इजराइल की राजनीति में बड़ा उलटफेर, राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने विपक्षी नेता आइसेनकोट को सौंपा सरकार बनाने का मौका
यरूशलम: इजराइल की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां एक बड़े राजनीतिक उलटफेर के तहत राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने हालिया त्रिशंकु चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी नेता और पूर्व सैन्य प्रमुख आइसेनकोट को सरकार गठन का पहला मौका सौंप दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे आइसेनकोट को अब देश में नया गठबंधन तैयार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल गई है। इस कदम के साथ ही, इजराइल में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री के पद पर काबिज रहे बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है।
गठबंधन बनाने के लिए आइसेनकोट को मिला 6 हफ्ते का समय, देश के सामने राजनीतिक अस्थिरता और युद्ध के बीच बड़ी चुनौती
नस्ल, विचारधारा और आंतरिक मतभेदों से जूझ रहे इजराइल में गठबंधन सरकार का गठन करना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं है। विशेषकर तब जब 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमलों के बाद से गाजा पट्टी और अन्य क्षेत्रों में पिछले तीन वर्षों से लगातार युद्ध की स्थिति बनी हुई है। इन तमाम गंभीर चुनौतियों के बीच नवनियुक्त नेता आइसेनकोट के पास सफलतापूर्वक गठबंधन तैयार करने के लिए अधिकतम छह सप्ताह का समय निर्धारित किया गया है।
संसद में बहुमत का आंकड़ा जुटाना अब भी है टेढ़ी खीर, अरब पार्टियों की भूमिका बन सकती है ‘किंगमेकर’
हाल ही में संपन्न हुए चुनावों के बाद राष्ट्रपति के साथ हुई आधिकारिक बैठकों में देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों ने आइसेनकोट को नई सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपने का पुरजोर सुझाव दिया था। हालांकि, संसद (नेसेट) में बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल करना अभी भी एक बेहद कठिन कार्य बना हुआ है। चुनाव परिणामों में न तो नेतन्याहू और उनके सहयोगियों को स्पष्ट बहुमत मिला और न ही आइसेनकोट के नेतृत्व वाले गुट को जादुई आंकड़ा हाथ लगा। इस त्रिशंकु स्थिति में अरब पार्टियों ने एक ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है, जिसके चलते वे अब इस पूरी राजनीतिक बिसात पर ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती हैं, हालांकि यह गठजोड़ राजनीतिक रूप से अत्यंत जटिल माना जा रहा है।
नेतन्याहू द्वारा राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की जोरदार अपील, अरब दलों के साथ गठबंधन पर जताया कड़ा विरोध
इजराइल के संसदीय इतिहास में अब तक केवल एक बार ही किसी अरब पार्टी को गठबंधन सरकार का औपचारिक हिस्सा बनने का अवसर मिला है। गाजा में पिछले तीन साल से अधिक समय से चल रहे विनाशकारी युद्ध के बाद इस प्रकार का कोई भी राजनीतिक गठबंधन आइसेनकोट के लिए भारी विवादों को जन्म दे सकता है। दूसरी ओर, कार्यवाहक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आइसेनकोट और अरब-नेतृत्व वाले दलों के बीच किसी भी संभावित समझौते को रोकने के लिए एक आक्रामक अभियान छेड़ रखा है। राष्ट्रपति हर्जोग द्वारा घोषणा किए जाने से ठीक पहले, नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश जारी कर देश में एक मजबूत ‘राष्ट्रीय एकता सरकार’ के गठन की जोरदार अपील की थी।
आतंकवाद के समर्थन का आरोप लगाकर नेतन्याहू ने साधा निशाना, आइसेनकोट ने रखीं कुछ सख्त शर्तें
नेतन्याहू ने अपनी चेतावनी में कहा कि आतंकवादियों का परोक्ष रूप से समर्थन करने वाले दलों के साथ जल्दबाजी में किसी भी सूरत में सरकार का शपथ ग्रहण समारोह नहीं होना चाहिए— वे अक्सर अरब मूल के राजनीतिक दलों के लिए इसी प्रकार की आक्रामक शब्दावली का प्रयोग करते आए हैं। नेतन्याहू और उनके सहयोगी लगातार इन दलों को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते रहे हैं। इसके विपरीत, आइसेनकोट ने कुछ स्पष्ट और कठोर शर्तों के साथ ही इन दलों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा प्रकट की है, जिसमें हमास को एक खतरनाक आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता देना और उसका पूरी तरह खात्मा करना जैसी मुख्य बातें शामिल हैं।
विभिन्न दलों के बीच गहरे मतभेद और अनिश्चितता का माहौल, अल्पसंख्यक सरकार के विकल्प पर भी चल रहा विचार
संसद में सबसे बड़े दल ‘लिकुड’ का नेतृत्व करने वाले बेंजामिन नेतन्याहू और आइसेनकोट यदि मिलकर प्रयास करें तो यह यहूदी बहुल दलों के साथ एक व्यापक एकता सरकार के रूप में सामने आ सकता है। हालांकि, कई बुनियादी मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच गहरी खाई और वैचारिक मतभेद हैं जिन्हें पाटना आसान नहीं होगा। इनमें एक मुख्य विवाद यह भी है कि नेतन्याहू उन धार्मिक दलों पर पूरी तरह निर्भर हैं जो देश के अति-रूढ़िवादी (अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स) यहूदी युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा से पूर्ण छूट दिए जाने की मांग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 7 अक्टूबर के हमलों से जुड़ी खुफिया और प्रशासनिक विफलताओं की किसी भी औपचारिक जांच का नेतन्याहू लगातार कड़ा विरोध कर रहे हैं। इन तमाम अड़चनों के बीच आइसेनकोट के पास एक अल्पसंख्यक सरकार बनाने का भी विकल्प है जिसे अरब दलों का बाहरी समर्थन मिल सके, हालांकि उनके अपने गुट के कुछ सदस्य इस विचार के पक्ष में नहीं हैं।
‘याशार’ पार्टी ने नेतन्याहू पर बोला तीखा हमला, लिकुड पार्टी के सदस्यों से कट्टरपंथियों का साथ छोड़ने की की अपील
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच आइसेनकोट की पार्टी ‘याशार’ ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू के वीडियो बयानों की तीखी आलोचना की है। पार्टी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक आधिकारिक बयान जारी कर नेतन्याहू की पार्टी ‘लिकुड’ के सभी सांसदों और सदस्यों से पुरजोर अपील की गई है कि वे अति-कट्टरपंथी दलों के साथ अपना पुराना राजनीतिक गठबंधन तुरंत तोड़ दें। यहाँ उनका सीधा इशारा नेतन्याहू के धार्मिक-राष्ट्रवादी समर्थक आधार में शामिल दक्षिणपंथी दलों की ओर था। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आइसेनकोट केवल उन्हीं जिम्मेदार दलों और जन प्रतिनिधियों को अपने साथ शामिल करेंगे जो उनके वैचारिक सिद्धांतों और देशहित के नियमों का पूर्ण समर्थन करते हैं।
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