Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Benjamin Netanyahu UNGA 2026: नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर पर साधा निशाना, ममदानी बोले- ICC वारंट ... UPI MDR Charges Update: क्या छोटे टुकड़ों में पेमेंट करने से बचेगा MDR? जानिए क्या कहते हैं नियम और ... HMD Vibe 2 Pro Price and Specifications: जानिए फीचर्स, कलर ऑप्शन और फ्लिपकार्ट उपलब्धता से जुड़ी पूर... Bhadrapad Purnima 2026: कमजोर चंद्रमा के संकेत और भाद्रपद पूर्णिमा पर चंद्रमा को मजबूत करने के अचूक ... World Lung Day Health Tips: फेफड़ों को रखना है स्वस्थ तो एसी में बैठते वक्त इन बातों का रखें विशेष ध... PM Modi Memento Auction: पीएम मोदी को मिले उपहारों की नीलामी पर सुहेल सेठ का लेख, कहा- यह सेवा और त्... Bihar Crime News: जमुई और समस्तीपुर के बाद बांका में नाबालिग से छेड़छाड़, तेजस्वी यादव ने सरकार को घ... जमुई नाबालिग छात्रा से बदसलूकी मामला: दो महिला अधिकारियों को कमान, पीड़िता को जल्द न्याय दिलाने की त... भारत और वेस्टइंडीज के बीच 1st ODI: विराट-रोहित की मैदान पर वापसी, फैंस में भारी उत्साह 2026 बॉक्स ऑफिस का चौंकाने वाला सच: बड़े बजट और स्टारडम के बावजूद क्यों लड़खड़ाई बड़ी फिल्में?

कश्मीरी विस्थापितों की वापसी पर संसदीय पैनल की रिपोर्ट: सुरक्षा व आजीविका के आकलन का निर्देश, मिलेगा ₹10 लाख का पैकेज

12

नई दिल्ली: अपने पैतृक घर वापस लौटने और वहां पुनः नए सिरे से जीवन व्यतीत करने का अवसर मिले तो हर कोई सहर्ष अपने वतन लौटना चाहेगा। किंतु गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति (Standing Committee on Home Affairs) की एक नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर में विस्थापित (माइग्रेंट) 6,510 परिवारों ने अपने मूल निवास स्थानों पर वापस लौटने की लिखित इच्छा जताई थी, परंतु अत्यंत चकित करने वाला तथ्य यह है कि इनमें से मात्र 3 ही ऐसे परिवार हैं, जो वर्तमान में घाटी में पूर्ण रूप से पुनः बस पाए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए समिति ने केंद्र सरकार को उन व्यावहारिक एवं सुरक्षात्मक कारणों का गहराई से पता लगाने का निर्देश दिया है, जिनकी वजह से शेष परिवार अपनी इच्छा जताने के उपरांत भी घाटी में वापसी नहीं कर पा रहे हैं। इसमें सुरक्षा, आवास, आजीविका, शिक्षा एवं सामाजिक चिंताओं का समग्र मूल्यांकन (Assessment) शामिल करने की सिफारिश की गई है।

📊 गृह मामलों की संसदीय समिति ने 260वीं रिपोर्ट संसद में की पेश, एक बड़े सर्वे का दिया सुझाव

गृह मामलों से संबद्ध संसदीय स्थायी समिति ने संसद के पटल पर प्रस्तुत अपनी 260वीं विस्तृत रिपोर्ट में इस जमीनी हकीकत का विवरण साझा किया है।

समिति ने जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के बाहर रह रहे समस्त माइग्रेंट परिवारों का एक व्यापक और व्यवस्थित (Structured) सर्वे कराने की सिफारिश की है, ताकि मौजूदा पुनर्वास पैकेज का नए सिरे से निष्पक्ष पुनरावलोकन (Review) किया जा सके। इससे विस्थापित कश्मीरी परिवारों की एक सुरक्षित, स्वैच्छिक और सम्मानजनक वापसी को व्यावहारिक रूप से सुगम बनाया जा सकेगा। यद्यपि रिपोर्ट में यह स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है कि इन विस्थापित परिवारों ने वापसी की इच्छा किस विशिष्ट वर्ष में व्यक्त की थी।

🏛️ डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के नेतृत्व वाले पैनल ने कश्मीरी विस्थापितों की ली विस्तृत जानकारी

11 से 15 मई के मध्य जम्मू-कश्मीर के अपने आधिकारिक अध्ययन दौरे के दौरान, डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के नेतृत्व वाले संसदीय पैनल ने विस्थापित हिंदू माइग्रेंट आबादी के पुनर्वास के संबंध में केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से विस्तृत ब्योरा मांगा था।

इसमें मुख्य रूप से विस्थापित परिवारों की कुल संख्या, माइग्रेंट्स की संपत्तियों को वापस हासिल करने व उनकी सुरक्षा, लंबित कानूनी व स्वामित्व (Ownership) विवादों के निपटारे, पुनर्वास नीति की वर्तमान प्रगति और जम्मू-कश्मीर से बाहर रह रहे माइग्रेंट्स की कश्मीर घाटी लौटने की वास्तविक स्थिति से जुड़े आंकड़े शामिल थे।

💰 कश्मीरी विस्थापितों के राहत व पुनर्वास हेतु ₹10 लाख की वित्तीय सहायता का प्रावधान

संसदीय पैनल के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए जम्मू-कश्मीर (J&K) प्रशासन ने अवगत कराया कि कश्मीरी माइग्रेंट्स की राहत, पुनर्वास और सम्मानजनक वापसी के व्यापक सरकारी प्रयासों के अंतर्गत पात्र विस्थापितों को ₹10 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.