जमुई नाबालिग छात्रा से बदसलूकी मामला: दो महिला अधिकारियों को कमान, पीड़िता को जल्द न्याय दिलाने की तैयारी
जमुई (बिहार): जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ हुई बदसलूकी के संवेदनशील मामले में पीड़िता को त्वरित न्याय दिलाने के लिए अब दो महिला प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मोर्चा संभालेंगी। एक ओर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) आईपीएस दीप्ति मोनाली पूर्व से गठित विशेष जांच दल (SIT) का नेतृत्व कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर जमुई की उप विकास आयुक्त (DDC) सह जिला परिषद की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी आईएएस चौधरी शिप्रा विजयकुमार को स्पीडी ट्रायल से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया का नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है।
आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जिला प्रशासन का पूरा ध्यान पीड़िता को जल्द से जल्द न्यायिक राहत दिलाने के लिए मामले को पूरी मजबूती के साथ अदालत में प्रस्तुत करने पर केंद्रित है। जिला प्रशासन ने स्पीडी ट्रायल से जुड़ी सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताओं को 15 से 20 दिनों के भीतर पूरा करने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए पुलिस अनुसंधान और प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारियां अलग-अलग स्तरों पर तय कर दी गई हैं।
👮♀️ आईपीएस दीप्ति मोनाली संभाल रहीं SIT की कमान: आईएएस शिप्रा बनीं नोडल अधिकारी
जांच और प्रशासनिक समन्वय का ढांचा:
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SIT की कमान: इस प्रकरण की गहन जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) का नेतृत्व एसडीपीओ आईपीएस दीप्ति मोनाली कर रही हैं। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने, फॉरेंसिक दस्तावेज तैयार करने और पुलिस कार्रवाई को निष्पक्षता से आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
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प्रशासनिक नोडल पदाधिकारी: आईएएस चौधरी शिप्रा विजयकुमार को स्पीडी ट्रायल से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं की निगरानी का दायित्व सौंपा गया है। वह विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल और अदालती प्रक्रिया से संबंधित प्रशासनिक कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने का काम करेंगी।
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मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी: पुलिस ने इस मामले में नामजद मुख्य आरोपी नंदन यादव, हरेराम यादव और मिथिलेश चौधरी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा एक अन्य संदिग्ध की पहचान और उसके सत्यापन की प्रक्रिया जारी है, जिस पर सत्यापन पूरा होते ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
⏳ 15 से 20 दिनों में कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने का लक्ष्य: स्पीडी ट्रायल से मिलेगा त्वरित न्याय
प्रशासनिक रोडमैप और उच्चस्तरीय सहयोग:
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अदालती कार्रवाई में तेजी: जिला प्रशासन और पुलिस का संयुक्त प्रयास है कि जांच से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज, चार्जशीट और साक्ष्य अदालत के समक्ष तेजी से पेश किए जाएं, ताकि मुकदमे की सुनवाई में किसी प्रकार का विलंब न हो।
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डीएम और एसपी का रुख: जिलाधिकारी नवीन और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने संयुक्त रूप से मामले की प्रगति और आगामी रणनीति की जानकारी साझा की। उन्होंने दोहराया कि 15 से 20 दिनों के भीतर स्पीडी ट्रायल से जुड़ी समस्त औपचारिकताओं को पूरा कर लिया जाएगा।
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परिजनों को सुरक्षा व सहायता का आश्वासन: 24 सितंबर को पीड़िता के परिजनों ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। सरकार की ओर से पीड़ित परिवार को पूरी सुरक्षा, कानूनी सहायता और छात्रा की आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए हरसंभव सहयोग का ठोस आश्वासन दिया गया है। फिलहाल दोनों महिला अधिकारियों की अगुवाई में चल रही इस त्वरित कार्रवाई पर पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं।
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