Manendragarh Murder Case: चर्चित करण राठौर हत्याकांड में अदालत का बड़ा फैसला, 7 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा
मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में चर्चित रहे करण राठौर हत्याकांड मामले में अदालत ने एक अहम और कड़ा फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायालय मनेंद्रगढ़ के न्यायाधीश यशवंत वासनिकर ने इस सनसनीखेज प्रकरण की सुनवाई पूरी करते हुए कुल सात आरोपियों को दोषी करार दिया है और उन्हें आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा से दंडित किया है। इसके अलावा, बलवा के अपराध में संलिप्त पाए जाने पर इन सभी सातों दोषियों को दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और आर्थिक जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है। हालांकि, इस मामले में सह-आरोपी के रूप में नामजद प्रभात सोंधिया उर्फ रवि को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की एक विशिष्ट धारा के आरोप से संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया है।
5 सितंबर 2025 की रात हुई थी वारदात, स्टेशन रोड के पास दिया गया था खूनी संघर्ष को अंजाम
यह दर्दनाक घटना 5 सितंबर 2025 की रात करीब 10 से 10:30 बजे के बीच मनेंद्रगढ़ के बताशा लाइन इलाके में स्थित हनुमान मंदिर के सामने वाली गली में घटित हुई थी। घटना के वक्त मृतक करण राठौर अपने दोस्त रोहित चंदेल के साथ स्टेशन रोड पर मौजूद था। आरोप के मुताबिक, कुछ परिचित युवक करण को बातचीत के बहाने एक सुनसान गली में ले गए, जहां आपसी विवाद के दौरान उस पर तेजधार चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया। इस गंभीर हमले में बुरी तरह लहूलुहान हुए करण को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस जघन्य हत्याकांड के सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था, और पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए महज 24 घंटे के भीतर दो नाबालिगों सहित कुल 9 आरोपियों को धर दबोचा था।
अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद कोर्ट ने तय किए दोषी
पुलिस द्वारा अपनी विस्तृत जांच पूरी करने के बाद आरोपियों के विरुद्ध अदालत में चालान (अभियोग पत्र) प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए तमाम साक्ष्यों, चश्मदीद बयानों और वैज्ञानिक दस्तावेजों का बेहद बारीकी से परीक्षण किया गया। तमाम कानूनी प्रक्रियाओं और ट्रायल के बाद अदालत ने सात आरोपियों—रितिक मिश्रा, सचिन जैन, राशिद खान, अमन केंवट उर्फ बुटई, भावेश पाटिल, रौनिल मिश्रा उर्फ कुक्कू और मोहम्मद अकरम उर्फ अक्कू—को हत्या और बलवा जैसे गंभीर अपराधों में पूरी तरह संलिप्त और दोषसिद्ध पाया।
हत्या के मामले में उम्रकैद और बलवा में दो साल की सजा, एक आरोपी को मिला संदेह का लाभ
न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सातों दोषियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(3) के अंतर्गत बलवा फैलाने के जुर्म में दो-दो वर्ष का सश्रम कारावास और 500-500 रुपये का अर्थदंड भुगतना होगा। वहीं, धारा 103(1) सहपठित धारा 191 के तहत हत्या के अपराध के लिए इन्हें आजीवन कारावास की सजा और प्रत्येक दोषी पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने आदेश दिया है कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी, और जुर्माना राशि न चुकाने की स्थिति में अतिरिक्त सश्रम कारावास का प्रावधान रहेगा। दूसरी ओर, आरोपी प्रभात सोंधिया उर्फ रवि के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को अभियोजन पक्ष पुख्ता तौर पर साबित नहीं कर सका, जिसके चलते उसे अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
दोषियों पर लगाए गए अर्थदंड से मृतक के माता-पिता को प्रदान किया जाएगा प्रतिकर (मुआवजा)
न्यायालय द्वारा सभी दोषसिद्ध आरोपियों पर कुल 10,500 रुपये का कुल अर्थदंड अधिरोपित किया गया है। अदालत के आधिकारिक आदेश के अनुसार, जब यह अर्थदंड की राशि जमा हो जाएगी, तब उसमें से 10,000 रुपये की राशि मृतक करण राठौर के माता अथवा पिता को प्रतिकर (मुआवजे) के रूप में प्रदान की जाएगी, जबकि शेष 500 रुपये की राशि शासन के आधिकारिक खाते में जमा कराई जाएगी।
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