नेपाल में सिर्फ दो दिन चले युवाओं के आंदोलन ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया. नेपाल में इस हफ्ते जो भी देखने को मिला, इसका असर सिर्फ नेपाल की राजनीति तक ही सीमित नहीं है. इसका असर पूरी एशियाई राजनीति पर पड़ा है क्योंकि ओली को चीन का सबसे बड़ा करीबी माना जाता था.
उनके हटने से यह माना जा रहा है कि अमेरिका ने एक बड़ा गेम खेला है और चीन को सीधे-सीधे झटका दिया है. नेपाल हमेशा से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाकर चलता आया है. लेकिन ओली के कार्यकाल में नेपाल का झुकाव चीन की ओर ज्यादा दिखने लगा था. उन्होंने बीजिंग की “बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव” को बढ़ावा दिया, यहां तक कि चीन की विजय दिवस परेड में भी शामिल हुए. यह सब अमेरिका को खटक रहा था.
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