Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पेपर लीक पर कांग्रेस का दोहरा रवैया! बीजेपी सांसद संबित पात्रा बोले— 'कर्नाटक और झारखंड के छात्रों क... अभिनेत्री तृषा कृष्णन पर विवादित टिप्पणी के मामले में DMK नेता उदयनिधि स्टालिन गिरफ्तार, TVK की शिका... सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्देश: यौन अपराधों के फैसलों से हटेंगे 'पवित्रता', 'हवस' और 'मर्यादा भंग... दतिया उपचुनाव में करारी हार से चौंका बीजेपी नेतृत्व! आज भोपाल में मंथन, भितरघात और वायरल ऑडियो पर हो... मेरठ: दिल्ली-देहरादून हाईवे पर कांवड़ियों के दो गुटों में हिंसक झड़प, कांवड़िए के भेष में तैनात हेड ... बालाघाट में घर में घुसकर सो रही महिला को उठा ले गया बाघ: कान्हा बफर जोन में दिल नहला देने वाला हादसा... पन्ना में दर्दनाक हादसा: 9 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, एनीमिया बनी वजह; पति पर लापर... इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक ग्वालियर में गुमशुदा तोते 'शकुंतला' के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिव... इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी

इंदौर में बाल आश्रम के बीमार बच्चों से मिलने पहुंचे मोहन कैबिनेट के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और तुलसी सिलावट, जाना हाल

40

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती युग पुरुष धाम आश्रम के बच्चों का हाल जानने मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और मंत्री तुलसी सिलावट पहुंचे, जहां उन्होंने बीमार बच्चों के चल रहे उपचार के संबंध में डॉक्टर से जानकारी ली, तो वहीं अस्पताल प्रबंधन से भी इन बच्चों के समूचे इलाज में कोई भी कसर ना छोड़े जाने को लेकर निर्देशित किया। गौरतलब है की मल्हारगंज स्थित युगपुरुष धाम आश्रम के कई बच्चों के बीमार होने का मामला प्रकाश में आया था। जिसकी संभावित वजह फूड पॉइजनिंग और इन्फेक्शन को माना जा रहा है, जिसमें अब तक आश्रम में 5 बच्चों की मौत हो चुकी है।

वहीं फिलहाल इस मामले में शासन प्रशासन को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बायोलॉजिकल टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार है। जिसके बाद ही इन बच्चों की मौत की वजह पुख्ता रूप से सामने आ सकेगी। वही मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया की अभी पूरे मामले की जांच की जा रही है। पानी का और फूड का सैंपल ले लिया गया है, अभी खाने-पीने की व्यवस्था बाहर से की जा रही है आने वाले समय में हम इस संस्थान के लिए एक मास्टर प्लान बनाएंगे क्योंकि ऐसे बच्चों को रखना यह एक चैलेंज होता है। यह मेरा एक प्रेक्टिकल अनुभव है।

जब मैं एमएसडब्ल्यू किया था तब मैंने 6 महीने इस पर काम किया है मेने इन पर थीसिस लिखी थी, मुझे पता है कि इनको संभालने वाले लोग नहीं मिलते हैं पर वहां पर इनको संभालने वाले बहुत लोग हैं जो भी कमी हुई है उसे हम दूर करेंगे मुख्यमंत्री ने हमें यहां भेजा है और हमने कहा है कलेक्टर और कमिश्नर से की इस संस्था का एक मास्टर प्लान बना दीजिए। इनके रहने की व्यवस्था थोड़ी अपग्रेड करेंगे वहां पर अच्छा डेवलपमेंट कर देंगे और फूड क्वालिटी भी इसकी अपग्रेड करेंगे जिससे यह वापस ना हो वहीं बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है, इसको देखते हुए एक और वार्ड बच्चों के लिए तैयार कर दिया गया है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.