झारखंड की राजधानी रांची स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में कांग्रेस पार्टी की उच्च-स्तरीय बैठक संपन्न, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और बोर्ड-निगमों की नियुक्तियों पर हुआ गहन मंथन
रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में गुरुवार को कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रभारी के राजू और झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेपीसीसी) के अध्यक्ष केशव महतो कामलेश की गरिमामयी उपस्थिति में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस उच्च-स्तरीय बैठक में विभिन्न आयोगों, बोर्डों और निगमों के गठन के लिए योग्य उम्मीदवारों के चयन हेतु बनाई गई विशेष समिति के सदस्यों के साथ-साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। बैठक के दौरान राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान और बोर्ड-निगमों में खाली पड़े पदों पर नियुक्तियों जैसे दो मुख्य मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
एसआईआर प्रक्रिया के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तावेजों की कमी और लोगों के बीच फैल रहे भ्रम व डर पर कांग्रेस ने जताई गहरी चिंता
बैठक में हुई चर्चा और पार्टी के आधिकारिक रुख की जानकारी देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बंधु तिर्की ने बताया कि आज की बैठक मुख्य रूप से दो बड़े विषयों पर केंद्रित रही। उन्होंने SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम कटने की आशंका, गांवों में जरूरी दस्तावेजों की भारी कमी तथा आम लोगों के मन में पैदा हो रहे भय का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा बार-बार SIR से जुड़े नए-नए निर्देश जारी किए जाने के कारण जनता के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है। कई सुदूर इलाकों में तो सीधे-साधे जनजातीय समूहों के लोगों को अपनी पैतृक जमीन छिन जाने का भी भय सताने लगा है। इसके अलावा, बोर्ड और निगमों में नियुक्तियों के लिए एक स्पष्ट व पारदर्शी मापदंड तय करने तथा पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर समर्पित रहने वाले कार्यकर्ताओं को उचित अवसर देने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
एसआईआर सूची से नाम कटने की आशंका पर कांग्रेस पार्टी उतरेगी जमीन पर, छूटे हुए मतदाताओं की पहचान कर उनकी मदद का लिया संकल्प
मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर अपनी बात रखते हुए बंधु तिर्की ने कहा कि वोटर लिस्ट से लोगों के नाम गायब होने की आशंका एक बहुत ही गंभीर समस्या बनती जा रही है। यह बेहद जरूरी है कि ऐसे तमाम लोगों की समय रहते पहचान की जाए, जिनके नाम सूची से कटने की कगार पर हैं या जिनके नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी इस दिशा में जमीनी स्तर पर उतरकर काम करने की पूरी तैयारी कर रही है। जिन लोगों के नाम सूची से छूटे हैं, उन्हें चिन्हित कर सामने लाया जाएगा और उनकी हरसंभव सहायता करने के लिए पार्टी कार्यकर्ता प्रयास करेंगे।
ग्रामीण इलाकों में दस्तावेज जुटाना है बड़ी चुनौती, पीढ़ियों पुराने कागजों के अभाव में आ रही हैं व्यावहारिक कठिनाइयां
बंधु तिर्की ने ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी वास्तविकताओं पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों के मुकाबले गांवों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लोगों को बहुत अधिक व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण परिवारों के पास कई बार आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते हैं। कई मामलों में जमीन के कागजात उनके दादा-परदादा या कई पीढ़ियों पुराने पूर्वजों के नाम पर दर्ज हैं, जिसके चलते वर्तमान पीढ़ी के युवाओं के लिए मांगे जा रहे नए दस्तावेज आसानी से जुटा पाना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण समाज की पारंपरिक व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को समझे बिना इस प्रकार की प्रक्रिया को लागू करने से आम जनता की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।
ग्रामीणों के मन में जमीन छिनने और कानूनी कार्रवाई का बैठा डर, सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होने की मंडरा रही है आशंका
कांग्रेस नेता ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में एसआईआर को लेकर लोगों के दिलों में अपनी जमीन छिन जाने या पुलिस-प्रशासनिक कार्रवाई का अनावश्यक डर घर करता जा रहा है। इसी आशंका के चलते कई लोग नोटिस मिलने के बावजूद सामने आने से कतरा रहे हैं। उन्होंने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यदि जनता के बीच से यह डर जल्द दूर नहीं किया गया, तो वे मतदाता सूची से तो बाहर हो ही जाएंगे, साथ ही कल्याणकारी सरकारी योजनाओं के मिलने वाले लाभ से भी पूरी तरह वंचित रह जाएंगे। इस गंभीर मुद्दे पर पार्टी जमीनी स्तर पर जन-जागरूकता फैलाएगी और अगले एक-दो दिनों के भीतर झारखंड कांग्रेस इस संबंध में अपनी आगामी रणनीति को अंतिम रूप देगी।
बोर्ड और निगमों की नियुक्तियों में पारदर्शी मापदंड तय हों, लंबे समय से सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं को मिलना चाहिए पूरा सम्मान
बंधु तिर्की ने बैठक के दूसरे अहम अजेंडे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य में लंबे समय से खाली पड़े विभिन्न बोर्डों और निगमों में नियुक्तियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। उन्होंने कहा कि इन पदों पर नियुक्तियों के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी क्राइटेरिया (मानदंड) तय किया जाना अति आवश्यक है। पार्टी के भीतर ऐसे कई निष्ठावान कार्यकर्ता हैं जो बरसों से संगठन की मजबूती के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, ऐसे जमीनी और सक्रिय कार्यकर्ताओं को बोर्ड, निगमों तथा आयोगों में अपनी सेवा देने का अवसर मिलना चाहिए।
व्यक्तिगत संबंधों के बजाय संगठन के प्रति योगदान और सामाजिक प्रतिनिधित्व को बनाया जाए चयन का मुख्य आधार
बंधु तिर्की का कहना था कि बोर्ड-निगमों में राजनीतिक नियुक्तियां करते समय केवल व्यक्तिगत नजदीकियों या संबंधों को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके बजाय कार्यकर्ता की सांगठनिक सक्रियता, पार्टी के प्रति उनका पुराना समर्पण, उनकी कार्यशैली और दल को मिलने वाले राजनीतिक लाभ जैसे सभी पहलुओं का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, चयन प्रक्रिया के दौरान अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक समुदायों की उचित भागीदारी व प्रतिनिधित्व का भी विशेष रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी के प्रस्तावित झारखंड दौरे के बाद सौंपी जाएगी अंतिम रिपोर्ट, पार्टी को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं का सम्मान जरूरी
बैठक में यह सहमति बनी कि बोर्ड और निगमों की नियुक्तियों से जुड़े प्रस्तावों को जल्द से जल्द रूपरेखा देकर मुख्यमंत्री के पास भेजा जाए। हालांकि, बंधु तिर्की के अनुसार नवंबर महीने में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसके समापन के बाद ही इस पूरी प्रक्रिया की अंतिम रिपोर्ट सौंपने का कार्य पूर्ण किया जाएगा। बैठक में यह कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया गया कि पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने के लिए अपने कर्मठ कार्यकर्ताओं को उचित मान-सम्मान देना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
गठबंधन के सभी घटक दलों की सहमति और कार्यकर्ताओं के योगदान का डेटा तैयार होने के बाद ही बढ़ेगी आगे की प्रक्रिया
इस पूरे विषय पर अपने विचार रखते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि पार्टी के सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं ने संगठन को आगे बढ़ाने में किसी न किसी रूप में अपना योगदान दिया है, इसलिए हर एक कार्यकर्ता के कार्य का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं को बोर्ड-निगमों में जिम्मेदारी सौंपना कोई एहसान या तोहफा नहीं, बल्कि उनके वर्षों के संघर्ष का वास्तविक सम्मान है। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश कार्यकर्ताओं के पिछले योगदान का पूरा डेटा तैयार कर रहे हैं, जिसके विश्लेषण के बाद ही आगे कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। महिला आयोग और खादी ग्रामोद्योग जैसे कई अहम बोर्डों के खाली होने पर उन्होंने कहा कि कानूनी पेचीदगियों को सुलझाने और महाधिवक्ता की राय लेने के बाद ही इन पर निर्णय लिया जा सकेगा। उन्होंने अंत में यह भी जोड़ा कि इन नियुक्तियों पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री को लेना है और इसके लिए सत्तारूढ़ गठबंधन के सभी दलों के बीच आपसी सहमति बनना भी बेहद जरूरी है।
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