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गुमनाम चिट्ठी, हिस्से का झगड़ा और 2 साल में 36 करोड़ की वसूली, किस्सा ए थाना नरही

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उत्तर प्रदेश में बलिया जिले के नरही थाने में भ्रष्टाचार का किस्सा खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा. 10 दिन पहले ट्रक वालों से रोजाना पांच लाख की वसूली से चर्चा में आया यह नरही थाना करीब 10 साल पहले से विवादित रहा है. हालांकि बीते दो साल पहले दरोगा से इंस्पेक्टर बनकर यहां पोस्टिंग पाने वाले पन्नेलाल ने भ्रष्टाचार की नई इबारत लिखने का काम किया है. इस थाने में उत्पीड़न और वसूली का मामला कई बार विधानसभा में सवाल भी बना है.

एडीजी और डीआईजी की संयुक्त रेड में वसूली करते हुए रंगे हाथ पकड़े गए इंस्पेक्टर पन्नेलाल की इस थाने में दो साल पहले पोस्टिंग करते हुए तत्कालीन एसपी ने बड़े बड़े दावे किए थे. उन्होंने कहा था कि इंस्पेक्टर पन्नेलाल नरही थाना क्षेत्र में क्राइम कंट्रोल करने के साथ व्यवस्था में सुधार का काम करेंगे.यह अलग बात है कि इंस्पेक्टर पन्नेलाल ने यहां ज्वाइन करने के बाद कभी क्राइम कंट्रोल करने की सोची ही नहीं. बल्कि उन्होंने तो इस कोतवाली का चार्ज लेने के दरोगाओं के साथ पहली मीटिंग में ही मलाईदार चौकियों का पता पूछ लिया था.

पहली मीटिंग में पूछा था मलाईदार चौकी का पता

उसी दिन उन्हें पता चला कि मलाईदार चौकी तो कोरंटाडीह है, इसलिए बाकी चौकियों की जिम्मेदारी संबंधित चौकी प्रभारियों पर छोड़ी और खुद कोरंटाडीह पर फोकस कर लिया था. उस समय तक कोरंटाडीह चौकी से गुजरने वाले ट्रकों से 300 रुपये वसूले जाते थे. इंस्पेक्टर पन्नेलाल ने पहला काम इस रकम को बढ़ा कर 500 रुपये कर दिया. तब से आज तक इस चौकी क्षेत्र के दोनों पॉइंट से गुजरने वाले हरेक ट्रक चालक से 500 रुपये की वसूली होती आ रही है.

एसपी और एडिशनल एसपी में हुआ झगड़ा

पुलिस सूत्रों के मुताबिक उस समय तक नरही थाने से तीन अधिकारियों को चढ़ावा जाता था, लेकिन पन्नेलाल ने एक अधिकारी का चढ़ावा काट दिया, वहीं दूसरे बड़े अधिकारी चढ़ावा डबल कर दिया था. बलिया के बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कहते हैं इस बात को लेकर उस समय बलिया के एसपी और एडीशनल एसपी के बीच जमकर झगड़ा हुआ था और इसी मामले में एक गुमनाम चिट्ठी भी लिखवाई गई थी. बलिया पुलिस के सूत्रों के मुताबिक जिस अधिकारी चढ़ावा इंस्पेक्टर पन्नेलाल ने काट दिया था, वह भी एक PPS अधिकारी था और चुप बैठने वाला अफसर नहीं था.

गुमनाम चिट्ठी से मचा था बवाल

उसी पीपीएस अफसर ने बैरिया और चितबड़ा गांव के अलग अलग लोगों ने मुख्य सचिव और डीजीपी के नाम गुमनाम चिट्ठी लिखवाई और डाक से भिजवा दिया. इसी तरह की एक चिट्ठी सीएम योगी आदित्यनाथ को भी भेजी गई थी. इसी चिट्ठी की वजह से काफी बवाल भी मचा. हालांकि इस मामले को इंस्पेक्टर पन्नेलाल ने ना केवल अच्छे से मैनेज कर लिया, बल्कि ताबड़तोड़ दबिश देकर बालू के करीब ढाई सौ ट्रक और ट्रैक्टर ट्रॉली जब्त कर लिए थे. यही नहीं, इंस्पेक्टर पन्ने लाल ने यहां हो रही वसूली को प्रमाणित कराते हुए इसके लिए उसी अफसर को जिम्मेदार बता दिया था, जिसने शिकायत कराई थी.

इस तरह होती थी वसूली

उस समय आरोप लगा था कि वही अफसर अपने दोस्त के साथ मिलकर वसूली कर रहे थे. चूंकि इंस्पेक्टर के सिर पर कप्तान का हाथ था, इसलिए बात भी सहज ही सुन ली गई और शासन को रिपोर्ट भी भेज दी गई. परिणाम स्वरुप राज्य सरकार ने उस अफसर को सस्पेंड कर दिया था. बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंहके मुताबिक शासन को भेजी गई गुमनाम चिट्ठी में बताया गया था कि बलिया के मलाईदार थानों में कैसे वसूली होती है. इसमें थानों की आय का सबसे बड़ा माध्यम अवैध शराब बताया गया था. बताया गया था बिहार में शराब बंदी के बाद से बैरिया और नरही से शराब की तस्करी काफी बढ़ गई थी.

18 करोड़ प्रति साल का है खेल

इसके बाद दूसरे स्थान पर गो तस्करी और तीसरे स्थान पर लाल और सफेद बालू का खनन और तस्करी को दिया गया था. गुमनाम चिट्ठी में तस्करी का तरीका और इससे थानों की होने वाली कमाई का विधिवत जिक्र था. जैसे ही यह चिट्ठी को शासन को मिली, महकमे में हड़कंप मच गया था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक दो साल पहले तक नरही थाने से 14 से 15 करोड़ रुपये तक वसूली होती थी, लेकिन पन्नेलाल ने यहां ज्वाइन करने के साथ ही इस थाने की अहमियत बढ़ा दी.

डायरी में दर्ज होता है वसूली का रिकार्ड

वह पांच लाख रुपये प्रतिदिन केवल ट्रकों से और करीब ढाई से तीन लाख रुपये अन्य तरीकों से वसूली करने लगे.अन्य त रीकों से वसूली के दस्तावेज तो अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं, लेकिन पांच लाख रुपये प्रतिदिन वसूली के दस्तावेज एक डायरी के रूप में पुलिस ने जब्त किए हैं. इस डायरी के रिकार्ड के मुताबिक इंस्पेक्टर पन्नेलाल ने 18 करोड़ रुपये सालाना इस थाने से कमाई की है और दो साल में 36 करोड़ रुपये से अधिक के वारे न्यारे कर दिए हैं.

दस दिन पहले हुई थी रेड

बलिया के नरही थाने में 10 दिन पहले डीआईजी रेंज आजमगढ़ वैभव कृष्ण और एडीजी रेंज वाराणसी पीयूष मोर्डिया की संयुक्त रेड हुई थी. इस दौरान इस थाना क्षेत्र के दो पॉइंट पर पुलिस की मौजूदगी में ट्रक चालकों से वसूली होती पकड़ी गई. उस समय डीआईजी की टीम मौके से दो पुलिस कर्मियों और 16 दलालों को रंगे हाथ पकड़ा था. वहीं जब यह टीम थाने पहुंची तो इंस्पेक्टर पन्नेलाल वसूली के पैसे का हिसाब लगाते देखे गए. उन्हें जैसे ही खबर मिली कि रेड हुई तो वह एक छलांग में 7 फीट ऊंची चाहरदीवारी लांघ कर फरार हो गए थे. हालांकि बाद में एसओजी ने उनके घर में दबिश देकर उन्हें भी अरेस्ट कर लिया.

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