Dhamtari Social Service: जिनकी पहचान नहीं, उनके अपने बने लोग, 717 अज्ञात शवों के निमित्त हुआ विधि-विधान से तर्पण
दुनिया से चले जाने के बाद हर व्यक्ति के अपने उसका श्राद्ध और तर्पण कर आत्मा की शांति की कामना करते हैं, लेकिन उन लोगों का क्या जिनकी मृत्यु के बाद न कोई अपना सामने आता है और न ही अंतिम विदाई देने वाला कोई होता है? ऐसी ही पहचान विहीन आत्माओं के लिए छत्तीसगढ़ के धमतरी में मानवता की एक बेहद मार्मिक और प्रेरक तस्वीर देखने को मिली है। सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर चित्रोत्पला गंगा के तट पर स्थित रुद्रेश्वर धाम में ‘स्वर्गधाम सेवा समिति’ द्वारा 717 अज्ञात मृतकों के निमित्त विधि-विधान से सामूहिक तर्पण और पिंडदान का अनुष्ठान संपन्न कराया गया।
📜 44 लावारिस अस्थियों से शुरू हुई थी यह प्रेरणा, राज्यपाल की अनुमति से मिला था विसर्जन का अधिकार
स्वर्गधाम सेवा समिति के अध्यक्ष अशोक पवार और एवंत गोलछा ने बताया कि समिति वर्ष 2004 से लगातार लावारिस और अज्ञात शवों का हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करती आ रही है। इस सेवा की शुरुआत तब हुई जब 2004 से कोरोना काल तक भिलाई के शांति घाट में 44 ऐसी अस्थियां सुरक्षित रखी थीं जिन्हें लेने कोई परिजन नहीं पहुंचा था। इसके बाद समिति ने राज्यपाल से विशेष अनुमति प्राप्त कर उन सभी 44 अस्थियों का गंगा में विधिवत विसर्जन कराया। इस संवेदनशील पहल को आगे बढ़ाते हुए समिति ने अब तक कुल 717 अज्ञात मृतकों के लिए यह सेवा भाव समर्पित किया है।
🌿 तर्पण केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि पूर्वजों और इंसानी रिश्तों के प्रति कृतज्ञता का भाव
इस धार्मिक और सामाजिक आयोजन में पंडित रामअवतार तिवारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सभी अनुष्ठान पूरे कराए। तर्पण और पिंडदान के बाद हजारों लोगों के लिए महाप्रसाद व शांतिभोज की व्यवस्था भी जनसहयोग से की गई। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि पितृ पक्ष का समय केवल कर्मकांड का नहीं, बल्कि इंसानी वजूद के प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर है। धमतरी की इस समिति ने यह साबित कर दिया है कि पहचान भले ही गुम हो जाए, लेकिन एक इंसान के प्रति सम्मान और संवेदना का भाव कभी खत्म नहीं होना चाहिए।
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