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पंजाब का ऐसा गांव जहां अब तक कभी नहीं बिकी शराब, जानें क्यों

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गांव खुड्डा अलीशेर में आजादी से लेकर आज तक कभी शराब का ठेका नहीं खुला। पहली बार यहां ठेका खोलने का फैसला किया गया तो लोगों के विरोध के आगे झुकते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने आखिरकार यहां से ठेका हटा दिया। पूर्व सरपंच बाबा गुरदयाल सिंह, यूथ क्लब अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उनके गांव खुड्डा अलीशेर में आज तक कोई शराब का ठेका नहीं खुला है। पहली बार यहां चुपचाप ऐसा करने की कोशिश की गई पर लोगों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया, जिसके बाद यह फैसला वापस ले लिया गया है।

जिस ठेके को खोलने का फैसला किया गया वह एक सरकारी और दो अन्य निजी स्कूलों से थोड़ी दूरी पर है। वार्ड नंबर एक के पार्षद गुरचरण सिंह और जसविंदर कौर के नेतृत्व में भारी विरोध के बाद प्रशासन को इसे बंद करना पड़ा। पूर्व पंच कुलविंदर कौर, जगपाल सिंह जग्गा, सिमरनजीत सिंह, अवतार सिंह सहित ग्रामीणों ने कहा कि इस ठेके से गांव के सामाजिक माहौल विशेषकर स्कूली बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। स्थानीय पूर्व सरपंच दयाल सिंह ने बताया कि शराब की दुकान के तीन तरफ एक सरकारी स्कूल और दो निजी स्कूल हैं, जिनकी दूरी 40 मीटर से भी कम है। उन्होंने प्रशासन से भविष्य में यहां कोई भी शराब की दुकान न खोलने का पुरजोर आग्रह किया। गांव की महिलाओं और युवाओं ने भी इस फैसले का कड़ा विरोध किया और ठेका हटाने की मांग की।

पंजाब सरकार ने महज 52 दिन पहले ही ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान शुरू किया है, लेकिन कुछ गांवों ने आपसी एकजुटता दिखाते हुए पहले ही शराब के खिलाफ भी ऐसा ही अभियान शुरू कर रखा है। खुड्डा अलीशेर से कुछ दूरी पर स्थित मोहाली जिले के पड़छ गांव में भी कभी शराब का ठेका नहीं खुलने दिया गया। यहां 10 साल पहले एक बार शराब की दुकान खोली गई थी, लेकिन गांव की महिलाओं और ग्रामीणों ने उसे बंद करवा दिया था। ग्रामीण गीता देवी और पूर्व सरपंच सुरजीत सिंह ने कहा कि उसके बाद उन्होंने इस गांव में कभी भी शराब की दुकान नहीं खुलने दी और भविष्य में भी नहीं खुलने देंगे। उन्होंने सख्त फैसला इसलिए लिया ताकि गांव के लोग शराब से दूर रहें और अपना स्वास्थ्य और पैसा बर्बाद न करें।

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