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गुमनामी से ग्लोबल शोहरत तक, अंग्रेज ने खजुराहो के मंदिरों को अंधेरे से निकाल दुनिया तक पहुंचाया

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खजुराहो: मध्य प्रदेश के खजुराहो को मंदिरों का शहर कहा जाता है. इन मंदिरों का निर्माण 930 ईस्वी से लेकर 1048 ईस्वी के बीच हुआ था. चंदेल राजवंशियों ने खजुराहो को अपनी राजधानी बनाया था. पहले खजुराहो में 85 मंदिरों का समूह था लेकिन अभी सिर्फ 23 मंदिर ही बचे हैं. खजुराहो के ये मंदिर कभी गुमनामी में चले गए थे. लेकिन एक अंग्रेज ने इन मंदिरों की खोज कर दुनिया के सामने ला दिया. इन मंदिरों की कलाकारी, बनावट और मूर्तियां ऐसी हैं मानों खुद बोलती हों. तभी तो देश-दुनिया के पर्यटक खजुराहो को जानने, सुनने और देखने आते हैं.

खजुराहो में मौजूद हैं रहस्यमयी मंदिर
खजुराहो को प्राचीन और चमत्कारी मंदिरों की भूमि कहा जाता है. यहां ऐसे कई मंदिर आज भी मौजूद हैं, जिनसे जुड़ी कई कथाएं और रहस्य आज भी प्रचलित हैं. इन मंदिरों की कला और कारीगिरी को देखने देश-दुनिया भर से लोग खजुराहो आते हैं. खजुराहो के चंदेलकालीन मंदिरों का इतिहास सुनकर और कला देखकर लोग दंग रह जाते हैं. लेकिन कभी यह खजुराहो के मंदिर गुमनामी के अंधेरे में थे और इन मंदिरों को खोजने वाले एक अंग्रेज ने खोज कर खजुराहो के इन चंदेल कालीन मंदिरों को दुनिया के सामने ला दिया.

चंदेल राजाओं ने बनवाए थे मंदिर
खजुराहो के प्राचीन और अद्भुत मंदिरों को चंदेल राजाओं ने लगभग 930 ईस्वी से लेकर 1048 ईस्वी के बीच बनवाए. इनको बनाने में भी लगभग 100 साल से ज्यादा का वक्त लगा था. वहीं, समय, काल और सत्ता में परिवर्तन हुए तो 13 वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के आक्रमण के बाद कुछ मंदिरों को आक्रांताओं ने नष्ट कर दिया था. बाकी मंदिर धीरे-धीरे उपेक्षित हो गए और जंगल में समय के हिसाब से छिप गए. जो लंबे समय तक छिपे रहे.

ब्रिटिश खोजी ने ढूंढे थे खजुराहो के मंदिर
ब्रिटिश शासन ने पुरातत्व धरोहरों को खोजने के लिए खोजी रखे थे. अलेक्जेंडर कनिंघम भी उन्हीं खोजियों में से एक था. जिसने अपनी डिस्कवरी में खजुराहो के मंदिरों को खोजा था और दुनिया के सामने लेकर आया. 1830 के दशक में अलेक्जेंडर कनिंघम स्थानीय हिंदुओं की मदद से इन मंदिरों तक पहुंचा. तब ये मंदिर गुमनामी के अंधेरे में थे. लेकिन खोजी अंग्रेज अलेक्जेंडर कनिंघम ने इन्हें दुनिया के सामने लाने में मदद की. वास्तुशिल्प और कामुक मूर्तियों का खजाना आज दुनिया के सामने है. लेकिन अब ये खजुराहो के मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं. जहां भारतीय और विदेशी पर्यटक इनकी भव्यता देखने आते हैं.वहीं, स्थानीय निवासी जानकर गाइड प्रदीप पाठक बताते हैं, ”खजुराहो के मंदिरों के कारण आज खजुराहो में पूरे देश-दुनिया के पर्यटक आते हैं, जिस कारण खजुराहो के स्थानीय लोगों को पर्यटन के माध्यम से रोजगार के अवसर मिले हैं. गाइड, होटल, हस्तशिल्प कला, स्थानीय शिल्पकला व कला को बढ़ावा मिलने जैसे कई लाभ हुए हैं.”

क्या कहते हैं इतिहासकार
इतिहासकार NK जैन बताते हैं, ”खजुराहो के मंदिरों का इतिहास अद्भुत और प्राचीन है. इनका निर्माण 930 से लेकर 1048 वीं तक चंदेल शासकों के द्वारा करवाया गया था. इन मंदिरों को बनाने में लगभग 100 साल से ज्यादा लगे. यह मंदिर कुछ ग्रेनाइट के तो कुछ बलुआ पत्थर के हैं. अंग्रेज शासन काल में एक अंग्रेजी जनरल अलेक्जेंडर कनिंघम खजुराहो के मंदिरों को खोजकर भारतीय पटल पर लाया था. जब भारत आजाद हुआ था तब करीब 85 से 86 मंदिर थे. तब पुरातत्व विभाग ने इन मंदिरों को अपने अंडर में ले लिया. आजादी के बहुत साल बाद भी इन मंदिरों की कोई देख-रेख नहीं थी. आज लगभग 23 मंदिर ही बचे हैं.”

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