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“जब तक जातिवाद रहेगा, आरक्षण जारी रहेगा”: मोहन भागवत की अपील पर बसपा प्रमुख मायावती का पलटवार

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नई दिल्ली/लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आरक्षण के संवेदनशील मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया वक्तव्य पर जोरदार जवाबी हमला बोला है।

हाल ही में मोहन भागवत ने आरक्षण का लाभ प्राप्त कर चुके सक्षम लोगों से स्वेच्छा से इसे छोड़ने की अपील करते हुए कहा था कि आरक्षण के राजनीतिकरण से समाज में कटुता उत्पन्न हुई है। भागवत के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बीएसपी चीफ मायावती ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत संदेश साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के बहुजन समाज—विशेषकर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण केवल एक आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक मुक्ति और संवैधानिक आत्म-सम्मान से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है।

⚖️ “जातिगत भेदभाव मिटने तक आरक्षण अपरिहार्य”, क्रीमी लेयर व्यवस्था का किया विरोध

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने जोर देकर कहा कि भारतीय समाज में सदियों से चली आ रही छुआछूत, शोषण, मानसिक-सामाजिक प्रताड़ना और संस्थागत अन्याय के विरुद्ध आरक्षण एक सशक्त संवैधानिक सुरक्षा कवच है।

उन्होंने कहा कि जब तक समाज से जातिवादी सोच और व्यवहारिक भेदभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक आरक्षण की आवश्यकता व प्रासंगिकता बनी रहेगी। इसके साथ ही, उन्होंने अनुसूचित जातियों और जनजातियों के आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ (Creamy Layer) की अवधारणा को अनुचित एवं तर्कहीन बताते हुए कहा कि यह विचार बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित मानवतावादी संविधान के पवित्र और कल्याणकारी उद्देश्यों के प्रतिकूल है।

📜 “राजनीतिकरण का आरोप वास्तविकता से परे, आरक्षण संविधान की मूल आत्मा से जुड़ा”

मायावती ने संघ प्रमुख के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि आरक्षण पर राजनीति करने का आरोप लगाना पूरी तरह से वास्तविकता से परे है।

उन्होंने कहा कि आरक्षण संविधान की मूल भावना और सामाजिक न्याय (Social Justice) के सिद्धांतों से अटूट रूप से जुड़ा हुआ है। आरक्षण की बदौलत ही सदियों से वर्ण व्यवस्था और जातिवादी ढाँचे के शिकार रहे करोड़ों शोषित, पीड़ित, वंचित और उपेक्षित नागरिकों को समाज में समता और संवैधानिक अधिकार प्राप्त हो सके हैं।

🏛️ “आज भी समाज के हर क्षेत्र में मौजूद है जातिवाद का दंश”, न्यायपालिका से भी जताई अपेक्षा

बसपा प्रमुख ने कहा कि दुर्भाग्यवश आज भी हमारे समाज के हर छोटे-बड़े क्षेत्र में जातिवादी भेदभाव का दंश मौजूद है।

ऐसी स्थिति में आरक्षण को समाप्त करने या इसे शिथिल/कमजोर करने की कोई भी बात न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सहित अब तक की सभी सरकारों को आरक्षण की संवैधानिक अनिवार्यता को समझना चाहिए। वर्तमान सरकार को भी व्यावहारिक समीक्षा कर एससी-एसटी समाज को उनके अधिकारों से वंचित होने से बचाना चाहिए। मायावती ने न्यायपालिका से भी अपेक्षा व्यक्त की कि वह आरक्षण और सामाजिक न्याय के मामलों में संविधान की मूल भावना के अनुरूप निर्णय दे। उन्होंने चिंता जताई कि मजबूत कानूनी पैरवी के अभाव में प्रायः अदालतों से शोषित वर्गों को अपेक्षित न्याय नहीं मिल पाता।

🚩 संघ को मायावती की दो टूक नसीहत: “आरक्षण से छेड़छाड़ बंद करे RSS, समतामूलक समाज बनाने में दे सहयोग”

अपनी पोस्ट के अंत में मायावती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को प्रत्यक्ष नसीहत देते हुए लिखा, “RSS से यही कहना है कि वह बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी एवं कल्याणकारी संविधान को पूरा-पूरा आदर-सम्मान प्रदान करे। संघ आरक्षण के विषय पर राजनीति करना बंद करे और इसमें किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या संशोधन की वकालत बंद करे। देश में समतामूलक समाज व्यवस्था (Equalitarian Social Order) की स्थापना के संवैधानिक दायित्वों और उद्देश्यों की पूर्ति में पूर्ण सहयोग करे, यही समय की मांग और देशहित में है।”

उन्होंने संघ को परामर्श दिया कि आरक्षण को समाप्त करने या कमजोर करने के स्थान पर समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव को जड़ से समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

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