Maha Shivratri 2026: प्रदोष से निशिता काल तक महाशिवरात्रि की धूम, बाबा नगरी में गूंजेगा हर-हर महादेव
देवघर: 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. बाबा भोलेनाथ की नगरी देवघर में इस पर्व को लेकर तैयारियां अपने चरम पर हैं. मंदिर परिसर से लेकर शहर की गलियों तक हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देने लगी है. श्रद्धालुओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शिवरात्रि के दिन पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त कौन-सा रहेगा?
धर्मग्रंथों के अनुसार, शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है. मान्यता है कि जो भी भक्त इन चारों प्रहर में से किसी भी प्रहर में सच्ची श्रद्धा से पूजा-अर्चना करता है, उसे भगवान शिव का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है.
देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम के वरिष्ठ पंडा लंबोदर परिहस्त के अनुसार, शिवरात्रि के अवसर पर आठ प्रहर यानी पूरे 24 घंटे तक पूजा-अर्चना का क्रम चलता है. हालांकि प्रदोष काल और ब्रह्म मुहूर्त को विशेष फलदायी माना गया है.
- प्रदोष काल (संध्या समय) – रात्रि में प्रदोष काल की पूजा सर्वाधिक फलदायी मानी गई है.
- निशिता काल (मध्य रात्रि) – रात 12:00 बजे से 1:15 बजे तक विशेष शुभ संयोग.
- ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 5:21 से 6:15 बजे तक उत्तम समय.
- अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:13 से 12:57 बजे तक भी शुभ काल.
हिंदू पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी प्रातः 5:30 बजे से 16 फरवरी प्रातः 4:30 बजे तक शिवरात्रि का विशेष योग रहेगा. हालांकि पुरोहितों का कहना है कि प्रदोष काल में की गई पूजा विशेष मनोकामना सिद्ध करने वाली होती है.
धर्माचार्यों के अनुसार, समय चाहे कोई भी हो, यदि श्रद्धा अटूट हो तो हर प्रहर शुभ है. शिवालयों में साधु-संत निर्धारित मुहूर्त के अनुसार, देश और दुनिया के कल्याण की कामना करेंगे.
गौरतलब है कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग में इस अवसर पर भव्य आयोजन होगा. अनुमान है कि लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए बाबा दरबार पहुंचेंगे.
महाशिवरात्रि की इस पावन रात में बाबा नगरी पूरी तरह शिवमय होगी. घंटों की गूंज, मंत्रों का उच्चारण और आस्था की अविरल धारा के बीच भक्त अपने आराध्य से सुख, समृद्धि और शांति की कामना करेंगे.
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