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लातेहार में भारी बारिश से कुसुमटांड़ डैम टूटा: कई एकड़ फसल बर्बाद, खेतों में बालू भरने से किसानों पर दोहरी मार

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लातेहार (झारखंड): सदर प्रखंड अंतर्गत ग्राम ओरया में स्थित कुसुमटांड़ डैम भारी मानसूनी बारिश के चलते अचानक टूट गया। डैम के ध्वस्त होने से स्थानीय किसानों को भारी आर्थिक और कृषि नुकसान का सामना करना पड़ा है।

डैम के टूटने से बांध के निचले और किनारे के हिस्से में स्थित कई एकड़ कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो गई और भारी मात्रा में रेत व बालू खेतों में भर गया। इससे खड़ी फसल नष्ट होने के साथ-साथ उपजाऊ खेत भी पूरी तरह अनुपयोगी हो गए हैं, जिससे किसानों पर दोहरा संकट आ गया है।

🌊 48 घंटे की मूसलाधार बारिश से बढ़ा पानी का दबाव, अचानक टूटा बांध का हिस्सा

हादसे का मुख्य कारण और जलभराव की स्थिति:

  • पहाड़ी पानी का जमाव: इस बांध में आसपास की पहाड़ियों से आने वाला बरसाती पानी इकट्ठा होता था, जिसका उपयोग किसान सिंचाई के लिए करते थे।

  • लगातार मूसलाधार बारिश: लातेहार जिले में पिछले तीन दिनों से हो रही भारी वर्षा और लगातार 48 घंटे तक जारी तेज बारिश के कारण डैम में जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया।

  • पानी का भारी दबाव: अत्यधिक जल दबाव को न झेल पाने के कारण बांध का एक मजबूत हिस्सा अचानक भरभराकर ढह गया और तेज बहाव खेतों की तरफ मुड़ गया।

🌾 खेतों में बिछी बालू की मोटी चादर, किसानों पर पड़ी दोहरी आर्थिक मार

किसानों की समस्याएं और कृषि भूमि की बर्बादी:

  • खेतों में बालू का जमाव: बांध टूटने से पानी के साथ बहकर आई रेत व सिल्ट कई एकड़ खेतों में मोटी परत के रूप में फैल गई है, जिससे अब वहां दोबारा बुवाई करना भी अत्यधिक कठिन हो गया है।

  • आर्थिक व मानसिक संकट: फसल गंवाने और जमीन खराब होने के चलते स्थानीय किसानों के सामने रोजी-रोटी और कर्ज का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

  • मुआवजे की मांग: ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब भौतिक सत्यापन कराकर उचित वित्तीय सहायता व मुआवजा प्रदान करने और क्षतिग्रस्त डैम की मरम्मत कराने की मांग की है।

🗣️ ‘₹500 किलो बीज लाकर धान लगाया था, सब बालू में दब गया’: स्थानीय महिलाएं

पीड़ित किसानों का दर्द और व्यथा:

  • किसानों का बयान: स्थानीय महिला किसानों तेतरी देवी, संगीता देवी, सुनीता देवी और दिलबसिया देवी ने बताया कि इस वर्ष सूखे जैसी स्थिति के दौरान डीजल पंप से महंगे दामों पर पानी चलाकर धान की रोपाई की गई थी।

  • महंगे बीज की लागत: उन्होंने ₹500 प्रति किलोग्राम की दर से उत्तम बीज खरीदकर मेहनत से फसल तैयार की थी, लेकिन डैम के पानी और मलबे ने सब कुछ नष्ट कर दिया।

  • भविष्य की चिंता: तैयार धान के पौधे बालू के नीचे दब जाने से उनके सामने परिवार के भरण-पोषण और आजीविका की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।

🔍 ‘मामले की जांच जारी, निर्माण एजेंसी का पता लगा रहे’: कार्यपालक अभियंता

विभागीय प्रतिक्रिया और प्रशासनिक कदम:

  • जांच शुरू: लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता किशुन मुंडा ने बताया कि डैम टूटने की सूचना प्राप्त होते ही विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

  • निर्माण का विवरण: विभाग यह रिकॉर्ड भी खंगाल रहा है कि इस बांध का मूल निर्माण किस एजेंसी या योजना के तहत कराया गया था।

  • आगामी कार्रवाई: तकनीकी जांच और स्थलीय निरीक्षण रिपोर्ट आने के बाद डैम के पुनर्निर्माण और सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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