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Iran Nuclear Crisis 2026: ईरान के पास 10 परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम, IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने जारी किया अलर्ट; जानें कितनी है तबाही की क्षमता?

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ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ गई है. संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था International Atomic Energy Agency (IAEA) के प्रमुख Rafael Grossi ने बड़ा खुलासा किया है कि ईरान अभी भी परमाणु बम बना सकता है. ग्रॉसी के मुताबिक, ईरान का बड़ा हिस्सा संवर्धित यूरेनियम इस्फहान इलाके में जमीन के नीचे बनी एक सुरंग में रखा गया था और संभावना है कि यह सामग्री अब भी वहीं मौजूद हो सकती है.

10 परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम?

IAEA के अनुमान के अनुसार, पिछले साल युद्ध शुरू होने से पहले ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम से ज्यादा 60% तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद था. इस स्तर का यूरेनियम अगर और ज्यादा शुद्ध किया जाए तो उससे करीब 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं. ग्रॉसी ने बताया कि इस्फहान में आखिरी निरीक्षण के समय करीब 200 किलोग्राम 60% शुद्धता वाला यूरेनियम मौजूद था.

ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्र हैं Isfahan Nuclear Technology Center, Natanz Nuclear Facility और Fordow Fuel Enrichment Plant.

पिछले साल अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बड़े हमले किए थे. उस समय अमेरिका ने Northrop Grumman B‑2 Spirit बमवर्षकों से भारी बंकर बस्टर बम गिराए थे, जो जमीन के सैकड़ों फीट नीचे तक तबाही मचाने में सक्षम हैं. हालांकि इस्फहान के पास मौजूद अंडरग्राउंड टनल कॉम्प्लेक्स इन हमलों में पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ.

परमाणु सामग्री शिफ्ट होने के संकेत नहीं

IAEA प्रमुख ने बताया कि सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य निगरानी तरीकों से अब तक ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि इस्फहान से परमाणु सामग्री को कहीं और ले जाया गया हो. उनके मुताबिक, कुछ संवर्धित यूरेनियम नतांज केंद्र में भी मौजूद हो सकता है.

पिछले साल हुए हमलों के बाद से ईरान ने IAEA को अपने परमाणु भंडार की पूरी जानकारी नहीं दी है और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को बमबारी वाले परमाणु ठिकानों का निरीक्षण करने की भी अनुमति नहीं दी गई है.

साल 2025 में क्या हुआ था?

पिछले साल (2025 में) अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के परमाणु संग्रह (nuclear facilities) पर बड़े हमले किए थे। जिसे Twelve-Day War या 12 दिन का युद्ध कहा जाता है:

-13 जून 2025 से इज़रायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। इनमें ईरान के प्रमुख परमाणु स्थल जैसे Natanz (यूरेनियम संवर्धन सुविधा), Isfahan (न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर), और अन्य सैन्य/परमाणु-संबंधित लक्ष्य शामिल थे। इज़रायल ने कई ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों और सैन्य कमांडरों को भी निशाना बनाया.

-22 जून 2025 को अमेरिका ने भी सीधे हस्तक्षेप किया. अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने Operation Midnight Hammer के तहत तीन प्रमुख परमाणु सुविधाओं—Natanz, Fordow (पहाड़ के नीचे बनी गहरी संवर्धन साइट), और Isfahan—पर हमला किया। इसमें B-2 बॉम्बर से “bunker buster” बम (जैसे GBU-57 Massive Ordnance Penetrator) और टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ.

उस समय भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इन हमलों से ईरान का परमाणु कार्यक्रम “पूरी तरह तबाह” (completely obliterated) हो गया और इसे 2 साल पीछे धकेल दिया गया. हालांकि: – IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) और कुछ खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा, लेकिन कार्यक्रम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ.

– ईरान ने कहा कि नुकसान सीमित था और वह अपना कार्यक्रम फिर से शुरू कर सकता है. यह 2025 का मुख्य हमला था, जिसके बाद 24 जून 2025 को सीजफायर हो गया, लेकिन 2026 में (फरवरी-मार्च) फिर से अमेरिका-इज़रायल ने ईरान पर हमले किए, जिसमें परमाणु स्थलों को फिर निशाना बनाया गया (जैसे Natanz के प्रवेश द्वार और अन्य साइट्स).

क्या अमेरिका भेजेगा स्पेशल फोर्स?

इसी बीच खबरें सामने आई हैं कि अमेरिका ईरान के परमाणु भंडार को कब्जे में लेने या नष्ट करने के लिए स्पेशल फोर्स मिशन पर भी विचार कर रहा है. माना जा रहा है कि यह मिशन बेहद गुप्त होगा और इसमें ईरान के अंडरग्राउंड ठिकानों में घुसकर परमाणु सामग्री को सुरक्षित या नष्ट करने की कोशिश की जा सकती है.

लेकिन सबसे ज़रूरी बात अगर ईरान का यह परमाणु भंडार सुरक्षित बचा हुआ है, तो यह मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.

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