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कमजोर मॉनसून से भाखड़ा डैम का जलस्तर गिरा, BBMB ने 3 राज्यों को जारी किया अलर्ट

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चंडीगढ़: उत्तर भारत में इस वर्ष मॉनसून की सुस्त रफ्तार ने जल संकट की चिंता बढ़ा दी है। पिछले वर्षों में हुई भारी बारिश के विपरीत इस बार मॉनसून कमजोर रहने से भाखड़ा डैम के जलस्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) ने साझेदार राज्यों—पंजाब, हरियाणा और राजस्थान—को आधिकारिक परामर्श और चेतावनी जारी की है। बीबीएमबी ने तीनों राज्यों से अपील की है कि वे पेयजल और सिंचाई की वार्षिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पानी का उपयोग अत्यधिक संयम और विवेकपूर्ण तरीके से करें।

📉 गोबिंद सागर झील में सामान्य से 25 फीट कम पानी, क्षमता से 46 फीट पीछे

जलस्तर और इनफ्लो के चिंताजनक आंकड़े:

  • वर्तमान जलस्तर: अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को भाखड़ा डैम की गोबिंद सागर झील का जलस्तर 1634 फीट दर्ज किया गया, जो इस अवधि के सामान्य औसत से करीब 25 फीट कम है।

  • पूर्ण भराव क्षमता से दूरी: डैम की अधिकतम भराव क्षमता 1680 फीट है, जिससे वर्तमान स्तर अभी 46 फीट नीचे चल रहा है।

  • चेयरमैन का बयान: BBMB के चेयरमैन मनोज त्रिपाठी ने बताया कि मॉनसून के इस चरण में सामान्यतः जलस्तर 1660 फीट के आसपास होना चाहिए। भविष्य में सूखे मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिए राज्यों को अतिरिक्त पानी न निकालने और आवश्यकतानुसार ही निकासी करने की सलाह दी गई है।

  • इनफ्लो में भारी कमी: पिछले वर्ष जहां इस समय पानी की आवक (इनफ्लो) 1 लाख क्यूसेक से अधिक थी और फ्लड गेट खोलने पड़े थे, वहीं इस बार अधिकतम आवक केवल 42,000 क्यूसेक के आसपास ही सीमित रही है।

🌊 पोंग डैम की स्थिति भी चिंताजनक, 20 सितंबर के बाद शुरू होगी नियंत्रित निकासी

पोंग डैम की स्थिति और भविष्य का आकलन:

  • पोंग डैम का स्तर: कांगड़ा स्थित पोंग डैम का जलस्तर भी इस समय 1365 फीट पर है, जो इसकी कुल क्षमता से लगभग 25 फीट कम है।

  • डेडलाइन और समय-सीमा: बांधों में मॉनसून के पानी के प्राकृतिक भराव की अवधि 20 सितंबर को समाप्त हो जाएगी, जिसके बाद 21 सितंबर से वार्षिक आवश्यकता के आधार पर नियंत्रित जल निकासी का चक्र शुरू होगा।

  • कम बारिश का पूर्वानुमान: मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना काफी कम है, जिसके चलते जलस्तर में किसी बड़े सुधार की उम्मीद नहीं है।

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