रह गई पढ़ाई को पूरा करने की दृढ़ इच्छा उन्होंने कभी समाप्त नहीं होने दी।

  • सालों पुराने सपने को किया साकार: जब जीवन की तमाम जिम्मेदारियां पूरी हुईं और परिस्थितियां अनुकूल बनीं, तब उन्होंने अपने दशकों पुराने सपने को सच करने का साहसिक निर्णय लिया और परीक्षा पास कर सफलता का परचम लहराया।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.