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गुरु तेग बहादुर जी की याद में यमुनानगर में बनेगा Medical College, हरियाणा CM नायब सैनी ने किया ऐलान

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श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन का वर्णन करते हुए और उनकी शहादत को नमन करते हुए सीएम सैनी ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर में यदि किसी एक व्यक्तित्व की उपस्थिति सदियों में अडिग, उज्जवल और अमर रही है, तो वे हैं श्री गुरु तेग बहादुर जी, जो पीढ़ी दर पीढ़ी मानवता के सच्चे रक्षक, अत्याचार के विरूद्ध अदम्य साहस के प्रतीक और धार्मिक स्वतंत्रता के महान संरक्षक के रूप में जाने जाते हैं। उनका बलिदान केवल एक समुदाय या क्षेत्र के लिए नहीं था, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए था। एक ऐसा बलिदान, जिसने भारत की आध्यात्मिकता आत्मा को सुरक्षित रखा और “वसुधैव कुटुम्बकम” के सिद्धांत को जीवंत किया।

उन्होंने आगे बताते कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी के बचपन का नाम त्याग मल था। वे छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी व माता नानकी जी की संतान थे। उनका जन्म 1 अप्रैल, 1621 ई. को अमृतसर में हुआ। वहां आज गुरुद्वारा ‘गुरु के महल’ के नाम से सुशोभित है। दुनिया में एक प्रचलित धारणा है कि, जब भी मानवता पर घोर अत्याचार होता है, तब मानवता की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए, किसी महापुरुष का आगमन होता है। गुरु जी के जन्म के समय, हिंदुस्तान पर मुगल बादशाह औरंगजेब का शासन था। वह पूरे भारतवर्ष का इस्लामीकरण करना चाहता था।

भारत में उस समय बहुतायत, सनातन को मानने वालों की थी। औरंगजेब के धर्म परिवर्तन के लिए, किए जा रहे अत्याचार से सताए हुए तत्कालीन हिंदु नेता पंडित कृपा राम जी ने कश्मीर से अपने साथियों के साथ श्री आनंदपुर साहिब में गुरु तेग बहादुर जी के पास पहुंचकर किए जा रहे जुल्म को रोकने तथा धर्म की रक्षा करने की विनती की। गुरु जी ने उनकी फरियाद सुनकर कहा कि ऐसे अत्याचारों को रोकने के लिए किसी महापुरुष को बलिदान देना होगा। उस समय बालक गोबिंद राय ने पूरी वार्ता सुनकर अपने पिता गुरु तेग बहादुर जी से कहा कि आप जी से बड़ा कोई महापुरुष नहीं है, इसलिए बलिदान आपको ही देना चाहिए। यह सुनकर गुरु जी ने अंतर्मुग्ध होते हुए, आए फरियादियों से कहा कि जाओ औरंगजेब को कह दो कि यदि गुरु तेग बहादुर जी धर्म परिवर्तन कर लेंगे तो पूरा भारतवर्ष ही इस्लाम कबूल कर लेगा।

यह संदेश जब औरंगजेब को मिला तब उसने गुरु जी को दिल्ली दरबार में उपस्थित होकर इस्लाम कबूल करने को कहा, तब उन्होंने दृढ़ता पूर्वक फतवा स्वीकार करने से इंकार कर दिया। बादशाह ने अपनी अवज्ञा का परिणाम मृत्यु के रूप में कबूलने के लिए कहा। सजा की तारीख 11 नवंबर, 1675 तय करके चांदनी चौक, दिल्ली में गुरु जी के साथ गए 3 श्रद्धालुओं भाई दयाला जी, भाई सतीदास जी और भाई मतीदास जी को क्रमश: देग में उबाल, रूई में लपेट जलाकर और आरे से चीर कर शहीद करने के बाद ही जब गुरु तेग बहादुर जी घबराए नहीं बल्कि दृढ़ रहे तब गुरु जी का सीस भी धड़ से अलग कर दिया।

इतना ही नहीं, भाई जैता जी को दिल्ली से आते हुए गांव गढ़ी कुशाला, सोनीपत में शीश सहित मुगल फौज में भेज दिया। इस गांव के गुरु घर के अनन्य सेवक भाई कुशाल सिंह दहिया ने अपने शीश को पुत्र द्वारा फौज के हवाले कर दिया और फिर भाई जैता जी फौज को चकमा देकर शीश सहित तरावड़ी, अम्बाला से होते हुए श्री आनंदपुर साहिब पहुंचे। उनके शीश को आनंदपुर साहिब पहुंचाने के लिए भाई जैता जी ने सेवा निभाई। पवित्र शरीर का संस्कार लक्की शाह वंजारा, जो कि उस समय के विषय के सबसे बड़े अमीर लोगों में शामिल थे, ने अपने गांव रायसिना (दिल्ली) में अपने घर रखकर आग लगाकर किया था। इस हृदय–विदारक घटना के उपरांत ही, मुग़लिया सल्तनत का पतन होना तय हो गया।

यह हमारा गौरव है कि हमारा हिंदुस्तान गुरुजनों, संतों, महापुरुषों, फकीरों का देश है। यही हरियाणा प्रदेश में कुरुक्षेत्र की धरती पर अधर्म के विरूद्ध धर्म की रक्षा के लिए महाभारत का युद्ध हुआ। यहां ही महाराज कुरु ने स्वर्ण मंडित हल चलाया एवं भगवान श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया इसलिए हरियाणा सरकार ने श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत समागम ज्योतिसर (कुरुक्षेत्र) में मनाने का फैसला लिया है। वर्ष 2015 में हमारी सरकार ने, संत–महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना शुरू की जिसके अंतर्गत श्री गुरु नानक देव जी, श्री गुरु तेग बहादुर जी, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी, बाबा बंदा सिंह बहादुर, धन्ना भगत जी, संत कबीर जी, संत नामदेव जी और संत रविदास जी सहित अन्य महान संतों एवं महापुरुषों के जीवन-चिंतन संबंधी प्रचार प्रसार के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

इस दौरान उन्होंने एक बड़ा ऐलान किया है। सीएम सैनी ने सिख समुदाय के पहले बादशाह बाबा बंदा सिंह बहादुर की राजधानी लोहगढ़ (यमुनानगर) में मार्शल आर्ट इंस्टीट्यूट, श्री गुरु तेग बहादुर मेडिकल कॉलेज, यमुनानगर बनाने का ऐलान किया है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी स्मारक द्वार, कॉलेज और संस्थानों पर भी गुरु साहिबानों के नाम पर नामकरण किया गया है। हरियाणा के लोगों का गुरु जी के साथ बहुत प्यार था। उनकी याद में 28 गुरुद्वारा साहिब बनाए गए हैं। इसके अलावा गुरु जी का ससुराल भी गांव लखनौर साहिब (अम्बाला) में स्थित है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज सिख धर्म के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी समागम के उपलक्ष्य में कुरुक्षेत्र में पहुंचे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने सिख समुदाय के पहले बादशाह बाबा बंदा सिंह बहादुर की राजधानी लोहगढ़ (यमुनानगर) में मार्शल आर्ट इंस्टीट्यूट, श्री गुरु तेग बहादुर मेडिकल कॉलेज, यमुनानगर बनाने का ऐलान किया है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी स्मारक द्वार, कॉलेज और संस्थानों पर भी गुरु साहिबानों के नाम पर नामकरण किया गया है। हरियाणा के लोगों का गुरु जी के साथ बहुत प्यार था। उनकी याद में 28 गुरुद्वारा साहिब बनाए गए हैं। इसके अलावा गुरु जी का ससुराल भी गांव लखनौर साहिब (अम्बाला) में स्थित है।

श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर श्रद्धासुमन भेंट करने के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी आज कुरुक्षेत्र आ रहे हैं। वहीं पूरे प्रदेश में 4 शोभायात्राओं में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की अगुवाई में लाखों श्रद्धालु कुरुक्षेत्र पहुंचे हैं। यहां सभी श्रद्धालु और हर प्रकार के धर्मों के लोग व संस्थाएं गुरु जी को श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे हैं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी ने कहा कि PM नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में लगभग 142 विदेशी दूतावास हैं जहां के स्थानीय लोग गुरु जी की शहादत को नमन कर रहे हैं। कुरुक्षेत्र में आठ गुरु साहिबान, श्री गुरु नानक देव जी, श्री गुरु अमरदास जी, श्री गुरु अर्जुन देव जी, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी, श्री गुरु हरिराय जी, श्री गुरु हरिकृष्ण जी, श्री गुरु तेग बहादुर जी तथा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने समय-समय पर अपने यहां अपने चरण डालकर इस धरती को पवित्र बनाया है। श्री गुरु तेग बहादुर जी का पूरा जीवन परोपकार, त्याग, संघर्ष तथा बलिदान समस्त संसार के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। गुरु जी ने अपने शीश का बलिदार दिया यदि वे शहादत न देते तो हिंदुस्तान की क्या दशा होती इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

सैनी सरकार ने 1 नवंबर, 2025 से लेकर 25 नवंबर, 2025 तक हरियाणा में गुरु जी की याद में कई आयोजन किए हैं। ये सभी समागम जन-सहभागिता और आध्यात्मिक एकता की अनोखी मिसाल बने हैं। पूरे राज्य में चारों दिशाओं से निकली शोभायात्राएं एक अनोखा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सव बन गईं हैं। राज्य में 8 नवंबर, को रोड़ी (सिरसा), 11 नवंबर को पिंजौर (पंचकूला), 14 नवंबर को फरीदाबाद तथा 18 नवंबर को कपाल मोचन (यमुनानगर) में आयोजित शोभायात्राओं ने हरियाणा को सचमुच एक आध्यात्मिक और भाईचारे की एकजुटता के धागे में पिरो दिया है। प्रदेश के गांव-गांव में कीर्तन, भजन, सत्संग और गुरु साहिब जी की वाणी का पाठ भी किया गया।

इसके अलावा सीएम सैनी ने बताया कि श्री गुरु तेग बहादुर जी की स्मृति में सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं। सिरसा स्थित चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में गुरु तेग बहादुर चेयर’ की स्थापना की। अंबाला के पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम बदलकर जल्द ही श्री गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर रखा जाएगा इसके लिए प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया है। करनाल में एक भव्य मैराथन तथा टोहाना-जींद-नरवाना मार्ग को ‘गुरु तेग बहादुर मार्ग’ नाम देने का काम भी शुरू हो चुका है। कलेसर क्षेत्र में ‘गुरु तेग बहादुर वन’ विकसित किया जा रहा है। यमुनानगर के किशनपुर में ‘जी.टी.बी. कृषि महाविद्यालय’ की स्थापना भी प्रस्तावित है। इन सभी पहलों का उद्देश्य श्री गुरु तेग बहादुर जी के त्याग, बलिदान और मानवता के अद्वितीय संदेश को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना है।

हरियाणा CM सैनी ने आगे कहा कि गुरु साहिब जी के संदेश आज भी हमारे दिलों में उतने ही जीवन्त और प्रभावशाली हैं, जितने 350 वर्ष पहले थे। उनकी अमर वाणी और उनका अद्वित्तीय बलिदान हमें तथा आने वाली पीढ़ियों को सदा प्रेरित करता रहेगा। गुरु जी की शहादत का वर्णन करते हुए गुरु परंपरा के समकालीन कवि ‘सेनापति’ ने बिल्कुल उपयुक्त और अति सुंदर कहा है – ‘प्रगट भयो गुरु तेग बहादर, सकल सृष्ट पै ढापी चादर’।

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