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हजारीबाग में सड़क पर उतरे स्ट्रीट डॉग्स लवर, वैकल्पिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग

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हजारीबाग: हजारीबाग के स्ट्रीट डॉग लवर्स सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर से विचार करने के लिए हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं. जिले के झील परिसर पर हजारीबाग के युवाओं ने यह मांग की है कि आवारा कुत्तों के समस्या के निजात के लिए कोई ऐसा कदम उठाए जो उनके जीवन के लिए घातक ना हो. सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को सड़क से हटाकर शेल्टर होम भेजने का आदेश निर्गत किया है.

सार्वजनिक सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्थल से आवारा कुत्तों और मवेशियों को हटाते हुए शेल्टर होम में रखने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर से विचार करने की जन वकालत शुरू हो गई है. स्ट्रीट डॉग लवर्स का तर्क है कि इस आदेश से बेजुबान जानवरों के जीवन पर संकट खड़ा हो जाएगा.

स्ट्रीट डॉग लवर्स ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश तो दे दिया कि स्ट्रीट डॉग्स को उठाकर शेल्टर में रखा जाए, लेकिन सच्चाई यह है कि देश भर में अभी ऐसे शेल्टर होम ही मौजूद नहीं हैं, जहां लाखों की संख्या में इन कुत्तों को रखा जा सके.

नगर निगम या अन्य संस्था के पास आवारा कुत्तों को रखने के लिए व्यवस्थित बुनियादी ढांचा नहीं है. किसी जगह पर कुत्तों को एक साथ बंद कर दिया गया तो उनके बीच आपसी संघर्ष और बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाएगा. उन्होंने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करना चाहिए. डॉग लवर का कहना है कि इनकी संख्या में नियंत्रण करने के लिए सरकार को कदम उठाना चाहिए न कि इन्हें शेल्टर होम में रखने की व्यवस्था करनी चाहिए. आवारा पशुओं की नसबंदी टीकाकरण अनिवार्य करना इसका एक मात्र समाधान है.

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