Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Madhya Pradesh Politics: एमपी भाजपा संगठन में फेरबदल; सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवा... Madhya Pradesh IPS Association: 'नेता रखें संयमित आचरण'; सज्जन सिंह वर्मा की टिप्पणी के खिलाफ मैदान ... National Highway Standards: NHAI ने बदले हाईवे निर्माण के नियम; 1 मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल और ट्रैफिक ... Chhattisgarh News: मानसून की विदाई से पहले सीमेंट कंपनियों का झटका; ₹60 प्रति बोरी तक महंगे हुए दाम Delhi Voter List News: बेघरों और ट्रांसजेंडर्स के लिए विशेष शिविर, जानिए क्या है मतदाता सूची पुनरीक्... Delhi NCR Traffic Update: शाहीन बाग में बनेगा सिग्नल-फ्री यू-टर्न, कालकाजी-मोदी पुल निर्माण के चलते ... Bhiwani Fire News: बहल के मुख्य नाले में लगी भयंकर आग, स्थानीय लोगों और पुलिस ने संभाला मोर्चा Bhiwani Boxer Sakshi Chaudhary: एशियन गेम्स में बॉक्सर साक्षी चौधरी का शानदार प्रदर्शन, प्री-क्वार्ट... Raipur Crime News: आमापारा में विवाद के बाद पार्षद की कार पर हमला! CCTV फुटेज खंगाल रही कोतवाली पुलि... MP Railway Special Train: त्योहारी सीजन में रेलवे का तोहफा; महू-इंदौर-रीवा स्पेशल ट्रेन शुरू, 10 ट्र...

कोई 7 तो किसी ने 6 बार बदला पाला…अशोक तंवर नहीं, ये 3 नेता हैं हरियाणा के सबसे बड़े दलबदलू

44

राहुल गांधी के साथ मंच शेयर करने के बाद अशोक तंवर आधिकारिक तौर पर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. तंवर की कांग्रेस में ज्वॉइनिंग 2 वजहों से चर्चा में है. पहली वजह हरियाणा में मतदान से ठीक पहले तंवर ने कांग्रेस का दामन थामा है. चर्चा की दूसरी वजह तंवर का पार्टी बदलना है.

अशोक तंवर पिछले 5 साल में 4 बार पार्टी बदल चुके हैं और सोशल मीडिया में उन्हें लोग दलबदलू की उपाधि दे रहे हैं. हालांकि, हरियाणा की राजनीति में तंवर से पहले भी 3 ऐसा नेता रहे हैं, जिनके नाम दल बदल का रिकॉर्ड है. इनमें एक नेता तो 7 बार दल बदलने का काम कर चुके हैं.

इस स्टोरी में इन्हीं दलबदलुओं की कहानी डिटेल में जानते हैं…

अशोक तंवर ने 5 साल में 4 बार मारी पलटी

2019 में कांग्रेस छोड़ने के बाद अशोक तंवर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए. तंवर इसके बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में चले गए. तंवर इसके बाद कुछ दिनों के लिए खुद की पार्टी बना ली.

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले अशोक तंवर बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी ने उन्हें सिरसा से उम्मीदवार बनाया. तंवर सिरसा से बुरी तरह चुनाव हार गए. तंवर इसके बाद अब कांग्रेस में आ गए हैं.

अब उन 3 दलबदलुओं की कहानी जानिए

1. हीरानंद आर्य- देवीलाल सरकार में मंत्री रहे हीरानंद आर्य अपने राजनीतिक जीवन में 7 बार दल बदल के खेल में शामिल हुए. कांग्रेस से राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले हीरानंद 1980 के दशक में लोकदल और जनता पार्टी में रहे.

हीरानंद 1967 में पहली बार लोहारू सीट से विधायक चुने गए थे. 1967-68 में जब हरियाणा के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल की घटनाएं हुई, तो हीरानंद उस दौरान 5 बार एक-दूसरे के पाले में गए.

आर्य को चौधरी देवीलाल का करीबी माना जाता था. उन्हें देवीलाल ने शिक्षा मंत्री का भी पद दिया. हीरानंद के बाद उनकी सियासी विरासत पत्नी चंद्रवती और उनके बेटे सोमवीर को मिली.

2. गया लाल- 1967 में हसनपुर सीट से विधायक चुने गए चौधरी गया लाल ने एक ही दिन में 3 बार पाला बदला था. गया लाल के बेटे चौधरी उदयभान के मुताबिक 1967 में भगवत दयाल शर्मा की वजह से हसनपुर से पिताजी को टिकट नहीं मिला. वे निर्दलीय ही मैदान में उतर गए.

गया लाल स्थानीय समीकरण की वजह से जीतने में भी कामयाब रहे, लेकिन खेल चुनाव के परिणाम के बाद हुआ. कांग्रेस को अकेले दम पर बहुमत नहीं मिली. पार्टी ने निर्दलीय विधायकों से समर्थन मांगा. इसी बीच गया लाल ने देवीलाल को समर्थन दे दिया.

उदयभान के मुताबिक इसी बीच चौधरी चांद राम गया लाल के पास आए. चांद राम ने दावा किया कि कांग्रेस ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया है. चांद के साथ समझौते में गया लाल ने कांग्रेस को समर्थन देने का वादा कर दिया.

इसी बीच राव बीरेंद्र सिंह ने गया लाल से संपर्क साधा. गया बीरेंद्र के समर्थन में चले गए. इसी घटना से उनके नाम पर हरियाणा में आया राम, गया राम का मुहावरा बन गया.

बाद के सालों में भी गया लाल ने 2 बार पार्टी बदली. उदयभान अभी कांग्रेस में हैं और हरियाणा में पार्टी की कमान उनके पास है.

3. करतार सिंह भड़ाना- हरियाणा के पूर्व विधायक करतार सिंह भड़ाना भी 6 बार पार्टी बदल चुके हैं. करतार सबसे पहले 1996 में बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी के सिंबल से समलखा सीट से विधायक चुने गए. 1998 में करतार ने बगावत कर दी और 18 विधायकों के साथ इनेलो को समर्थन दे दिया.

2000 में करतार सिंह भड़ाना इनेलो की टिकट पर चुनाव जीतकर दूसरी बार सदन में पहुंचे. ओम प्रकाश चौटाला की सरकार में वे मंत्री बनाए गए. 2004 में लोकसभा चुनाव से पहले करतार बीजेपी में शामिल हो गए.

बीजेपी ने उन्हें राजस्थान की दौसा लोकसभा सीट से मैदान में उतारा, लेकिन करतार यहां जीत नहीं पाए. 2005 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में करतार सोहना सीट से बीजेपी के सिंबल पर उतरे, लेकिन इस बार भी उन्हें हार ही मिली.

2009 में करतार एनसीपी के सिंबल पर यूपी के बिजनौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े, लेकिन इस बार भी वे हार गए. 2012 में वे आरएलडी के टिकट पर खतौली से लड़े और जीतकर यूपी विधानसभा पहुंच गए.

2019 लोकसभा चुनाव से पहले करतार मायावती की पार्टी में आ गए. मायावती ने करतार को मुरैना भेज दिया. हालांकि, करतार यहां से जीत नहीं पाए. 2024 में करतार बीजेपी में आ गए.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.