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डॉ. शाहीन का ‘विदेश’ प्लान! पूर्व पति ने किया खुलासा- ‘वह मुझे विदेश में शिफ्ट होने के लिए कहती थी’, ब्लास्ट की साजिश पर सामने आया नया एंगल

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उत्तर प्रदेश के कानपुर मेडिकल कॉलेज के बंगला नंबर 27 में रहने वाली डॉक्टर शाहीन के पहले पति डॉ जफर हयात , उसके साथ 9 साल रही. शाहीन के बारे में यह खबर सुनकर वह खुद सदमे में है. उन्होंने बताया उनके 9 साल अच्छे से गुजरे तब ऐसा कुछ नहीं उन्हें महसूस हुआ. वह अक्सर उनसे विदेश में शिफ्ट होने की बात करती थी. तलाक के बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ. ना ही उन्होंने कभी बच्चों से संपर्क किया. उन्होंने बताया उनकी अरेंज मैरिज हुई थी.

डॉ शाहीन सईद और डॉ परवेज़ अंसारी का बचपन लखनऊ कंधारी बाज़ार मोहल्ले में बीता, आज लोग हैरान कि पढ़े लिखे डॉक्टर बने लोग आतंकी नेटवर्क के लिये काम कर सकते हैं.

मस्ज़िद के इमाम और पड़ोसी से बातचीत

मस्ज़िद के इमाम ने बातचीत में बताया कि परिवार बहुत नेक है. सईद इमाम खुद हेल्थ डिपार्टमेंट से रिटायर्ड अधिकारी हैं. बच्चों को पढ़ाया लिखाया और डॉक्टर बनाया. हम सब ये जान कर हैरान हैं कि ये ऐसा कर सकते हैं. सईद अंसारी अपने बड़े बेटे के साथ रहते हैं. परवेज़ और शाहीन कई साल से इनके साथ नहीं रहते हैं और कभी कभी फ़ोन पर ही बात होती होगी.

वहीं एक और पड़ोसी कहते हैं कि उनके लिये देश सबसे पहले है. वो इस घटना से हैरान हैं. उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि डॉक्टर भाई बहन आतंकी संगठन से जुड़े हो सकते हैं. बहुत पहले परवेज़ और शाहीन को देखा था. ये कई साल से साथ नहीं दिखे और डॉक्टर बनने के बाद परिवार से अलग ही रहते थे.

शाहीन और परवेज़ के एक और पड़ोसी फ़ारुख से बातचीत

पड़ोसी फारुख ने बताया कि परवेज़ से कुछ दिन पहले भी बात हुई थी जिसमें उन्हें दिखाने के लिए ह्वाट्सऐप पर रिपोर्ट भेजी थी. उन्होंने कहा कि व्यवहार अच्छा था. हमें इस बात का कोई इल्म नहीं था कि ऐसा कुछ हो सकता है. सभी इस्लामिया कॉलेज से शुरुआती पढ़ाई किये हैं. फ़ारूख़ ने भी वहीं से पढ़ाई की थी.

शाहीन के भाई शोएब ने क्या कहा?

शाहीन के भाई ने कहा कि मैं नहीं मानता मेरे भाई बहन ऐसा कर सकते हैं. उन पर आरोप लगाया जा रहा है. उन्हें फंसाया जा रहा है. चार साल पहले शाहीन से बात हुई थी, तीन साल पहले परवेज़ से आख़िरी बात हुई थी. बड़ा भाई शोएब अंसारी होम ट्यूशन देने का काम करता है. उन्होंने कहा कि मीडिया से ही जानकारी मिली है. जितना भी पता है. भाई बहन का कंधारी बाज़ार आना-जाना भी नहीं था.

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