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इजराइल और अमेरिका के सामने क्यों नहीं झुकता ईरान, समझिए

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जिस जंग की आशंका हफ्तों से जताई जा रही थी, आखिरकार वो हकीकत बन गई. शुक्रवार सुबह इजराइली फाइटर जेट्स ने ईरान पर सीधा हमला कर दिया. इजराइल के डिफेंस मिनिस्टर योआव गैलंट ने खुद इसकी पुष्टि की है. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इजराइली हमले में तेहरान के आसपास के कम से कम 6 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया.

ईरान की सरकारी मीडिया ने भी हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि इसमें IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के कमांडर हुसैन सलामी मारे गए हैं. यही नहीं रिपोर्ट है कि इस हमले में ईरान के दो सीनियर परमाणु वैज्ञानिक मोहम्मद मेहदी तेहरांची और फेरेदून अब्बासी की भी मौत हो चुकी है. कल ईरान ने भी दो टूक कहा था कि अगर हमला हुआ तो जवाब इतना जोरदार होगा कि न्यूयॉर्क तक इसका असर महसूस होगा. तो क्या ईरान जंग का बदला जंग से देगा और बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका और इजराइल जैसी सुपरपावर के सामने ईरान क्या वाकई टिक सकता है?

ईरान की 5 छुपी ताकतें, जो किसी को भी डरा सकती हैं

ईरान की ताकत सिर्फ टैंकों या प्लेनों में नहीं है, बल्कि उसकी रणनीति, नेटवर्क और भूगोल भी उसे एक ख़तरनाक खिलाड़ी बनाते हैं. आइए समझते हैं कि क्यों मिडिल ईस्ट की कई ताकतें ईरान से खौफ खाती हैं.

1. हजारों मिसाइलें और ड्रोन: ईरान के पास हजारों की संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन हैं. इतनी ज्यादा तादाद में हैं कि अगर एकसाथ छोड़े जाएं, तो दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम भी घुटने टेक दें.

2. IRGC यानी ‘राजनीतिक सेना’: IRGC कोई आम फौज नहीं है। इसके पास अपनी नेवी, एयरफोर्स, इंटेलिजेंस नेटवर्क है। यह सिर्फ लड़ती नहीं, बल्कि राजनीति और इकॉनमी में भी दखल रखती है।

3. ‘दुनिया भर में बैठे पिट्ठू’: ईरान के पास सीरिया, इराक, यमन और लेबनान जैसे देशों में प्रॉक्सी मिलिशिया हैं, जिनके जरिए वो सीधे जंग में कूदे बिना हमला कर सकता है. जैसे 2019 में सऊदी अरब की तेल फैक्ट्रियों पर हमला हुआ था.

4. होरमुज पर कंट्रोल: ईरान की सबसे बड़ी स्ट्रैटेजिक बढ़त है होरमुज जलडमरूमध्य. यहां से दुनिया का करीब 30% तेल गुजरता है. अगर ईरान इसे बंद कर दे, तो तेल की सप्लाई ठप और पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर.

5. रूस-चीन की दोस्ती: ईरान ने चीन से 25 साल का रक्षा समझौता कर रखा है. वहीं रूस से उसे S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और एडवांस रडार मिल रहे हैं. यानी अकेला नहीं है ईरान.

अमेरिका बनाम ईरान: ताकत की तुलना

मिलिट्री ताकत के मामले में अमेरिका और ईरान के बीच जमीन-आसमान का फर्क है, अमेरिका का रक्षा बजट लगभग 690 अरब डॉलर है, जबकि ईरान का रक्षा बजट मात्र 6.2 अरब डॉलर है. यानी अमेरिका का रक्षा बजट ईरान के मुकाबले 100 गुना से भी ज्यादा है. अगर सैनिकों की संख्या की बात करें तो अमेरिका के पास 21 लाख से ज्यादा सैनिक हैं, जबकि ईरान के पास मात्र 8.73 लाख सैनिक हैं.

अमेरिका के पास 13,398 सैन्य विमान हैं, जबकि ईरान के पास केवल 509 हैं. टैंकों की संख्या भी अमेरिका के पक्ष में है, जहां अमेरिका के पास 6,287 टैंक है वहीं ईरान के पास महज 1,634 टैंक. अमेरिका के पास 4,018 परमाणु मिसाइलें हैं, जबकि ईरान के पास एक भी नहीं. अमेरिका के पास 24 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जबकि ईरान के पास एक भी नहीं. इस तुलनात्मक आंकड़े से साफ है कि सैन्य ताकत के मामले में ईरान, अमेरिका के सामने कहीं नहीं टिकता.साफ है, अमेरिका से तुलना में ईरान बहुत पीछे है. लेकिन फिर भी अमेरिका उससे डरता क्यों है?

वो ताकत जो आंकड़ों में नहीं दिखती

कुदरती खजाना: ईरान के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार है और चौथा सबसे बड़ा तेल भंडार. इसके अलावा तांबा, जिंक और लोहा भी बड़ी मात्रा में है. जंग हुई तो इनकी सप्लाई पर असर होगा, दुनिया की इकॉनमी हिलेगी.

भौगोलिक पकड़: होरमुज की वजह से ईरान को ‘तेल का ट्रैफिक कंट्रोलर’ माना जाता है. वहां से हर रोज लाखों बैरल तेल गुजरता है. ईरान चाहे तो सब बंद करा सकता है.

स्मार्ट वॉर का खिलाड़ी: ईरान सीधे जंग नहीं लड़ता, वो साइबर अटैक, ड्रोन स्ट्राइक और प्रॉक्सी वॉर में माहिर है. अमेरिका भी अब सीधे युद्ध से बचता है और यही गेम अब दोनों के बीच चल रहा है.

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