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रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने मुख्यमंत्री निवास में खेली हरेली: पारंपरिक ‘रसूली’ झूले पर झूलकर ताजा की बचपन की यादें

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रायपुर (छत्तीसगढ़): हरेली तिहार के पावन पर्व के रंग में रंगे मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और पारंपरिक लोक परंपराओं की बेहद खूबसूरत और मनमोहक झलक देखने को मिली।

इस भव्य आयोजन में रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे भी विशेष रूप से सम्मिलित हुईं। कार्यक्रम में पहुँचीं महापौर ने जहाँ एक ओर इस पारंपरिक उत्सव का भरपूर आनंद लिया, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसूली यानी लकड़ी के चकरी वाले झूले पर झूलकर अपने बचपन के दिनों की सुनहरी यादों को ताजा किया। रसूली पर झूलते हुए महापौर का यह अत्यंत सहज और देशी अंदाज वहां मौजूद लोगों को बेहद पसंद आया। झूले से उतरने के बाद उन्होंने आधुनिक बड़े-बड़े झूलों को लेकर एक दिलचस्प टिप्पणी करते हुए कहा कि उनमें वह असली आनंद कहाँ, जो हमारी माटी से जुड़ी देशी रसूली में है।

🌿 मुख्यमंत्री निवास में धूमधाम से मनाया गया हरेली का पर्व, लोक परंपराओं से सराबोर दिखा पूरा आयोजन

प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास में हरेली का यह पारंपरिक पर्व पूरे उत्साह, उमंग और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

नया रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री स्वयं शामिल हुए तथा प्रदेशभर से बड़ी संख्या में मातृशक्ति व महिलाएं भी इस उत्सव का हिस्सा बनने पहुँचीं। कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ की मूल लोक संस्कृति, ग्रामीण जीवन शैली और पारंपरिक खेलों के अद्भुत रंग देखने को मिले। इन देसी आयोजनों और हरेली की अनूठी रौनक ने पूरे उत्सव को बेहद खास और ऐतिहासिक बना दिया।

🪀 मुख्यमंत्री निवास पहुँचीं महापौर मीनल चौबे, पारंपरिक रसूली देख खुद को नहीं रोक पाईं

रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे हरेली उत्सव में सहभागिता करने के लिए मुख्यमंत्री निवास पहुँची थीं।

उन्होंने पूरे कार्यक्रम स्थल का भ्रमण किया और वहाँ चल रही विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आनंद उठाया। लेकिन समारोह के दौरान महापौर का उत्साह तब और अधिक बढ़ गया जब उनकी नजर पारंपरिक ‘रसूली’ पर पड़ी। फिर क्या था, बचपन की यादों से जुड़े इस झूले को देखकर महापौर खुद को रोक नहीं पाईं और अन्य महिलाओं के साथ रसूली पर झूलने के लिए पहुँच गईं।

🔄 गोल-गोल घूमती रसूली ने लौटाई बचपन की खुशियां, जिम्मेदारियों से दूर नजर आया मासूम अंदाज

लकड़ी की बनी इस पारंपरिक रसूली पर महापौर मीनल चौबे अन्य महिलाओं के साथ आनंदित होकर झूलती नजर आईं।

जैसे-जैसे रसूली गोल-गोल घूमकर ऊपर उठी, महापौर के चेहरे पर बचपन वाली निश्चल खुशी साफ झलक रही थी। कुछ पलों के लिए ऐसा प्रतीत हुआ मानो महापौर अपने पद, प्रोटोकॉल और राजनीतिक जिम्मेदारियों को पीछे छोड़कर फिर से उसी बचपन में लौट गई हों, जहाँ गांव की गलियों में देशी झूलों का अपना एक अलग और अनूठा रोमांच हुआ करता था। हरेली के इस पारंपरिक झूले ने उन्हें उनकी जड़ों से गहराई से जोड़ दिया।

🗣️ “मुख्यमंत्री ने सीएम हाउस को बनाया प्रदेशवासियों का घर”— बातचीत में बोलीं महापौर मीनल चौबे

ईटीवी भारत से हुई एक विशेष बातचीत में महापौर मीनल चौबे ने साझा किया कि आज रसूली पर झूलकर उन्हें असीम मानसिक प्रसन्नता और आनंद की अनुभूति हुई है।

उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने इस शासकीय आवास को वास्तव में संपूर्ण प्रदेशवासियों का अपना घर बना दिया है। महापौर का मानना है कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी और आम नागरिकों को अपनी संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं से मजबूती से जोड़े रखने का कार्य करते हैं।

💭 “बचपन की यादें हुईं ताजा, छत्तीसगढ़ की संस्कृति की अपनी है पहचान”— मीनल चौबे

मीनल चौबे ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री निवास के हरेली आयोजन में आकर उनके बचपन के वे दिन फिर से जीवंत हो उठे।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास अपनी खुद की गौरवशाली संस्कृति और समृद्ध परंपरा है, और ‘रसूली’ यानी पारंपरिक चकरी इसी लोक संस्कृति का अभिन्न अंग रही है। बचपन के दिनों में वे अक्सर इस तरह के ग्रामीण झूलों पर आनंद लिया करती थीं, और आज वर्षों बाद दोबारा इस पर झूलने का अवसर मिला तो पुरानी यादें ताजा हो गईं। उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेली पर्व की आत्मीय शुभकामनाएं भी दीं।

🎪 आधुनिक और देशी झूलों की तुलना पर बोलीं महापौर— “जो मजा रसूली में है, वो आज की कृत्रिम चीजों में नहीं”

जब चर्चा पारंपरिक रसूली से आगे बढ़कर महानगरों के बड़े-बड़े आधुनिक झूलों तक पहुँची, तो महापौर मीनल चौबे का जवाब बेहद सारगर्भित और दिलचस्प था।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज के इन आधुनिक और कृत्रिम बड़े झूलों में वह आत्मीय मजा नहीं है, जो हमारे शुद्ध देशी झूलों में मिलता है। महापौर ने कहा कि हमारी परंपरा और संस्कृति से जुड़ी चीजों का जो सुखद अहसास है, उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता। आधुनिक चीजें कुछ समय के लिए भले ही आकर्षक लग सकती हैं, परंतु अपनी माटी की परंपराओं में जो अपनापन और असीम आनंद है, वह अन्यत्र दुर्लभ है।

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