लुधियाना: ट्रांसपोर्ट विभाग की सुस्त और लापरवाह कार्यप्रणाली के कारण हजारों लोग भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। दिसम्बर 2024 से लगातार वाहन चालकों को न तो रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट मिल रहा है और न ही ड्राइविंग लाइसैंस। यह समस्या पूरे राज्य में फैली हुई है लेकिन लुधियाना जैसे प्रमुख शहरों में हालात और भी ज्यादा चिंताजनक बने हुए हैं। जानकारी के मुताबिक मार्च महीने में पंजाब के ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत भुल्लर द्वारा इस समस्या को लेकर विधानसभा में आश्वासन दिया गया था कि अप्रैल 2025 तक आर.सी. और डी.एल. संबंधी अड़चनों का समाधान कर दिया जाएगा। स्थानीय विधायक मदन लाल बग्गा ने बताया था कि इस प्रोजैक्ट पर लगभग 75 लाख रुपए खर्च किए जाने की योजना है लेकिन अप्रैल बीतने के बाद भी हालात जस के तस हैं। जनता अब तक इंतजार कर रही है लेकिन विभाग के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
डिजिटल सिस्टम भी बना मुसीबत
15 मई से एक नई समस्या खड़ी हो गई है। अगर कोई आवेदक आर.सी. या डी.एल. के लिए ऑनलाइन टैक्स भरने की कोशिश करता है तो वह एस.बी.आई. बैंक की वैबसाइट पर पहुंचते ही फंस जाता है। वैबसाइट या तो खुलती नहीं या फिर ट्रांजैक्शन प्रोसैस के बीच में रुक जाती है। इसके पीछे आई.एफ.एम.एस. और एस.बी.आई. सर्वर के बीच चल रही तकनीकी दिक्कतों को जिम्मेदार माना जा रहा है। इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ रहा है जो अपने जरूरी दस्तावेज़ों को बनवाने के लिए हर रोज सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।
जनता भुगत रही ट्रैफिक चालानों की मार
आर.सी. और डी.एल. न मिलने की वजह से सड़कों पर चल रहे वाहन चालकों को ट्रैफिक पुलिस की चालान कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। लोग मजबूरी में बिना दस्तावेजों के वाहन चला रहे हैं, क्योंकि उन्होंने आवेदन तो समय पर कर दिया था लेकिन अब तक उन्हें दस्तावेज़ नहीं मिले।
विधानसभा में उठ चुका है मुद्दा, लेकिन समाधान नहीं
विधायक बग्गा ने यह मुद्दा करीब दो महीने पहले पंजाब विधानसभा सत्र में भी उठाया था और मंडी क्षेत्र के विकास के साथ-साथ आर.सी.-डी.एल. संकट की तरफ ध्यान दिलाया था। अप्रैल के पहले हफ्ते में कुछ समय के लिए आरसी-डीएल की प्रिंटिंग दोबारा शुरू भी हुई थी लेकिन अब एक महीने से यह काम फिर से बंद पड़ा है।
आखिर कब जागेगा ट्रांसपोर्ट विभाग?
लोगों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट विभाग ‘कुंभकर्णी नींद’ में सोया हुआ है और उसे जनता की तकलीफों की कोई फिक्र नहीं। रोजाना हजारों लोग इन समस्याओं को लेकर दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। ऐसे में अब देखना यह है कि विभाग इन गंभीर समस्याओं को हल करने के लिए आखिर कब ठोस कदम उठाता है। यह संकट सिर्फ ट्रांसपोर्ट व्यवस्था का नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता और टैक्नोलॉजी की असफलता का प्रतीक बन चुका है। अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकाला गया तो यह समस्या एक बड़े प्रशासनिक विवाद का रूप ले सकती है।
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