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MMDR संशोधन बिल पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ का बड़ा बयान: ‘झारखंड को होगा सीधा फायदा’

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रांची (झारखंड): खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक (MMDR Bill) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इस कानून का पुरजोर समर्थन किया है।

रांची स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) प्रदेश कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संशोधन झारखंड जैसे खनिज बहुल राज्यों के विकास, राजस्व और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देगा तथा देश को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर करेगा।

🏛️ ‘बिल राजनीतिक एजेंडा नहीं, देश का एजेंडा है’: CM हेमंत सोरेन के विरोध पर नाराजगी

संजय सेठ द्वारा दिए गए प्रमुख बिंदु:

  • राजनीतिक चश्मे से न देखें: केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा विधेयक का विरोध किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसे राजनीति से ऊपर उठकर राज्य के व्यापक हित में देखना चाहिए।

  • खनिजों का सदुपयोग: उन्होंने कहा कि ईश्वर ने झारखंड को प्रचुर खनिज संपदा दी है और इसके एक-एक ग्राम का सही और पारदर्शी उपयोग होना चाहिए।

  • विकासोन्मुखी सोच: केंद्र सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाते हुए राज्यों के आर्थिक सशक्तीकरण के उद्देश्य से यह कदम उठाया है, जिसका सभी को स्वागत करना चाहिए।

🛑 ‘अवैध खनन पर लगे रोक, लीगल माइनिंग से बढ़ेगी संपन्नता’

खनन सुधारों और पड़ोसी राज्यों से प्रतिस्पर्धा पर विचार:

  • पारदर्शी उत्पादन: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विधेयक का मुख्य उद्देश्य अवैध खनन पर पूर्ण विराम लगाना और वैध खनन के जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

  • ओडिशा और बंगाल से सीख: झारखंड सरकार को पड़ोसी खनन राज्यों जैसे ओडिशा और पश्चिम बंगाल से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए कि वे किस प्रकार अधिक उत्पादन और लागत नियंत्रण सुनिश्चित कर रहे हैं।

  • लागत का बड़ा अंतर: उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि सभी राज्यों की बेस लैंडिंग कॉस्ट लगभग समान होने के बावजूद ओडिशा ₹1708 की दर दे रहा है, जबकि झारखंड में यह ₹2460 पहुंच जाती है; इस विसंगति को दूर करना बेहद जरूरी है।

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बुनियादी ढांचे और राज्य में कोल ब्लॉकों की स्थिति:

  • शिक्षा व स्वास्थ्य का विकास: संजय सेठ ने कहा कि वैध खनन से मिलने वाले राजस्व का उपयोग खनन क्षेत्रों में आधुनिक अस्पतालों, बेहतर स्कूलों और बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए होगा।

  • कोल ब्लॉक संचालन में पिछड़ा झारखंड: उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में झारखंड में 11 कोल ब्लॉक की लीज हुई लेकिन एक भी चालू नहीं हो सका, जबकि ओडिशा में 79 में से 35 कोल ब्लॉक तेजी से क्रियान्वित होकर उत्पादन शुरू कर चुके हैं।

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