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प्रैक्टिकल वाला होमवर्क करने के लिए खेत में काम करेंगे छात्र, मालिक किसानों को हर वर्ष मिलेगा पैसा

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मध्य प्रदेश में अब बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने वाले छात्र खेतों में प्रैक्टिकल कर सकेंगे. प्रदेश के 20 कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र ऐसा कर पाएंगे. राज्य में 17 जिलों के 20 कॉलेजों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बीएससी एग्रीकल्चर कोर्स की पढ़ाई शुरू की गई है. इंदौर, राज्य की राजधानी भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रीवा समेत 17 जिलों के 20 कॉलेजो में बीएससी एग्रीकल्चर कोर्स शुरू किया गया है.

इन्हीं कॉलेजों के छात्र खेतों में कृषि का प्रैक्टिकल कर सकेंगे. उच्च शिक्षा विभाग छात्रों को खेती की जमीन उपलब्ध कराएगा. इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग किसानों के साथ एमओयू साइन करेगा. ये एमओयू तीन साल का होगा. इसमें किसानों को साल के 10 हजार रुपये दिए जाएंगे. कॉलेजों को समझौता करने का प्रस्ताव दिया गया है. इसी के तहत अब कॉलेज किसानों से बातचीत कर एमओयू साइन करेंगे.

इस पहल का क्या है मकसद?

कॉलेजों को 30 सितंबर तक की डेडलाइन एमओयू साइन करने के लिए दी गई है. उच्च शिक्षा विभाग की ओर से की गई इस पहल का उद्देश्य ये है कि छात्र खेती के गुण सीख सकें. खेती की जमीन पर कोर्स से जुड़े प्रैक्टिकल करके छात्र फसल की बारीकियों के बारे में जान सकेंगे. छात्रों के साथ किसान अपना अनुभव साझा करेंगे.

किसान छात्रों को सिखाएंगे खेती

किसान छात्रों को फसल बोने, मिट्टी, जैविक खाद बनाने, कीटनाशक का उपयोग और बीज आदि के बारे में व्यवहारिक रुप से बताएंगे. कृषि वैज्ञानिक प्रयोग और परीक्षण की योजना तैयार करेंगे. अगर शिक्षा विभाग का ये प्रयोग सफल हो जाता है, तो खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर समेत अन्य जिलों के एक-एक कॉलेजों में भी बीएससी एग्रीकल्चर कोर्स शुरू किया जाएगा.

इन कॉलेजों में बीएससी एग्रीकल्चर पढ़ाने के लिए तीन-तीन अथिति शिक्षकों की भी की नियुक्ति की जाएगी. इसका प्रोसेस शुरू किया जा चुका है.

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