Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Virat Kohli False Claim Clarification: विराट कोहली ने प्रेमानंद महाराज से मिलने के नाम पर पैसे लेने ... मोहाली के चार स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी: ईमेल मिलने के बाद मचा हड़कंप, पुलिस और डॉग स्क्वायड न... मोहाली पुडा भवन में ईडी की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची पंजाब सरकार और GMADA, आज होगी सुनवाई Delhi Intercity Express Stone Pelting: लुधियाना के पास दिल्ली-अमृतसर एक्सप्रेस पर पथराव, तीन खिड़किय... Ludhiana Kidnapping Case: नाबालिग लड़की को जबरन अगवा करने के मामले में अकाली नेता जसकरण सिंह देओल पर... Ludhiana Industrial Theft: साहनेवाल की गणपति इंडस्ट्रियल एस्टेट में बड़ी चोरी, गोदाम से 1240 किलो एल... Zirakpur Mystery Death: जीरकपुर की सोसायटी में संदिग्ध हालात में मिला डीएवी छात्र का शव, सीने पर मिल... जालंधर में अस्थायी पटाखा मार्केट का रास्ता साफ: राओवाली में 5.5 एकड़ जमीन पर लगेगी मंडी, प्रशासन ने ... गुरदासपुर में बुजुर्ग महिला से झपटमारी के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार: मोबाइल और मोटरसाइकिल बरामद Ludhiana Crime News: श्मशान घाट पर चिता सजने के ऐन वक्त पर रोका अंतिम संस्कार, परिजनों ने लगाया गला ...

37 हजार कर्मचारी, 3000 करोड़ का बजट.. फिर युद्ध क्यों नहीं रोक पाता यूनाइटेड नेशन?

36

पर्दे के पीछे से जंग लड़ रहे इजराइल और ईरान अब आमने-सामने आ गए हैं. मंगलवार (1 अक्तूबर) की रात ईरान ने इजराइल पर एक साथ 200 बैलिस्टिक मिसाइल दाग युद्ध का उद्घोष कर दिया. इजराइल भी जवाबी हमले की तैयारी कर रहा है. इन दोनों के जंग में सवाल संयुक्त राष्ट्र संघ पर उठ रहा है.

1945 में शांति स्थापित के लिए गठित यूनाइटेड नेशन 7वीं बार किसी युद्ध को रोकने में फेल साबित हुआ है. वर्तमान में यूएन की नाकामी की वजह से 8 देश जंग के मैदान में हैं. इनमें एक तो संयुक्त राष्ट्र संघ का स्थाई सदस्य रूस भी है.

7वां मौका, जब युद्ध नहीं रोक पाया UN

इजराइल और ईरान के बीच जो जंग की शुरुआत हुई है, वो इतिहास का 7वां मौका है, जब यूनाइटेड नेशन जंग रोकने में विफल रहा है. यूएन 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच भी जंग नहीं रोक पाया था. दोनों देश के बीच अब तक जंग चल ही रहे हैं.

यूएन की विफलता की वजह से दुनिया भर में अब तक 40 लाख लोग जंग में मारे जा चुके हैं. इन आंकड़ों को डिटेल में समझिए…

1. संयुक्त राष्ट्र संघ के गठन के 10 साल बाद अमेरिका ने वियतनाम पर अटैक कर दिया. इस जंग को वियतनाम-अमेरिका युद्ध के नाम से जाना जाता है. यूएन इस हमले को रोक पाने में विफल रहा. इस जंग में करीब 20 लाख लोग मारे गए. मरने वाले अधिकांश वियतनाम के ही थे.

2. 1980 के आखिर में इराकी सेना ने ईरान पर हमला कर दिया. गुस्साए ईरान ने जंग छेड़ने की घोषणा कर दी. दोनों देश के बीच करीब 8 साल तक युद्ध चलता रहा. इस युद्ध में करीब 10 लाख लोग मारे गए. यूएन इसे भी रोकने में फेल रहा.

3. 1994 में रवांडा में आंतरिक युद्ध छिड़ गया. बहुसंख्यक हूतू ने वहां के अल्पसंख्यक समुदाय तुत्सी के लोगों पर आक्रमण कर दिया. यूएन शांति समझौते के लिए मैदान में आया, लेकिन तब तक बात आगे बढ़ गई. इस नरसंहार में 8 लाख लोग मारे गए. 2021 में फ्रांस के राष्ट्रपति ने इसके लिए माफी मांगी थी.

4. 1991 में गल्फ वार छिड़ गया. इसमें एक तरफ अमेरिका नेतृत्व कर रहा था और दूसरी तरफ इराक. यह युद्ध कुवैत की संप्रुभता को लेकर शुरू हुआ था. इस जंग में करीब 50 हजार लोग दोनों तरफ से मारे गए. सबसे ज्यादा नुकसान इराक को हुआ था.

कितना है यूएन का सालाना बजट?

2024 में संयुक्त राष्ट्र संघ का कुल बजट 3.59 बिलियन डॉलर (लगभग 3000 करोड़ रुपए) है. साल 2021 में यूनाइटेड नेशन का कुल 150 मिलियन डॉलर (1134 करोड़ रुपए)था. संयुक्त राष्ट्र संघ को सदस्य देशों की ओर से चंदे के रूप में ये राशि मिलती है. दुनिया के करीब 55 देश नियमित रूप से यूएन को चंदा देता है.

यूएन को सबसे ज्यादा चंदा अमेरिका देता है. यूनाइटेड नेशन इन पैसों का खर्च कार्यक्रम के कार्यान्वयन और अधिकारियों की सैलरी पर करता है. यूएन सुरक्षा काउंसिल में काम करने वाले अधिकारियों की औसतन सैलरी 98 हजार डॉलर प्रति वर्ष है. इसे रुपए में देखा जाए तो यह 7 लाख रुपए प्रति माह है. संयुक्त राष्ट्र संघ के मुताबिक पूरी दुनिया में शांति स्थापित के लिए उसके 37000 कर्मचारी काम कर रहे हैं.

फिर युद्ध क्यों नहीं रोक पा रहा यूएन?

युद्ध न रोक पाने की सबसे बड़ी वजह यूनाइटेड नेशन की पॉलिसी है. संयुक्त राष्ट्र संघ से जुड़े तो 193 देश हैं, लेकिन दबदबा सिर्फ 5 देशों (अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन) का ही है. संयुक्त राष्ट्र संघ नियम के मुताबिक स्थाई सदस्य ही बड़े फैसले करेंगे. इन स्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार दिया गया है. इनमें से कोई एक देश भी वीटो का उपयोग करता है तो मामला ठप पड़ सकता है.

संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव बुतरस बुतरस घाली ने अपनी आत्मकथा Unvanquished में इस सिस्टम की आलोचना की है. घाली के मुताबिक यूएन चाहकर भी कोई युद्ध नहीं रोक सकता है, क्योंकि वीटो पावर उसे ऐसा करने नहीं देगा. घाली के मुताबिक अगर टॉप के देश अपने वर्चस्व को बनाए रखने के लिए वीटो सिस्टम को खत्म नहीं होने दे रहे हैं.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.