Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Leopard Attack in Maharashtra: बिजली कटते ही गन्ने के खेत में छिपे तेंदुए ने बोला हमला, मासूम बच्चे ... Viral Video from Bihar: भागलपुर-दानापुर एक्सप्रेस में स्नैचर की करतूत, यात्रियों ने पकड़ा तो जान की ... Police Headquarters Ranchi: कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट और हार्ट सर्जरी के लिए आर्थिक सहायता स्वीकृत, ... Khunti Sadar Hospital: इलाज के दौरान मजदूर की मौत से शोक, ठेकेदार और परिजनों ने दी घटना की जानकारी Ganga Erosion in Sahibganj: खतरे के निशान से 40 सेमी ऊपर बह रही गंगा, रेलवे ट्रैक और नदी के बीच की द... Kanker News: उत्तर बस्तर कांकेर में वन्यजीवों की दस्तक, शहर के मठ में दिखा तेंदुआ तो पानी की टंकी पर... Archaeological Circuit in MP: एरण, ओरछा, सांची और भोजपुर को एक सूत्र में पिरोने की तैयारी, देशी-विदे... Train Timings 2026: 5 अक्टूबर से 24 नवंबर तक चलेगी वलसाड-दानापुर स्पेशल ट्रेन, जानें पूरा शेड्यूल और... Teacher Promotion in MP: शिक्षकों को करना होगा थोड़ा और इंतजार, पात्रता परीक्षा के बाद करीब 30 हजार ... Gwalior News: पड़ाव थाने के सामने दिनदहाड़े ताबड़तोड़ फायरिंग, दुकान में घुसकर मिठाई विक्रेता को मार...

दारुल उलूम देवबंद में शान से मना स्वतंत्रता दिवस, मौलाना अरशद मदनी ने किया संबोधित

11

सहारनपुर/देवबंद (उत्तर प्रदेश): विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद में स्वतंत्रता दिवस समारोह हर्षोल्लास और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने देश की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को एक अनमोल उपहार बताया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर करने वाली विघटनकारी ताकतों पर कड़ा प्रहार किया। मौलाना मदनी ने स्पष्ट कहा कि मुसलमान कभी आतंकवादी नहीं हो सकता, बल्कि निर्दोष मुसलमानों को आतंकवादी ठहराने वाले और समाज में नफरत का जहर घोलने वाले सांप्रदायिक तत्व ही असल में आतंकवादी हैं।

📜 ‘हमसे पूछो आजादी क्या होती है, उलेमा के बिना अधूरा है स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास’

मौलाना अरशद मदनी ने स्वतंत्रता संग्राम में मुसलमानों और उलेमा की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आजादी की सही कीमत और परिभाषा वे लोग बेहतर जानते हैं जिनके पूर्वजों ने इसके लिए अपने प्राणों की आहुति दी है।

उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रामाणिक इतिहास दारुल उलूम देवबंद, उलेमा-ए-किराम, मदरसों और मुस्लिम समाज के महान बलिदानों का उल्लेख किए बिना न तो लिखा जा सकता है और न ही समझा जा सकता है।

🏛️ 1857 की क्रांति के बाद स्वतंत्रता सेनानी तैयार करने के लिए हुई थी दारुल उलूम की स्थापना

दारुल उलूम देवबंद की स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के उपरांत 1866 में इस संस्थान की नींव रखी गई थी।

इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी तैयार करना था जो अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी की बेड़ियों को काटने के लिए निरंतर संघर्ष कर सकें। उन्होंने गहरा अफसोस जताते हुए कहा कि आज कुछ संकीर्ण मानसिकता वाले लोग राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और उन्हीं ऐतिहासिक मदरसों को आतंकवाद से जोड़ने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं, जहां से सबसे पहले ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका गया था।

📜 रेशमी रूमाल आंदोलन और माल्टा की कैद हमारे इतिहास की अमिट गाथाएं

मौलाना मदनी ने कहा कि ‘रेशमी रूमाल आंदोलन’ (Tehreek-e-Reshmi Rumal) और स्वतंत्रता सेनानियों की माल्टा जेल की यातनाएं इतिहास के वे स्वर्णिम पन्ने हैं जिन्हें कोई भी सांप्रदायिक शक्ति मिटा नहीं सकती।

उन्होंने स्मरण कराया कि शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन देवबंदी और शेखुल इस्लाम मौलाना हुसैन अहमद मदनी जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों को सात समंदर पार माल्टा की जेल में इसलिए अमानवीय यातनाएं झेलनी पड़ी थीं, क्योंकि वे भारत को अंग्रेजी दासता से पूर्णतः मुक्त देखना चाहते थे।

🔍 ‘देशभक्ति का प्रमाणपत्र बांटने वाले पहले अपने पूर्वजों का इतिहास देखें’

मौलाना मदनी ने मदरसों और मुसलमानों की राष्ट्रीय निष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया कि जब हमारे बुजुर्ग माल्टा में कैद थे, उलेमा अंग्रेजों के खिलाफ जेलें भर रहे थे और फांसी के फंदों को चूम रहे थे, तब देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटने वालों के वैचारिक पूर्वज कहां थे।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों और मदरसों से देशभक्ति का प्रमाण मांगने से पहले ऐसे लोगों को इतिहास के आईने में अपना वास्तविक अतीत देखना चाहिए।

⚡ ‘पहले मुसलमान निशाने पर थे, अब सीधे इस्लाम को निशाना बनाया जा रहा है’

मौलाना अरशद मदनी ने वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य की तुलना पूर्व के दौर से करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में भी मुसलमानों को राजनीतिक, शैक्षिक और सामाजिक नुकसान पहुंचाने की कोशिशें हुईं और दंगे भी हुए।

परंतु आज के दौर में स्थिति अधिक चिंताजनक है, क्योंकि पहले केवल मुसलमान निशाने पर हुआ करते थे, जबकि आज सीधे तौर पर इस्लाम और उसकी मान्यताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि इस्लाम को मिटाने की चाह रखने वाले खुद इतिहास के पन्नों में दफन हो गए, लेकिन इस्लाम सदैव जीवित रहा है और कयामत तक जीवित रहेगा।

🌍 सोवियत संघ का उदाहरण: जुल्म और पाबंदियों के बावजूद मिटाया नहीं जा सका इस्लाम

अपने संबोधन के अंत में मौलाना मदनी ने सोवियत संघ (USSR) का ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया।

उन्होंने बताया कि कम्युनिस्ट शासन के दौरान वहां दशकों तक मदरसों और मस्जिदों पर ताले जड़ दिए गए और अजान तक पर पाबंदी लगा दी गई थी। लेकिन वक्त का पहिया घूमा, सोवियत संघ का विघटन हुआ और उसी धरती से कई संप्रभु मुस्लिम बहुल देश अस्तित्व में आए। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का प्रमाण है कि हर प्रकार के दमन और अत्याचार के बावजूद आस्था और सच को कभी खत्म नहीं किया जा सकता।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.