अंबिकापुर: शनिवार को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के एमसीएच में टॉयलेट गई महिला का प्रसव बाथरूम शीट में हो गया. महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया है इस बात की जानकारी भी महिला को नहीं लगी. महिला वॉश रूम से आने के बाद अपने बेड पर सो गई. करीब आधे घंटे के बाद महिला को लगा कि उसका पेट खाली हो गया है. इसके बाद महिला ने शोर मचाकर इस बात की जानकारी नर्सों और वहां मौजूद लोगों को दी. आनन फानन में अस्पताल के कर्मचारियों ने सफाई कर्मियों को मौके पर बुलाया. सफाई कर्मियों ने टॉयलेट शीट तोड़कर पाइप में फंसे बच्चे को बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला. बच्चे को फिलहाल मेडिकल कॉलेज में वेटींलेटर पर रखा गया है. बच्चे की निगरानी एक्सपर्ट डॉक्टरों के द्वारा की जा रही है.
टॉयलेट शीट में हुआ महिला का प्रसव: दरअसल सूरजपुर जिले के प्रतापपुर निवासी रामपति बाई 6-7 महीने की गर्भवती थी. 13 नवम्बर को महिला को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन प्रतापपुर सीएचसी लेकर आए. महिला की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे उपचार के लिए राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रेफर कर दिया गया. जिसके बाद महिला को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीन संचालित एमसीएच अस्पताल के एएमसी-2 वार्ड में भर्ती किया गया.
बच्चा प्री मेच्योर है. कभी कभी दबाव पड़ने पर इस तरह से बच्चा बाहर आ जाता है. प्रसूता खतरे से बाहर है जबकि बच्चे की हालत गंभीर है. बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया है और चिकित्सक उसकी निगरानी कर रहे है: डॉ. जेके रेलवानी, सहायक अधीक्षक और शिशु रोग विशेषज्ञ
वॉशरूम शीट तोड़कर बच्चे को निकाला गया: शनिवार की सुबह 10.30 बजे प्रसूता वॉश रूम के लिए गई. बाथरूम से आकर महिला अपने बेड पर सो गई. थोड़ी देर के बाद महिला की नींद खुली तो उसे अपना पेट हल्का महसूस हुआ. महिला ने चिल्लाकर अपने साथ हुई घटना की जानकारी सभी लोगों को दी. मौके पर पहुंची नर्सों ने तक्काल जाकर बाथरूम में चेक किया. तब पता चला कि महिला का प्रसव वॉश रूम में हो गया है.
सफाई कर्मियों ने बचाई बच्चे की: बाथरूम में महिला का प्रसव होने की खबर सफाई सुपरवाइजर आशीष साहू को मिली. इसके बाद वो अपने सफाईकर्मी हरि, राकेश, विनय और राजेश के साथ मौके पर पहुंचे और सुरक्षित तरीके से सेप्टिक सीट को तोड़ने का काम शुरू किया. लगभग आधे घंटे की मशक्कत के बाद सेप्टिक सीट को तोड़ा गया. इस दौरान बच्चा सीट में बने पाइप में फंसा रहा. सफाईकर्मियों ने बच्चे को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने के साथ ही उसकी साफ सफाई कर चिकित्सकों को सौंप दिया. इस पूरी घटना के दौरान लगभग एक घंटे तक बच्चा सेप्टिक सीट में फंसा रहा. इस दौरान बच्चे की सांस चल रही थी. फिलहाल बच्चे को अस्पताल के एसएनसीयू के वेंटिलेटर पर रखा गया है और उसका उपचार जारी है.
सरगुजा में इस तरह का पहला मामला: बाथरूम में किसी महिला के प्रसव का सरगुजा में यह पहला मामला है. प्रसूता रामपति बाई का पहले से एक बच्चा है. चिकित्सकों का कहना है कि बच्चा प्री मेच्योर है और कभी कभी बैठने पर पेट में दबाव पड़ने से बच्चा बाहर आ जाता है. मेडिकल कालेज अस्पताल के सहायक अधीक्षक और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जेके रेलवानी ने बताया कि बच्चा प्री मेच्योर है. कभी कभी दबाव पड़ने पर इस तरह से बच्चा बाहर आ जाता है. प्रसूता खतरे से बाहर है जबकि बच्चे की हालत गंभीर है. बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया है और चिकित्सक उसकी निगरानी कर रहे है.
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