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झारखंड में संगठित अपराध पर आर्थिक प्रहार: गैंगस्टरों के बैंक खातों और संपत्ति पर पुलिस का शिकंजा, बनेगा ऑनलाइन डेटाबेस

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रांची (झारखंड): राज्य में संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को और अधिक रणनीतिक व आक्रामक बनाने की तैयारी पूरी कर ली है।

अब पुलिस केवल अपराधियों की गिरफ्तारी या उन पर एफआईआर दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गिरोहों के पूरे नेटवर्क, फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम को जड़ से खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। पुलिस का मुख्य लक्ष्य संगठित अपराध की रीढ़ यानी उसके आर्थिक और आपराधिक ढांचे को पूरी तरह नेस्तनाबूद करना है।

⚠️ बड़े गैंगस्टरों के खात्मे के बाद भी आतंक: राहुल दुबे और प्रिंस खान बने चुनौती

राज्य में रंगदारी और फायरिंग की हालिया घटनाएं:

  • नए चेहरों का उभार: अमन साहू, सुजीत सिन्हा और अमन सिंह जैसे कुख्यात अपराधियों के अंत के बाद उम्मीद थी कि रंगदारी का खेल थमेगा, लेकिन नए गैंगस्टरों ने उनकी जगह ले ली है। वर्तमान में राहुल दुबे और प्रिंस खान गिरोह कंस्ट्रक्शन कंपनियों और औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार दहशत फैला रहे हैं।

  • 23 अगस्त 2026 (चतरा): टंडवा स्थित चंद्रगुप्त कोल परियोजना में सुशी इंफ्रा के दफ्तर पर चार नकाबपोश शूटरों ने दिनदहाड़े फायरिंग की, जिसमें गार्ड घायल हुआ। इसमें राहुल दुबे गैंग का नाम सामने आया।

  • 21 अगस्त 2026 (पलामू): सतबरवा में नेशनल हाईवे निर्माण स्थल पर फायरिंग में दो मजदूर घायल हुए। मौके से चार खोखे और राहुल दुबे गिरोह का धमकी भरा पर्चा बरामद हुआ।

  • 25 जुलाई 2026 (हजारीबाग व बड़कागांव): गिद्दी में राहुल दुबे गिरोह ने हाइवा उपचालक के पैरों में गोली मारी। इसी दिन बड़कागांव में दो हाइवा पर आठ राउंड फायरिंग हुई, जिसकी जिम्मेदारी प्रिंस खान ने ली।

🛡️ ATS, आईजी संगठित अपराध और जिला पुलिस का संयुक्त महा-अभियान

विशेष टीमों का गठन और समन्वय:

  • संयुक्त रणनीति: झारखंड से नक्सलवाद के खात्मे के बाद संगठित आपराधिक गिरोह रंगदारी के जरिए आतंक का कारोबार चला रहे हैं। इसे समाप्त करने के लिए एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS), आईजी ऑर्गेनाइज्ड क्राइम, क्विक रिस्पांस टीम और सभी जिलों के एसपी को एक साथ जोड़ा गया है।

  • मददगारों पर शिकंजा: पुलिस उन सफेदपोश और स्थानीय मददगारों की सूची बना रही है जो अपराधियों को छिपने का ठिकाना, हथियार, सिम कार्ड और आर्थिक व लॉजिस्टिक सहयोग मुहैया कराते हैं।

💰 अपराधियों की संपत्ति, बेनामी निवेश और बैंक खातों की होगी फॉरेंसिक जांच

वित्तीय स्रोतों पर प्रहार:

  • संपत्ति का ब्योरा: झारखंड पुलिस के प्रवक्ता सह आईजी अभियान नरेंद्र सिंह के अनुसार, पुलिस अपराधियों की चल (Movable) और अचल (Immovable) संपत्तियों का पूरा विवरण जुटा रही है।

  • काले धन की पड़ताल: जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि लेवी और रंगदारी से वसूला गया अवैध धन किन कारोबारों, शेल कंपनियों या रियल एस्टेट में खपाया जा रहा है।

💻 तैयार हो रहा ऑनलाइन डिजिटल डेटाबेस: 193 अपराधी सलाखों के पीछे

प्रशासनिक कार्रवाई और आधिकारिक आंकड़े (जनवरी से जुलाई 2026):

  • डिजिटल ट्रैकिंग: संगठित अपराध से जुड़े अपराधियों, उनके गुर्गों, बैंक खातों और सहयोगियों की निगरानी के लिए एक राज्यस्तरीय सेंट्रलाइज्ड ऑनलाइन डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।

  • गिरफ्तारी और जब्ती: पुलिस ने 7 महीनों में 193 कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, जिनके कब्जे से 63 अवैध हथियार और 274 जिंदा कारतूस जब्त किए गए हैं।

  • कड़े प्रशासनिक एक्शन: 47 अपराधियों को जिला बदर (तड़ीपार) किया गया है, जबकि विदेश भागने की आशंका के चलते 9 अपराधियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है।

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