मानसा अदालत के आदेश पर लक्खा सिधाना और मोहनजीत शेरो नाभा जेल से रिहा, समर्थकों ने किया जोरदार स्वागत
मानसा/नाभा: पंजाब के मानसा न्यायालय द्वारा दिए गए आधिकारिक आदेशों के अनुपालन में किसान नेता लक्खा सिंह सिधाना और मोहनजीत सिंह शेरों को नाभा जेल से सुरक्षित रिहा कर दिया गया है। इन दोनों नेताओं की जेल से बाहर आने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में उनके समर्थक और शुभचिंतक नाभा जेल के मुख्य गेट के बाहर एकत्र हो गए थे, जिन्होंने ढोल-नगाड़ों और नारों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। जेल से रिहाई मिलने के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत करते हुए लक्खा सिधाना ने हुंकार भरी और कहा कि पंजाब की युवा पीढ़ी झूठे मुकदमों और पुलिस की सलाखों से बिल्कुल भी डरने वाली नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जेल से सीधे अब मानसा के लिए प्रस्थान कर रहे हैं।
शहादत को बदनाम न करने की अपील, लक्खा सिधाना बोले— जिस परिवार का जवान बेटा दुनिया से चला गया, उसके चरित्र पर सवाल न उठाएं
अपनी रिहाई के दौरान लक्खा सिधाना ने सार्वजनिक रूप से अपील करते हुए कहा कि पंजाब की पावन धरती का पूरा इतिहास कुर्बानियों और महान शहादतों से भरा पड़ा है, और परविंदर सिंह झोटा ने भी अपनी जान की शहादत दी है। उन्होंने तमाम लोगों से हाथ जोड़कर यह अपील की किशोकान्त परिवार पर तरह-तरह के झूठे आरोप लगाकर उनकी शहादत और बलिदान को कलंकित या बदनाम करने का प्रयास बिल्कुल न किया जाए। सिधाना ने कहा कि उन्हें इस बात की पूरी जानकारी नहीं है कि उनके पीछे मोर्चे और प्रदर्शन के दौरान क्या कुछ घटनाक्रम हुआ, लेकिन जिस अदन के माता-पिता ने अपना जवान बेटा हमेशा के लिए खो दिया हो, उनके गमगीन परिवार और चरित्र पर किसी को भी सवालिया निशान उठाने का कोई हक नहीं है। अंत में उन्होंने संकट की इस घड़ी में साथ देने वाले सभी पंजाबियों का तहे दिल से आभार जताया।
परविंदर झोटा हत्याकांड के विरोध में गठित एक्शन कमेटी लगातार उठा रही थी आवाज, दलजीत सिंह के शव को शामिल करने का था आरोप
ज्ञात हो कि इससे पहले परविंदर झोटा हत्याकांड के विरोध में क्षेत्र में लगातार संघर्षरत एक्शन कमेटी की ओर से यह प्रमुख मांग उठाई जा रही थी कि इस पूरे मामले में जितने भी लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से रिहा किया जाए। इसी मांग को लेकर विभिन्न मंचों से लगातार आवाज बुलंद की जा रही थी। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व पंजाब पुलिस ने लक्खा सिधाना को गिरफ्तार किया था, जिन पर झोटा हत्याकांड के विरोध में चल रहे एक उग्र प्रदर्शन के दौरान दलजीत सिंह के शव को भी धरने में शामिल करने और कानून व्यवस्था से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद से यह मामला काफी चर्चा में बना हुआ था।
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