Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

Janakpur News: गांव को महामारी से बचाने के लिए अनोखी रस्म, जानें होली से पहले क्यों छोड़ी जाती है मुर्गी

19

मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: जिले के भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पहले सदियों पुरानी ‘निकारि’ प्रथा आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है. यह इलाका आदिवासी बहुल है, जहां बैगा समाज की परंपराएं आज भी जीवंत हैं. ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से गांव को आपदा और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है.

होली से पहले होता है विशेष अनुष्ठान

जनकपुर के पुजारी गरीबा मौर्य ने बताया कि गांव बसने के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है. होली से पहले ‘डांग न गढ़ने’ की परंपरा से पूर्व निकारि की जाती है. पहले गांव के बैगा इस प्रथा को निभाते थे, वहीं वर्ष 2006 से गरीबा मौर्य ठाकुर बाबा से जुड़कर इस अनुष्ठान को आगे बढ़ा रहे हैं.

बीमारियों से बचाव की मान्यता

ग्रामीणों के अनुसार, निकारि प्रथा का मुख्य उद्देश्य गांव को हैजा, कॉलरा जैसी गंभीर बीमारियों और अन्य आपदाओं से बचाना है. इस अनुष्ठान के दौरान बैगा द्वारा मुर्गी चराई जाती है. गांव के हर चौक-चौराहे पर यह प्रक्रिया पूरी की जाती है, ताकि नकारात्मक शक्तियां गांव में प्रवेश न कर सकें.

गांव की सीमा के बाहर छोड़ी जाती है मुर्गी

मान्यता है कि अनुष्ठान के बाद मुर्गी को गांव की सीमा पार, नदी के उस पार छोड़ दिया जाता है. इससे किसी भी प्रकार की विपत्ति गांव में प्रवेश नहीं कर पाती. इस मौके पर गांव के सभी टोला-मोहल्लों के लोग मिलकर बैगा को अखत, झाड़ू और पूजन सामग्री देते हैं.

एकजुटता और आस्था का प्रतीक

गरीबा मौर्य का कहना है कि यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक है. ग्रामीणों का विश्वास है कि निकारि प्रथा से गांव में शांति, सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन बना रहता है. जनकपुर क्षेत्र में आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन देखने को मिलता है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.