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धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान! सनातन हिंदू एकता पदयात्रा के समापन पर मथुरा में बोले- ‘विचारों की यात्रा अब शुरू’, क्या है अगला लक्ष्य?

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दुनिया भर के हिंदुओं को एकजुट करने के संकल्प के साथ निकली बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की 10 दिवसीय सनातन हिंदू एकता पदयात्रा रविवार, 16 नवंबर को बांके बिहारी के दर्शन के साथ सम्पन्न हो गई. 7 नवंबर को दिल्ली से शुरू हुई यह विशाल यात्रा तीन राज्यों से होती हुई वृंदावन पहुंची. इस दौरान पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने लोगों को पांच संकल्प दिलाए. बागेश्वर महाराज ने साष्टांग दंडवत कर ब्रज की पवित्र रज माथे पर लगाई. उनकी आंखें भर आईं.

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने संबोधन में कहा कि यात्रा भले तन से पूरी हो गई हो, लेकिन मन के विचारों की यात्रा जारी रहनी चाहिए. उन्होंने बताया कि पदयात्रा का उद्देश्य संतति और संपत्ति की रक्षा करना है ताकि भारत में दंगा नहीं, गंगा का जयघोष हो. हिंदू गर्व से कहे कि वो हिंदू है. विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए बागेश्वर महाराज ने कहा कि बच्चों को कट्टर सनातनी बनने की प्रेरणा देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें न तो हिंदू हृदय सम्राट बनना है और न राजनीति करनी है, हम सिर्फ सनातन के सिपाही हैं. यात्रा ने विरोधियों को करारा जवाब दिया है. यह एकता और समर्पण का सफल संदेश बनी है. ब्रज पहुंचते ही धीरेंद्र शास्त्री भावुक हो गए. उन्होंनेसाष्टांग दंडवत कर ब्रज की पवित्र रज माथे पर लगाई. उनकी आंखें भर आईं.

उन्होंने यह भी कहा कि यह पदयात्रा सिर्फ शोभायात्रा न बन जाए, बल्कि हिंदू समाज एकजुट रहे. ताकि कोई विधर्मी अत्याचार करने की हिम्मत न करे. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कई सैनिक छुट्टी लेकर यात्रा में शामिल हुए. भोजन प्रसाद की व्यवस्था गौरी गोपाल आश्रम (अनि. अनिरुद्धाचार्य महाराज) की तरफ से की गई, जिसके लिए सभी आभार है.

ब्रज पहुंचते ही भावुक हुए धीरेंद्र शास्त्री

पदयात्रियों को बागेश्वर महाराज ने पांच महत्वपूर्ण प्रण दिलवाए. जुड़ो और जोड़ो अभियान, समाज से सतत संपर्क बनाए रखें और दूसरों को जोड़ें. भगवा अभियान – घरों पर भगवा ध्वज लगाने की प्रेरणा दी. साधु-संतों का कमंडल / सुंदरकांड मंडल- गांव-गांव सुंदरकांड के माध्यम से धर्म की धारा प्रवाहित करना है. घर वापसी अभियान जो लोग किसी कारण से हिंदू धर्म छोड़ चुके हैं, उन्हें वापस लाना है. तीर्थों के आसपास मांस-मदिरा की दुकानें बंद करवाने का संकल्प लें.

वृंदावन की सीमा पर गरुड़ माधव के पास पहुंचते ही बागेश्वर महाराज ने साष्टांग दंडवत कर ब्रज की पवित्र रज माथे पर लगाई. उनकी आंखें भर आईं. उन्होंने कहा कि ‘यह वही रज है जहां भगवान कृष्ण ने गायें चराईं, इसकी कृपा से भाव में परिवर्तन आता है.’ कथा व्यास देवकीनंदन ठाकुर, इंद्रेश उपाध्याय और पुंडरीक गोस्वामी ने भी ब्रज रज को प्रणाम किया.

जगतगुरु रामभद्राचार्य ने क्या कहा?

पदयात्रा के विराम के समय बागेश्वर महाराज के गुरु जगतगुरु रामानंदाचार्य रामभद्राचार्य महाराज की उपस्थिति ने आयोजन को और भव्य बना दिया. उन्होंने बागेश्वर महाराज को स्नेहपूर्वक अपने हृदय से लगाया. उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम हिंदू एकता का महाकुंभ रहा है. हिंदू सो रहा है इसलिए अत्याचार हो रहे हैं, अब ओम शांति नहीं, ओम क्रांति कहना सीखें. सभी संत अपने मतभेद भूलाकर हिंदू राष्ट्र के लिए एक हों.

सनातन हिंदू एकता पदयात्रा में शामिल होने पहुंचे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यात्रा के दौरान सड़क पर ही बुजुर्गों संग भोजन किया. उन्होंने कहा कि यह यात्रा अद्भुत है. समर्पण की भावना को और मजबूत करती है. देशभर से आए यात्रियों को नमन है.

कथावाचकों और संतों का आशीर्वचन

विश्राम स्थल पर आयोजित धर्मसभा में कई संतों और कथा वाचकों ने पदयात्रियों को आशीष दिया. इनमें प्रमुख रूप से पूज्य बालक योगेश्वर दास महाराज, गीता मनीषी जी, देवकीनंदन ठाकुर महाराज, पुंडरीक गोस्वामी, इंद्रेश उपाध्याय, अनिरुद्धाचार्य महाराज, राजू दास महाराज, आर. के. पांडे, मृदुल कांत शास्त्री इन सभी संतों और कथावाचकों ने सनातन एकता के इस संगम को ऐतिहासिक बताया.

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